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Bhopal: कम बारिश से खेती पर संकट, जीतू पटवारी ने CM को लिखा पत्र, किसानों के लिए 6 सूत्रीय राहत पैकेज की मांग
Sat, 18 Jul 2026 06:41 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 18 Jul 2026 06:41 PM IST
सार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर कम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए तत्काल राहत देने की मांग की है। उन्होंने फसल क्षति का सर्वे, पुनर्बोवनी के लिए मुफ्त बीज, डीजल-बिजली व सिंचाई पर राहत पैकेज और फसल बीमा का शीघ्र भुगतान समेत छह प्रमुख मांगें रखी हैं।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश में कम बारिश के कारण गहराते कृषि संकट पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है और 55 में से 28 जिलों में 16 से 78 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई है। इससे खरीफ फसलों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कई जिलों में बोवनी प्रभावित हुई
पटवारी ने कहा कि अलीराजपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मंडला, शहडोल, सागर, रायसेन, शिवपुरी और जबलपुर समेत कई जिलों में बोवनी प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर किसान अभी तक बोवनी नहीं कर सके हैं, जबकि जहां बोवनी हो चुकी है वहां फसलें सूखने लगी हैं।
धान की केवल 41 प्रतिशत बोवनी हुई
उन्होंने पत्र में कहा कि रीवा संभाग में धान की केवल 41 प्रतिशत बोवनी हुई है। नर्मदापुरम में 38 प्रतिशत खेत अब भी खाली हैं, जबकि रायसेन में लक्ष्य के मुकाबले केवल 65 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई हो सकी है। मुरैना में 11 जुलाई के बाद बारिश नहीं होने से बाजरा और अन्य खरीफ फसलों को 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। जबलपुर, सतना, मैहर और अलीराजपुर में भी धान, मक्का, कपास और सोयाबीन की फसलें संकट में हैं।
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सीएम से रखीं छह प्रमुख मांगें
पटवारी ने मुख्यमंत्री से प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी कराकर फसल नुकसान का आकलन कराने, पुनर्बोवनी के लिए आर्थिक सहायता और निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने, डीजल, बिजली और सिंचाई के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने, सूखती फसलों वाले क्षेत्रों में आपातकालीन जल प्रबंधन योजना लागू करने तथा कृषि, राजस्व और मौसम विभाग की संयुक्त जिला स्तरीय निगरानी समितियां बनाकर प्रतिदिन समीक्षा करने की मांग की।
यह भी पढ़ें-सोशल साइट एक्स और फोन से दूरी: अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह का फैसला, धर्म यात्रा पर करेंगे फोकस
सरकार केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे
पटवारी ने कहा कि किसान हर साल प्रकृति की मार झेलता है, लेकिन यदि सरकार भी समय पर राहत नहीं देती तो उसका भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि सरकार केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचकर किसानों को भरोसा दिलाए कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।
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कई जिलों में बोवनी प्रभावित हुई
पटवारी ने कहा कि अलीराजपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मंडला, शहडोल, सागर, रायसेन, शिवपुरी और जबलपुर समेत कई जिलों में बोवनी प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर किसान अभी तक बोवनी नहीं कर सके हैं, जबकि जहां बोवनी हो चुकी है वहां फसलें सूखने लगी हैं।
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धान की केवल 41 प्रतिशत बोवनी हुई
उन्होंने पत्र में कहा कि रीवा संभाग में धान की केवल 41 प्रतिशत बोवनी हुई है। नर्मदापुरम में 38 प्रतिशत खेत अब भी खाली हैं, जबकि रायसेन में लक्ष्य के मुकाबले केवल 65 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई हो सकी है। मुरैना में 11 जुलाई के बाद बारिश नहीं होने से बाजरा और अन्य खरीफ फसलों को 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। जबलपुर, सतना, मैहर और अलीराजपुर में भी धान, मक्का, कपास और सोयाबीन की फसलें संकट में हैं।
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सीएम से रखीं छह प्रमुख मांगें
पटवारी ने मुख्यमंत्री से प्रभावित जिलों में विशेष गिरदावरी कराकर फसल नुकसान का आकलन कराने, पुनर्बोवनी के लिए आर्थिक सहायता और निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने, डीजल, बिजली और सिंचाई के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने, सूखती फसलों वाले क्षेत्रों में आपातकालीन जल प्रबंधन योजना लागू करने तथा कृषि, राजस्व और मौसम विभाग की संयुक्त जिला स्तरीय निगरानी समितियां बनाकर प्रतिदिन समीक्षा करने की मांग की।
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सरकार केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे
पटवारी ने कहा कि किसान हर साल प्रकृति की मार झेलता है, लेकिन यदि सरकार भी समय पर राहत नहीं देती तो उसका भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि सरकार केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचकर किसानों को भरोसा दिलाए कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।
