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Barwani : चावल से बनाई जा रही राखियां बन रहीं आकर्षण का केंद्र, जल्द लगाई जाएगी प्रदर्शनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानी
Published by: बड़वानी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2024 06:52 PM IST
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सार
जिले की मुजाल्दे बहनें वर्षा मुजाल्दे और चेतना मुजाल्दे ने राखियों के निर्माण में नवाचार करते हुए चावल की सुन्दर राखियां बनाई हैं। ये राखियां अब आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
चावल से बनाई जा रही सुंदर राखियां
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विस्तार
देशभर में भाई और बहनों के अमिट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के त्यौहार की तैयारियां की जा रही हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में इस पर्व को लेकर राखियों के निर्माण में एक अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। यहां कुछ युवतियों द्वारा चावल से राखियों का निर्माण किया जा रहा है, जो कि आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। हालांकि सामान्य राखियों के मुकाबले चावल से इस तरह की राखियों को बनाने में समय के साथ-साथ ही मेहनत भी अधिक लग रही है, लेकिन इस तरह की राखियां देखने में अधिक सुंदर लगती हैं, तो वहीं इनकी डिमांड भी अधिक रहती है।
बड़वानी नगर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत कम समय के रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इसी में से एक कार्यशाला में जिले की मुजाल्दे बहनें वर्षा मुजाल्दे और चेतना मुजाल्दे ने राखियों के निर्माण में नवाचार करते हुए चावल की सुन्दर राखियां बनाई हैं। ये राखियां अब आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसको लेकर कालेज के प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने बताया कि चावल से बनी राखियां बहुत सुंदर दिखती हैं, और हमारे यहां यह एक अच्छा और अनूठा प्रयोग किया गया है। चावल को शुभ माना जाता है, इसलिए चावल की ये राखियां भी इसी शुभता का प्रतीक हैं। जो भी इन राखियों को देखता है, वह उन्हें खरीदने की इच्छा जता रहा है। हालांकि आने वाले दिनों में इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, और उसी समय इन राखियों की सेल भी की जाएगी।
उद्यमिता के लिए जरुरी है नवाचार
इस अनोखी राखियों के बनाने को लेकर मुजाल्दे बहनों में से वर्षा मुजाल्दे और चेतना मुजाल्दे ने बताया कि उद्यमिता के लिए कुछ नया करना आवश्यक है। क्योंकि मौलिकता और नवाचार का अपना एक अलग ही विशेष महत्व है। हमने इसी बात को ध्यान में रखकर राखी निर्माण में कुछ अलग करते हुए चावल के प्रयोग करने का सोचा, और उसे साकार भी कर दिया। हालांकि चावल की राखी बनाने में समय तो अधिक लगता ही है, साथ ही मेहनत भी अधिक लग जाती है। लेकिन, अंत में इसका रिजल्ट बहुत अच्छा आया और अब हमें सभी की सराहना मिल रही है।
राखियों के निर्माण की इस कार्यशाला में धीरज सगोरे, राहुल भंडोले, स्वाति यादव, संजू डोडवे, शिवानी चौहान, बादल धनगर, अनिल मंडलोई, अरविन्द चौहान, कन्हैया फूलमाली, मधुसूदन चौबे भी इन मुजाल्दा बहनों का सहयोग दे रहे हैं।
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बड़वानी नगर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत कम समय के रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इसी में से एक कार्यशाला में जिले की मुजाल्दे बहनें वर्षा मुजाल्दे और चेतना मुजाल्दे ने राखियों के निर्माण में नवाचार करते हुए चावल की सुन्दर राखियां बनाई हैं। ये राखियां अब आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसको लेकर कालेज के प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने बताया कि चावल से बनी राखियां बहुत सुंदर दिखती हैं, और हमारे यहां यह एक अच्छा और अनूठा प्रयोग किया गया है। चावल को शुभ माना जाता है, इसलिए चावल की ये राखियां भी इसी शुभता का प्रतीक हैं। जो भी इन राखियों को देखता है, वह उन्हें खरीदने की इच्छा जता रहा है। हालांकि आने वाले दिनों में इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, और उसी समय इन राखियों की सेल भी की जाएगी।
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उद्यमिता के लिए जरुरी है नवाचार
इस अनोखी राखियों के बनाने को लेकर मुजाल्दे बहनों में से वर्षा मुजाल्दे और चेतना मुजाल्दे ने बताया कि उद्यमिता के लिए कुछ नया करना आवश्यक है। क्योंकि मौलिकता और नवाचार का अपना एक अलग ही विशेष महत्व है। हमने इसी बात को ध्यान में रखकर राखी निर्माण में कुछ अलग करते हुए चावल के प्रयोग करने का सोचा, और उसे साकार भी कर दिया। हालांकि चावल की राखी बनाने में समय तो अधिक लगता ही है, साथ ही मेहनत भी अधिक लग जाती है। लेकिन, अंत में इसका रिजल्ट बहुत अच्छा आया और अब हमें सभी की सराहना मिल रही है।
राखियों के निर्माण की इस कार्यशाला में धीरज सगोरे, राहुल भंडोले, स्वाति यादव, संजू डोडवे, शिवानी चौहान, बादल धनगर, अनिल मंडलोई, अरविन्द चौहान, कन्हैया फूलमाली, मधुसूदन चौबे भी इन मुजाल्दा बहनों का सहयोग दे रहे हैं।

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