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MP में 14 महीने में 149 तेंदुओं की मौत, सड़क हादसे बने सबसे बड़ा कारण, चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sat, 11 Apr 2026 10:59 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश में जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक तक सिर्फ 14 महीनों में 149 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुईं, जबकि कई तेंदुए करंट लगने, आपसी लड़ाई और अवैध शिकार के कारण भी मारे गए।

149 leopards died in MP  in 14 months! Road accidents are the biggest cause, shocking statistics emerge.
तेदूंए की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश में जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक  पिछले 14 महीनों के दौरान 149 तेंदुओं की मौत हो गई है। यह आकड़े  आरटीआई के जवाब में सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन मौतों में सबसे बड़ा कारण सड़क हादसे रहे हैं। जानकारी के अनुसार कुल मौतों में करीब 31 प्रतिशत तेंदुओं की जान सड़क दुर्घटनाओं में गई, जिनमें 19 मौतें हाईवे पर हुईं। वहीं 24 प्रतिशत मौतें प्राकृतिक कारणों जैसे बीमारी और उम्र के चलते हुईं, जबकि 21 प्रतिशत मामले आपसी संघर्ष के रहे।
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8 तेंदुओं की मौत करंट लगने मौत
इसके अलावा शिकार (पोचिंग) और प्रतिशोध में की गई हत्याएं करीब 14 प्रतिशत मामलों में सामने आई हैं। 8 तेंदुओं की मौत करंट लगने से हुई, जबकि 2 शिकार के फंदों में फंसकर मारे गए। करीब 9 प्रतिशत मामलों में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। ‘स्टेटस ऑफ लेपर्ड्स इन इंडिया 2022’ रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा 3,907 तेंदुए हैं। इसके बावजूद लगातार हो रही मौतों ने चिंता बढ़ा दी है।

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इतनी बड़ी संख्या में मौत चिंताजनक
आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने इन आंकड़ों को “चिंताजनक” बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश 14 माह में इतनी बड़ी संख्या में तेंदुओं की मौत पर चिंता जताई। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुओं की मौत कम करने के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। नई सड़कों पर एनिमल पासेज, साइन बोर्ड और नियमित पेट्रोलिंग जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही सड़कों के पास जल स्रोत बनाने से बचने की सलाह दी जा रही है, ताकि हादसों का खतरा कम हो। 

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15 माह में 64 बाघों की भी मौत दर्ज हुई 
मध्यप्रदेश में बीते 15 महीनों के दौरान 64 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय बन गई है। इनमें से 16 बाघों की मौत करंट लगने से हुई है। दरअसल, जंगलों से निकलकर बाघ गांव और खेतों की ओर पहुंच रहे हैं, जहां फसलों की सुरक्षा के लिए लगाए गए बिजली वाले तार उनके लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। मंडला और जबलपुर संभाग में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

 
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