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MP News: 5 माह की कवायद के बाद किसानों को जमीन का 4 गुना मुआवजा, CM बोले-लंबित मामलों में भी मिलेगी बढ़ी राशि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 22 Apr 2026 10:34 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब अधिग्रहित कृषि भूमि के बदले किसानों और भू-स्वामियों को गाइडलाइन मूल्य का अधिकतम 4 गुना तक मुआवजा मिलेगा। खास बात यह है कि इसका लाभ लंबित मामलों को भी मिलेगा और यह फैसला पांच माह की कवायद तथा 400 हितधारकों से चर्चा के बाद लिया गया।
सीएम मोहन यादव मीडिया को संबोधित करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश सरकार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत किसानों के हित में बड़ा और अहम फैसला लिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि अधिग्रहण के लिए दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाने का निर्णय लिया गया। अब किसानों को उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले बाजार मूल्य का अधिकतम 4 गुना तक मुआवजा मिल सकेगा। बुधवार को समत्व भवन में प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह निर्णय सभी भू-अर्जन परियोजनाओं पर लागू होगा। इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव सिंचाई परियोजनाओं, नई सड़कों, पुलों, रेलवे लाइनों और बांध निर्माण जैसे महत्वपूर्ण अधोसंरचना कार्यों पर पड़ेगा। विशेष रूप से यह लाभ उन सभी लंबित प्रकरणों में भी दिया जाएगा, जहां अब तक अंतिम अवॉर्ड पारित नहीं किया गया है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लागू मल्टीप्लिकेशन फैक्टर (गुणन कारक) को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 करने की मंजूरी दी है। इस बदलाव के बाद विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को पहले की तुलना में अधिक राशि मिलेगी। सीएम ने बताया कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका मतलब है कि भूमि अधिग्रहण के समय किसानों को उनकी जमीन की सरकारी गाइडलाइन वैल्यू (सर्किल रेट/पंजीयन मूल्य) के आधार पर पहले से चार गुना अधिक मुआवजा मिलेगा।
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सीएम ने नवंबर 2025 में दिए थे बदलाव के निर्देश
सरकार के अनुसार यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री ने 7 नवंबर 2025 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में भू-अर्जन नीति की समीक्षा और अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को एक उच्च स्तरीय मंत्रिमंडलीय समिति गठित की गई थी।
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लंबित मामलों में भी मिलेगा बढ़ी दरों पर मुआवजा
समिति ने किसान संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और क्रेडाई तथा फिक्की समेत 400 से अधिक हितधारकों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर मंत्रिपरिषद ने यह फैसला लिया। यह निर्णय ‘मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015’ के तहत लागू किया गया है। नई व्यवस्था 22 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ केवल नई परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लंबित मामलों में भी मिलेगा, जिनमें अभी तक अंतिम अवॉर्ड पारित नहीं हुआ है।
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विकास कार्यों के अधिग्रहण से जुड़ी दिक्कतें कम होगी
इस फैसले से सड़क, पुल, रेलवे लाइन, सिंचाई परियोजनाओं और बांध निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण से जुड़ी दिक्कतें कम होने की उम्मीद है। वहीं किसानों को उनकी जमीन का बेहतर मूल्य मिलने से आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। हालांकि नगरीय क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए गुणन कारक 1.0 ही यथावत रहेगा। सरकार का दावा है कि यह फैसला किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उन्हें प्रदेश के विकास में भागीदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लागू मल्टीप्लिकेशन फैक्टर (गुणन कारक) को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 करने की मंजूरी दी है। इस बदलाव के बाद विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि पर किसानों को पहले की तुलना में अधिक राशि मिलेगी। सीएम ने बताया कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका मतलब है कि भूमि अधिग्रहण के समय किसानों को उनकी जमीन की सरकारी गाइडलाइन वैल्यू (सर्किल रेट/पंजीयन मूल्य) के आधार पर पहले से चार गुना अधिक मुआवजा मिलेगा।
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सीएम ने नवंबर 2025 में दिए थे बदलाव के निर्देश
सरकार के अनुसार यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री ने 7 नवंबर 2025 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में भू-अर्जन नीति की समीक्षा और अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को एक उच्च स्तरीय मंत्रिमंडलीय समिति गठित की गई थी।
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लंबित मामलों में भी मिलेगा बढ़ी दरों पर मुआवजा
समिति ने किसान संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और क्रेडाई तथा फिक्की समेत 400 से अधिक हितधारकों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर मंत्रिपरिषद ने यह फैसला लिया। यह निर्णय ‘मध्यप्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2015’ के तहत लागू किया गया है। नई व्यवस्था 22 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ केवल नई परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लंबित मामलों में भी मिलेगा, जिनमें अभी तक अंतिम अवॉर्ड पारित नहीं हुआ है।
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विकास कार्यों के अधिग्रहण से जुड़ी दिक्कतें कम होगी
इस फैसले से सड़क, पुल, रेलवे लाइन, सिंचाई परियोजनाओं और बांध निर्माण जैसी बड़ी परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण से जुड़ी दिक्कतें कम होने की उम्मीद है। वहीं किसानों को उनकी जमीन का बेहतर मूल्य मिलने से आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। हालांकि नगरीय क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए गुणन कारक 1.0 ही यथावत रहेगा। सरकार का दावा है कि यह फैसला किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ उन्हें प्रदेश के विकास में भागीदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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