{"_id":"6a50fcf9c4a98ca8a60f0774","slug":"a-treasure-trove-of-history-unearthed-in-mp-lakshmibai-s-seal-original-documents-from-1857-and-a-435-year-o-2026-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP की धरती से निकला इतिहास का खजाना: लक्ष्मीबाई की मुहर,1857 के मूल दस्तावेज और 435 साल पुरानी रसिकप्रिया मिली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP की धरती से निकला इतिहास का खजाना: लक्ष्मीबाई की मुहर,1857 के मूल दस्तावेज और 435 साल पुरानी रसिकप्रिया मिली
Fri, 10 Jul 2026 07:39 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 10 Jul 2026 07:39 PM IST
सार
मध्य प्रदेश ने 34.45 लाख से अधिक पांडुलिपि पन्नों का डिजिटल पंजीयन कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। अभियान के दौरान रानी लक्ष्मीबाई की दुर्लभ मुहर, 1857 के मूल दस्तावेज, रसिकप्रिया, प्राचीन नक्शे और कई ऐतिहासिक ग्रंथ सामने आए हैं, जो इतिहास और शोध के नए द्वार खोलेंगे।
विज्ञापन
दुर्लभ दस्तावेज
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश में चल रहे ज्ञान भारतम् अभियान के दौरान इतिहास के ऐसे दुर्लभ दस्तावेज सामने आए हैं, जो देश के इतिहास और शोध को नई दिशा दे सकते हैं। अभियान में रानी लक्ष्मीबाई की अष्टकोणीय राजसी मुहर, 1857 की क्रांति से जुड़े मूल पत्र, महाकवि केशवदास की 435 साल पुरानी हस्तलिखित रसिकप्रिया, 220 साल पुराना 20 फीट लंबा श्रीमद्भागवत महापुराण और 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का प्राचीन नक्शा जैसी अमूल्य धरोहरें मिली हैं। इसी अभियान की बदौलत मध्य प्रदेश ने 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपि पन्नों का पंजीयन कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। इनमें 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सत्यापन भी पूरा हो चुका है, जबकि बाकी का काम जारी है।
रानी लक्ष्मीबाई की दुर्लभ मुहर बनी सबसे बड़ी खोज
पुरातत्व विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा के मुताबिक अभियान में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े दुर्लभ चित्र और उनकी अष्टकोणीय राजसी मुहर मिली है। खास बात यह है कि इस मुहर पर पहली बार 'श्री' अंकित मिला है। इसके अलावा 1857 की क्रांति से जुड़े कई मूल पत्र भी मिले हैं, जो उस दौर के इतिहास को नए नजरिए से समझने में मदद करेंगे।
जिलों से निकला अनमोल खजाना
1 - टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा हाथ से बनाया गया जम्बूद्वीप का प्राचीन नक्शा मिला है, जिसमें भारतीय भूगोल का विस्तृत चित्रण है।
2 - पन्ना के श्री राम जानकी मंदिर से वर्ष 1591 ईस्वी में महाकवि केशवदास द्वारा लिखी गई 'रसिकप्रिया' की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है।
3 - बुरहानपुर से करीब 220 साल पुराना और 20 फीट लंबा हस्तलिखित श्रीमद्भागवत महापुराण मिला है, जिसे सुरक्षित किया गया है।
4 - दतिया में एक निजी संग्रह से ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के शासनकाल का विक्रम संवत 1828 अंकित ऐतिहासिक ताम्रपत्र अभिलेख मिला है।
5- इसके अलावा जैन मंदिरों, धार्मिक संस्थानों और निजी संग्रहों से रामचरितमानस, प्राचीन हिंदी साहित्य और कई दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ भी सामने आए हैं।
इतिहास लेखन को मिलेगी नई दिशा
डॉ. मनीषा शर्मा का कहना है कि इन दस्तावेजों से स्थानीय और क्षेत्रीय इतिहास पर नए शोध की संभावनाएं बढ़ेंगी। कई महत्वपूर्ण प्राचीन नक्शे भी मिले हैं, जिनका अध्ययन आगे किया जाएगा। विभाग इन सभी धरोहरों का डिजिटलीकरण और संरक्षण कर रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत सुरक्षित पहुंच सके।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-जुलाई की झमाझम से बदली तस्वीर, एमपी में सामान्य से 10% ज्यादा बारिश, अगले 4 दिन तक बारिश के आसार
एमपी बना देश में नंबर-1
ज्ञान भारतम् ऐप पर सबसे अधिक पांडुलिपियों का पंजीयन कर मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। भोपाल सबसे आगे है, जहां 24 लाख 26 हजार 172 पांडुलिपियां दर्ज हुई हैं। इसके बाद इंदौर, रीवा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पन्ना, सागर, ग्वालियर और उज्जैन का स्थान है।
यह भी पढ़ें-भोपाल कलेक्ट्रेट में हाईवोल्टेज हंगामा: भिड़े विधायक-अध्यक्ष, औकात में रहो से मचा बवाल, विधायकों का वॉकआउट
आम लोग भी बन सकते हैं भागीदार
ज्ञान भारतम् ऐप भारत सरकार का डिजिटल मंच है, जहां लेखक, विषय, भाषा या शीर्षक के आधार पर पांडुलिपियों की खोज की जा सकती है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी परिवार, मठ, मंदिर या संस्था के पास पुरानी हस्तलिखित पोथियां, ताम्रपत्र या ग्रंथ हैं, तो उनकी जानकारी ऐप पर दर्ज कराकर उनका निःशुल्क डिजिटलीकरण और संरक्षण कराया जा सकता है।
विज्ञापन
रानी लक्ष्मीबाई की दुर्लभ मुहर बनी सबसे बड़ी खोज
पुरातत्व विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा के मुताबिक अभियान में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े दुर्लभ चित्र और उनकी अष्टकोणीय राजसी मुहर मिली है। खास बात यह है कि इस मुहर पर पहली बार 'श्री' अंकित मिला है। इसके अलावा 1857 की क्रांति से जुड़े कई मूल पत्र भी मिले हैं, जो उस दौर के इतिहास को नए नजरिए से समझने में मदद करेंगे।
विज्ञापन
जिलों से निकला अनमोल खजाना
1 - टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा हाथ से बनाया गया जम्बूद्वीप का प्राचीन नक्शा मिला है, जिसमें भारतीय भूगोल का विस्तृत चित्रण है।
2 - पन्ना के श्री राम जानकी मंदिर से वर्ष 1591 ईस्वी में महाकवि केशवदास द्वारा लिखी गई 'रसिकप्रिया' की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है।
3 - बुरहानपुर से करीब 220 साल पुराना और 20 फीट लंबा हस्तलिखित श्रीमद्भागवत महापुराण मिला है, जिसे सुरक्षित किया गया है।
4 - दतिया में एक निजी संग्रह से ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के शासनकाल का विक्रम संवत 1828 अंकित ऐतिहासिक ताम्रपत्र अभिलेख मिला है।
5- इसके अलावा जैन मंदिरों, धार्मिक संस्थानों और निजी संग्रहों से रामचरितमानस, प्राचीन हिंदी साहित्य और कई दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ भी सामने आए हैं।
इतिहास लेखन को मिलेगी नई दिशा
डॉ. मनीषा शर्मा का कहना है कि इन दस्तावेजों से स्थानीय और क्षेत्रीय इतिहास पर नए शोध की संभावनाएं बढ़ेंगी। कई महत्वपूर्ण प्राचीन नक्शे भी मिले हैं, जिनका अध्ययन आगे किया जाएगा। विभाग इन सभी धरोहरों का डिजिटलीकरण और संरक्षण कर रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत सुरक्षित पहुंच सके।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-जुलाई की झमाझम से बदली तस्वीर, एमपी में सामान्य से 10% ज्यादा बारिश, अगले 4 दिन तक बारिश के आसार
एमपी बना देश में नंबर-1
ज्ञान भारतम् ऐप पर सबसे अधिक पांडुलिपियों का पंजीयन कर मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। भोपाल सबसे आगे है, जहां 24 लाख 26 हजार 172 पांडुलिपियां दर्ज हुई हैं। इसके बाद इंदौर, रीवा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पन्ना, सागर, ग्वालियर और उज्जैन का स्थान है।
यह भी पढ़ें-भोपाल कलेक्ट्रेट में हाईवोल्टेज हंगामा: भिड़े विधायक-अध्यक्ष, औकात में रहो से मचा बवाल, विधायकों का वॉकआउट
आम लोग भी बन सकते हैं भागीदार
ज्ञान भारतम् ऐप भारत सरकार का डिजिटल मंच है, जहां लेखक, विषय, भाषा या शीर्षक के आधार पर पांडुलिपियों की खोज की जा सकती है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी परिवार, मठ, मंदिर या संस्था के पास पुरानी हस्तलिखित पोथियां, ताम्रपत्र या ग्रंथ हैं, तो उनकी जानकारी ऐप पर दर्ज कराकर उनका निःशुल्क डिजिटलीकरण और संरक्षण कराया जा सकता है।
