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एनआईयूए-निगम के बीच समझौताः भोपाल में सबसे गर्म इलाकों की होगी मैपिंग, 5 करोड़ से बनेगा हीट रेजिलिएंट मॉडल
Sat, 11 Jul 2026 05:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 11 Jul 2026 05:37 PM IST
सार
जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए भोपाल को गर्मी और लू के प्रभाव से सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर के सबसे अधिक गर्म इलाकों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान की जाएगी और वहां विशेष उपाय लागू किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार 5 करोड़ रुपए की सहायता देगी।
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भोपाल नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल को भविष्य की भीषण गर्मी के लिए तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। भोपाल नगर निगम और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अमृत 2.0 योजना के तहत देश के 12 चयनित शहरों में लागू की जा रही है। एमओयू पर नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन और एनआईयूए की निदेशक डॉ. डेबोलिना कुंडू ने हस्ताक्षर किए।
पहले खोजेंगे सबसे ज्यादा गर्म इलाके
परियोजना के तहत सैटेलाइट डेटा और आधुनिक तकनीक की मदद से शहर के उन हिस्सों की मैपिंग की जाएगी, जहां तापमान सामान्य से अधिक रहता है। इसके बाद उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, झुग्गी बस्तियों और खुले में काम करने वाले मजदूरों जैसे संवेदनशील वर्गों की पहचान कर गर्मी और लू से बचाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
कूल रूफ और हरियाली से घटेगा तापमान
हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने के लिए इमारतों की छतों पर कूल रूफ तकनीक और विशेष परावर्तक कोटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, छायादार सार्वजनिक स्थान विकसित करने और जल स्रोतों के संरक्षण व पुनर्जीवन पर भी काम होगा। लोगों को लू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
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यह भी पढ़ें-तीन दिन राहत, फिर लौटेगी झमाझम बारिश, 14 जुलाई से नए सिस्टम का असर, अभी सिर्फ हल्की बारिश का दौर
5 करोड़ की मदद, 15 महीने में तैयार होगा मॉडल
केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए भोपाल नगर निगम को 5 करोड़ रुपए का अनुदान देगी। 15 महीने तक चलने वाली इस योजना में हीट एडेप्टेशन और हीट मिटिगेशन से जुड़े कार्य किए जाएंगे, ताकि भोपाल को भविष्य के लिए हीट रेजिलिएंट शहर के रूप में विकसित किया जा सके।
यह भी पढ़ें-दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026: सियासी गहमागहमी के बीच नरोत्तम पहुंच रहे भोपाल, इनके साथ होगी 'वन-टू-वन' चर्चा
दीर्घकालिक हीट एक्शन प्लान भी बनेगा
नगर निगम परियोजना के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जो हीट मैपिंग, आधारभूत सर्वे, योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही भोपाल के लिए दीर्घकालिक हीट रेजिलिएंट सिटी फ्रेमवर्क और हीट एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में बढ़ती गर्मी के असर को कम किया जा सके।
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पहले खोजेंगे सबसे ज्यादा गर्म इलाके
परियोजना के तहत सैटेलाइट डेटा और आधुनिक तकनीक की मदद से शहर के उन हिस्सों की मैपिंग की जाएगी, जहां तापमान सामान्य से अधिक रहता है। इसके बाद उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, झुग्गी बस्तियों और खुले में काम करने वाले मजदूरों जैसे संवेदनशील वर्गों की पहचान कर गर्मी और लू से बचाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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कूल रूफ और हरियाली से घटेगा तापमान
हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने के लिए इमारतों की छतों पर कूल रूफ तकनीक और विशेष परावर्तक कोटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, छायादार सार्वजनिक स्थान विकसित करने और जल स्रोतों के संरक्षण व पुनर्जीवन पर भी काम होगा। लोगों को लू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
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5 करोड़ की मदद, 15 महीने में तैयार होगा मॉडल
केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए भोपाल नगर निगम को 5 करोड़ रुपए का अनुदान देगी। 15 महीने तक चलने वाली इस योजना में हीट एडेप्टेशन और हीट मिटिगेशन से जुड़े कार्य किए जाएंगे, ताकि भोपाल को भविष्य के लिए हीट रेजिलिएंट शहर के रूप में विकसित किया जा सके।
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दीर्घकालिक हीट एक्शन प्लान भी बनेगा
नगर निगम परियोजना के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जो हीट मैपिंग, आधारभूत सर्वे, योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही भोपाल के लिए दीर्घकालिक हीट रेजिलिएंट सिटी फ्रेमवर्क और हीट एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे आने वाले वर्षों में बढ़ती गर्मी के असर को कम किया जा सके।
