West Asia Live: होर्मुज में एंट्री पर विवाद, अमेरिकी नाकेबंदी पर सवाल; युद्ध से ईरान को 270 अरब डॉलर का नुकसान
पश्चिम एशिया में तनाव अब कूटनीति की सीमाएं लांघकर शक्ति, प्रतिष्ठा और टकराव की खुली जंग में बदलता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद हालात और ज्यादा पेचीदा हो गए हैं। एक ओर डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान समझौते के लिए दबाव में है, तो दूसरी ओर ईरान परमाणु मुद्दे पर अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। इस्राइल और लेबनान के बीच वॉशिंगटन में होने वाली वार्ता पर भी नजरें टिकी हुई है, जिसमें अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ऐसे में पूरा क्षेत्र एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां शांति की उम्मीदें और युद्ध की आशंकाएं दोनों साथ-साथ तेज हो रही हैं और आने वाले दिन स्थिति को और विस्फोटक बना सकते हैं। अमर उजाला के इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े तमाम पल-पल अपडेट्स...
लाइव अपडेट
ईरान-तुर्किये के विदेश मंत्रियों की बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और तुर्किये के विदेश मंत्री हकन फिदान के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता पर चर्चा की गई। यह जानकारी ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने दी है।दोनों नेताओं ने इस दौरान इस्लामाबाद में हुई हालिया वार्ताओं पर भी विचार साझा किए, जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों के तहत बातचीत हुई थी।यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब कूटनीतिक कोशिशें लगातार जारी हैं, हालांकि हालिया दौर की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
पाकिस्तानी जहाजों ने बदला रास्ता
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के दो बड़े तेल टैंकर, 'खैरपुर' और 'शालमार' ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया है। ईरानी और पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, ये दोनों जहाज तेजी से होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन रविवार को अचानक इन्होंने अपना रास्ता बदल लिया।अमेरिकी बातचीत को बताया ऐतिहासिक मौका
अमेरिका के विदेश मंत्री ने इस्राइल-लेबनान के बीच वाशिंगटन में चल रही वार्ता को ऐतिहासिक अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ घंटों में सभी जटिल मुद्दों का समाधान संभव नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि बातचीत आगे बढ़ेगी और दोनों पक्ष सकारात्मक दिशा में कदम उठाएंगे।इस्राइल-लेबनान सीमा पर तनाव तेज
लेबनान स्थित संगठन हिजबुल्ला ने दावा किया है कि उसने आज इस्राइली सेना और सीमा से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। समूह के अनुसार, उसने खियाम के दक्षिण में इजरायली सैनिकों और वाहनों के एक जमावड़े पर रॉकेट दागे।इसके अलावा, हिजबुल्ला ने दावा किया कि उसने कार्मिएल शहर में इस्राइली सैन्य ढांचे पर भी रॉकेट हमले किए। एक अलग बयान में संगठन ने कहा कि उसने क़ौज़ाह क्षेत्र में इस्राइली सैनिकों और वाहनों को भी निशाना बनाया। संगठन ने यह भी दावा किया कि उसने टायर शहर के ऊपर उड़ रहे एक इस्राइली सैन्य ड्रोन को निशाना बनाया। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इजरायल की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
कतर ने ईरान से समझौते के दावों को खारिज किया
कतर के विदेश मंत्रालय ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि दोहा और तेहरान के बीच कोई समझौता हुआ है। कतर का कहना है कि युद्ध के दौरान ईरान की ओर से हमले जारी रहे और ये केवल संघर्षविराम के बाद ही रुके।प्रतिबंधित टैंकर और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव
एक टैंकर, जिसने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने का प्रयास किया था लेकिन बीच में ही अपना रुख बदल लिया, मंगलवार सुबह फिर से इस जलमार्ग से गुजरता हुआ देखा गया। इसे अमेरिकी अवरोध (ब्लॉकेड) की शुरुआती बड़ी परीक्षा के रूप में माना जा रहा है।रिपोर्टों के अनुसार, 'रिच स्टारी' नामक यह रसायन और तेल ढोने वाला टैंकर संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास प्रतीक्षा कर रहा था। शिपिंग डेटा कंपनी लॉयड्स लिस्ट ने ऊर्जा कार्गो ट्रैकिंग फर्म Vortexa के हवाले से यह जानकारी दी।
अमेरिकी सेना ने सोमवार को कहा था कि यह अवरोध केवल ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर लागू है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि क्या 'रिच स्टारी' पहले ईरान में रुका था या वह ईरानी तेल ले जा रहा था। इस मामले पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इटली ने इस्राइल के साथ रक्षा समझौते को किया निलंबित
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा है कि इटली ने इस्राइल के साथ अपने रक्षा समझौते को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह कदम उस समय सामने आया है जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन और तनाव बढ़ता जा रहा है।ईरान-ओमान बातचीत और क्षेत्रीय तनाव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत की और क्षेत्र में चल रही शांति वार्ता और हालात पर चर्चा की। ईरान ने कहा कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए तैयार है, लेकिन वह अमेरिका के हस्तक्षेप के खिलाफ है। ओमान ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौट आएगी।
ओमान पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिका की कोई भी उकसाने वाली कार्रवाई वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकती है। साथ ही, ईरान के विदेश मंत्री ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बातचीत में भी यही चिंता दोहराई कि मौजूदा तनाव आगे और बढ़ सकता है।
ईरान का आरोप और संयुक्त राष्ट्र को पत्र
ईरान ने पांच अरब देशों बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन से मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अपने इलाके का इस्तेमाल अमेरिका और इस्राइल के हमलों के लिए होने दिया, इसलिए वे इस “आक्रामकता” में शामिल हैं। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर यह भी कहा कि ये देश अब ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा (Self-defence) का अधिकार नहीं जता सकते, क्योंकि उन्होंने खुद हमलों में सहयोग दिया है।
चीनी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया में शांति को बताया जरूरी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान होना चाहिए। यह बयान उन्होंने यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि सभी देशों के लोगों, संस्थानों और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए एक साझा, सहयोगी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया को जंगल के कानून की ओर नहीं लौटना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विकास और सुरक्षा दोनों साथ-साथ चलने चाहिए और सभी देशों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे इस क्षेत्र के देशों का विकास हो सके।

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