MP: 'संगठन सर्वोपरि है', टिकट विवाद पर देवड़ा का बयान, उमंग सिंघार ने कहा-अब मोहन यादव ने नरोत्तम को निपटाया
दतिया विधानसभा उपचुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे संगठन का निर्णय बताते हुए एकजुटता का संदेश दिया है, जबकि कांग्रेस नेताओं जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा है। इस बीच सिंघार ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के बाद अब मोहन यादव ने नरोत्तम को निपटाया है।
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विस्तार
दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 में उस समय एक दम से सियासी उबाल आ गया, जब पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उनकी जगह पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसे लेकर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने हाईवे जाम किया और तोड़फोड़ भी की। अब इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। वहीं, डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है।
एक ओर भाजपा नेता इसे पार्टी का निर्णय बताते हुए संगठन की रीति-नीति का हवाला दे रहे हैं। वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर निशाना साधा है।
'सभी नेता और कार्यकर्ता पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करेंगे'
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर लिया गया निर्णय भारतीय जनता पार्टी का निर्णय है, जिसे सभी शिरोधार्य करते हैं। संगठन हमारे लिए सर्वोपरि है। पार्टी ने जो निर्णय लिया है, उसका सभी नेता और कार्यकर्ता पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करेंगे।
उन्होंने कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता हैं। उन्होंने संगठन और सरकार में विभिन्न दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है तथा संगठन की कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हैं।
देवड़ा ने कहा कि यदि कहीं किसी प्रकार की छोटी-बड़ी नाराजगी है, तो उसका समाधान पार्टी स्तर पर आपसी संवाद के माध्यम से कर लिया जाएगा। ऐसी कोई स्थिति नहीं बनेगी, जिससे संगठन प्रभावित हो। भारतीय जनता पार्टी में उम्मीदवार की घोषणा अवश्य होती है, लेकिन चुनाव किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी पार्टी का होता है। उन्होंने कहा कि दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सभी नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता पारिवारिक भावना और पूर्ण एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे। पूरा संगठन एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड विजय सुनिश्चित करेगा।
'भाजपा की आंतरिक गुटबाजी आज चौराहे पर आ गई'
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, कि पहले शिवराज सिंह ने और अब मोहन यादव ने नरोत्तम मिश्रा को निपटाया है। अब आगामी चुनाव में दतिया की जनता भाजपा को निपटाएगी। उन्होंने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी की घोषणा होते ही भाजपा का असली चाल, चरित्र और चेहरा पूरे प्रदेश के सामने आ गया। दूसरे दलों पर गुटबाजी के आरोप लगाने वाली भाजपा की आंतरिक गुटबाजी आज चौराहे पर आ गई है।
उमंग सिंघार ने कहा कि दतिया की जनता ने पहले भी अहंकार को हराया था और इस बार भी हिंसा, गुंडाराज और भाजपा की दादागिरी का जवाब अपने वोट की ताकत से देगी। उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव में भाजपा की हार तय है, क्योंकि जनता विकास चाहती है, दहशत नहीं।
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'आज दतिया उग्रवाद की आग में झुलस रहा'
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुर्भाग्य है कि मध्य प्रदेश के वर्तमान गृह मंत्री, पूर्व गृह मंत्री के उग्र समर्थकों को संभाल नहीं पा रहे हैं। आज दतिया उग्रवाद की आग में झुलस रहा है। दतिया की जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा को उसके कुशासन और विफल कानून-व्यवस्था का जवाब उपचुनाव में देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"
शिवसेना (यूबीटी) ने नरोत्तम मिश्रा को दिया टिकट का ऑफर
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के मध्य प्रदेश अध्यक्ष सुनील शर्मा ने बताया कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो पार्टी प्रमुख एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सहित अन्य वरिष्ठ नेता, जिनमें आदित्य ठाकरे भी शामिल हैं, मध्य प्रदेश में उनके समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे।
सुनील शर्मा ने मीडिया से कहा कि मैंने पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा को यह प्रस्ताव दिया है। मैंने पार्टी के मध्य प्रदेश आईटी सेल प्रमुख नाहर सिंह गौर से भी कहा है कि वे सोशल मीडिया पर डॉ. मिश्रा के नाम वीडियो संदेश साझा करें।
वर्तमान में शिवसेना (यूबीटी) के महाराष्ट्र विधानसभा में 20 विधायक और लोकसभा में तीन सांसद हैं। हालांकि, हाल ही में पार्टी को उस समय झटका लगा था, जब उसके छह लोकसभा सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे।
