{"_id":"6581175c5c8028f861018635","slug":"mp-news-unique-tradition-of-rajjad-community-in-sehra-village-of-betul-district-2023-12-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: यहां कांटों भरे बिस्तर पर लेटकर लोग निभा रहे परंपरा, सच्चाई साबित करने लिए देनी पड़ती है परीक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: यहां कांटों भरे बिस्तर पर लेटकर लोग निभा रहे परंपरा, सच्चाई साबित करने लिए देनी पड़ती है परीक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Tue, 19 Dec 2023 09:39 AM IST
विज्ञापन
सार
बैतूल जिले के सेहरा गांव में रज्जड़ समाज के बुजुर्ग, जवान और बच्चे निभा रहे ये अद्भुत परंपरा। नुकीले कांटों के बिस्तर पर लेटकर बहा रहे खुद का खून।
कांटों पर लेटकर परंपरा निभाते रज्जड़ समाज के लोग।
- फोटो : Amar Ujala Digital
विज्ञापन
विस्तार
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के एक गांव में एक अनोखी परंपरा का पालन हो रहा है, जिसे देखकर लोगों को रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इसे आस्था कहें या अंधविश्वास, लोग नुकीले कांटों के बिस्तर पर ऐसे लेटते हैं, जैसे कि मखमल के बिस्तर पर लेटे हों। इस अद्भुत परंपरा में रज्जड़ समाज के बुजुर्ग, जवान और बच्चे सभी शामिल होते हैं। बैतूल जिले के सेहरा गांव में हर साल अगहन मास के दौरान रज्जड़ समाज के लोग इस विशेष परंपरा का पालन करते हैं। इन लोगों का कहना है कि वे पांडवों के वंशज हैं और इसलिए वे इसे सालों से निभा रहे हैं।
Trending Videos
आस्था, सच्चाई और भक्ति की परीक्षा
रज्जड़ समाज के लोग कांटों से बनी गादी पर लेटकर अपनी आस्था, सच्चाई और भक्ति की परीक्षा देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान खुश होते हैं और उनकी मनोकामना पूरी होती है। इसके बाद, इन लोगों की बहनों की विदाई का आयोजन होता है। उन्हें नुकीले कांटों की झाड़ियों से लाद करके पूजा जाता है। इसके बाद, एक-एक करके लोग नंगे बदन इन कांटों पर लेटकर सत्य और भक्ति का परिचय देते हैं, जिसमें कई लोगों को शरीर में कांटे चुभते हैं और खून निकलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
परंपरा के पीछे की कहानी
इस परंपरा के पीछे एक कथा है कि एक बार पांडव पानी के लिए भटक रहे थे। तब एक नाहल समुदाय के व्यक्ति ने उन्हें एक पानी का स्रोत बताने के लिए शर्त रखी थी, जिसमें उन्हें उसकी बहन से शादी करनी पड़ेगी। पांडवों ने शर्त मान ली। इस पर विदाई के दिन नाहल ने उन्हें नुकीले कांटों पर लेटकर सच्चे होने की परीक्षा देने का कहा। इसके बाद, सभी पांडव नंगे बदन एक-एक करके परीक्षा को निभाया।
स्वास्थ्य के लिए सही नहीं
हालांकि, डॉ. रानू वर्मा का कहना है कि नुकीले कांटों पर लेटना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है और इससे चोट और संक्रमण हो सकता हैं, जिससे किसी की जान को खतरा हो सकता है।

कमेंट
कमेंट X