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Anuppur News: ऑफिस के साथ घर परिवार को समय देना हो जाता है मुश्किल, कामकाजी महिलाओं के लिए चुनौती भरा हर दिन

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर Published by: अनूपपुर ब्यूरो Updated Sat, 08 Mar 2025 10:47 PM IST
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सार

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। इस अवसर पर अनूपपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के साथ ही चिकित्सा और अन्य विभागों में जिम्मेदारी निभाने वाली महिलाओं ने अपनी कहानी साझा की।

Anuppur It becomes difficult to give time to family along with office every day is challenge for working women
महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, जिले में कई विभागों में महिलाएं आज अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। ऐसे में महिला होने के साथ ही इन महिलाओं को ऑफिस के साथ ही घरों में भी परिवार तथा बच्चों की देखभाल करना तथा प्रत्येक पारिवारिक कार्यक्रम में अपनी भूमिका का निर्वहन करना पड़ता है। कई बार काम के दौरान इन महिलाओं को पारिवारिक जीवन से काफी समझौता भी करना पड़ता है। ऐसे में किस तरह से यह महिलाएं कार्य स्थल और परिवार दोनों ही स्थान पर अपनी भूमिका का निर्वहन करती हैं, इसको लेकर के उनसे बात करते हुए उनके लाइफ स्टाइल के बारे में जाना।

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जैतहरी में पदस्थ एसडीएम अंजलि द्विवेदी जो कि खुद भी शासकीय नौकरी में हैं। इसके साथ ही उनके पति भी दूसरे जिले में पुलिस विभाग में अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। ऐसे में उन्हें बच्चे की देखभाल के साथ ही कार्य पर भी मुख्य पद पर पदस्थ होने के कारण वहां भी प्रत्येक कार्य की निगरानी करने के साथ ही उन्हें पूरा करने के लिए विभागीय कर्मचारियों की बैठक और अन्य जिम्मेदारी में घर की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो पाती है। कार्य और परिवार के बीच में तालमेल बिठाना काफी मुश्किल होता है।

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महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

परिवार के सहयोग से हो जाते हैं दोनों काम
जिला चिकित्सालय अनूपपुर में सिविल सर्जन के रूप में पदस्थ डॉक्टर एस बी अवधिया ने बताया कि महिलाओं के लिए नौकरी में थोड़ी परेशानी तो होती है, लेकिन परिवार के लिए भी समय निकालना पड़ता है। मैं प्रतिदिन सुबह 5:00 उठ जाती हूं और घर का काम पूरा करते हुए समय पर ऑफिस पहुंचकर वहां के सारे कार्य पूरे करती हूं। यदि अनुशासन के साथ कोई कार्य किया जाए तो वह बेहतर होता है इसलिए घर और कार्य का समय मैंने निर्धारित कर लिया है। 38 वर्षों से शासकीय सेवा में रहते हुए कभी भी ऐसी परेशानी नहीं हुई बच्चों को भी शुरू से ही यह समझाया कि कार्य पहले हैं और उसके बाद अन्य काम।

घर का सहयोग मिल जाता है तो हर कार्य है पॉसिबल
खनिज निरीक्षक के रूप में अनूपपुर में पदस्थ ईशा वर्मा ने बताया कि कामकाजी महिलाओं के लिए थोड़ी मुश्किल भरा जीवन तो होता है लेकिन यदि परिवार का सहयोग मिल जाए तो यह मुश्किल दूर हो जाती है। उन्होंने बताया कि 11 वर्षों से वह शासकीय सेवा में है इस दौरान दो बच्चों को पालना और स्कूल ट्यूशन के साथ ही उनके होमवर्क को पूरा कराना यह भी महिलाओं को ही करना पड़ता है, ऐसे में पति का सहयोग मिला जिससे वह घर और ऑफिस दोनों ही जगह तालमेल बनाकर कार्य कर रही है।

अनुशासित जीवन के साथ ही बच्चों को बचपन से ही बनाया सेल्फ डिपेंड
महिला सशक्तिकरण अधिकारी मंजूषा शर्मा ने बताया कि कामकाजी महिलाओं के लिए शुरुआत में काफी मुश्किल होती है लेकिन यदि अनुशासन अपने जीवन में बना लिया जाए तो इस समस्या का सामना किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनके पति भी नौकरी में है ऐसे में बच्चों को शुरू से ही सेल्फ डिपेंड बनाया उसके साथ ही घर के  बुजुर्गों का भी काफी सहयोग मिला।

संघर्ष भरा रहा जीवन, बच्चों को छोड़कर जाने में मन हो जाता है दुखी
अनूपपुर में यातायात प्रभारी के पद पर पदस्थ ज्योति दुबे ने बताया कि वह काफी संघर्ष के बाद आज इस स्थान परपहुंची है। दमोह जिले के छोटे से गांव छपरट बम्होरी में प्रारंभिक शिक्षा के बाद घर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित माध्यमिक विद्यालय तारखेडा जाना पड़ता था बीच में नदी होने के कारण ट्यूब से इसे पार कर जाते थे। इसके बाद अपने दोनों भाइयों के साथ दमोह में किराए का मकान लेकर पढ़ाई पूरी की और इस दौरान खर्च चलाने के लिए बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ती थी।

इसी दौरान कांस्टेबल के पद पर उनका चयन हुआ और नौकरी पर रहते हुए ही सब इंस्पेक्टर की परीक्षा दी जिसमें सूबेदार के पद पर चयन हो गया। कामकाजी महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है कई बार बच्चे मन को नहीं छोड़ते हैं लेकिन ड्यूटी ऐसी है कि जाना पड़ता है। रोते हुए बच्चे को छोड़कर जाने से मन दुखी हो जाता है, फिर भी कार्य सबसे महत्वपूर्ण है।

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