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भोपाल के गली-मोहल्ले में होगी प्रॉपर्टी की जांच: 21 जोन में उतरेंगी टीम, घर में कारोबार मिला तो मौके पर नोटिस
Sat, 08 Aug 2026 05:03 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 08 Aug 2026 05:03 PM IST
सार
भोपाल में रिहायशी मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच अब पूरे शहर में होगी। नगर निगम 21 जोन में टीमें भेजकर गली-मोहल्लों और कॉलोनियों तक सर्वे करेगा। करीब एक लाख संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग का अनुमान है। 10 से 15 दिन में सर्वे पूरा कर नियम उल्लंघन पर मौके पर नोटिस दिया जाएगा। 15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी है।
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पूर्व में हुआ रहवासियों का विरोध प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रिहायशी मकानों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अब नगर निगम पूरे भोपाल का सर्वे कराने जा रहा है। शहर के किसी एक इलाके या प्रमुख बाजार तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 21 जोन में टीमें बनाकर गली-मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और मुख्य सड़कों तक संपत्तियों की जांच की जाएगी। नगर निगम के प्रारंभिक आकलन में करीब एक लाख ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं, जहां आवासीय भवनों में किसी न किसी रूप में कारोबार संचालित होने की आशंका है। इनमें ब्यूटी पार्लर, सैलून, किराना दुकान, कोचिंग, क्लीनिक, बुटीक और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं।
कांग्रेस बोली- रहवासी और व्यापारी दोनों भुगत रहे खामियाजा
पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के मामले में भ्रष्टाचार हुआ है। कांग्रेस सरकार के समय मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे रोक दिया। पीसी शर्मा ने कहा कि मास्टर प्लान लागू नहीं होने का असर अब शहर की व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और अब नगर निगम की कार्रवाई के बीच रहवासी और व्यापारी दोनों परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन करेगी।
10 से 15 दिन में पूरा करने का लक्ष्य
नगर निगम ने सर्वे को तेजी से पूरा करने की तैयारी की है। इसके लिए सभी 21 जोन में विशेष दल बनाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार करीब 10 से 15 दिन में सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। टीमें मौके पर जाकर देखेंगी कि भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है और वास्तविकता में वहां किस तरह की गतिविधि संचालित हो रही है। संपत्ति कर के रिकॉर्ड से भी इसका मिलान किया जाएगा।
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सड़क की चौड़ाई से लेकर जल निकाय तक जांच
सिर्फ भवन के इस्तेमाल की जांच ही नहीं होगी। निगम सड़क की चौड़ाई, भवन की अनुमति और आसपास की स्थिति का भी सत्यापन करेगा। जल निकायों और हरित पट्टी वाले क्षेत्रों में स्थित संपत्तियां भी सर्वे के दायरे में रहेंगी। निगम का मकसद यह पता लगाना है कि कितनी संपत्तियां नियमों के अनुसार व्यावसायिक उपयोग में हैं और कितने मामलों में बिना अनुमति आवासीय भवनों में कारोबार किया जा रहा है।
मौके पर ही दिया जाएगा नोटिस
सर्वे के दौरान यदि किसी भवन में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि पाई गई तो संबंधित संपत्ति मालिक को मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है। निगम के रिकॉर्ड में फिलहाल करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं, जबकि बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां भी होने का अनुमान है, जहां कारोबार तो चल रहा है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं ली गई। निगम की कार्रवाई आगे बढ़ने पर ऐसे मामलों में सीलिंग तक की कार्रवाई हो सकती है।
15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में देनी है रिपोर्ट
आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। 5 अगस्त की सुनवाई के बाद कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम को 15 सितंबर तक अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। इसी समयसीमा को देखते हुए शहरभर में सर्वे की प्रक्रिया तेज की गई है।
यह भी पढ़ें-एम्स भोपाल के नए कार्यकारी निदेशक बने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोटवाल
बड़े बाजार ही नहीं, कॉलोनियां भी जांच के घेरे में
अब तक कार्रवाई को लेकर जिन प्रमुख बाजारों और सड़कों की चर्चा होती रही है, उससे आगे बढ़कर निगम की नजर रिहायशी कॉलोनियों पर भी रहेगी। यानी किसी बड़े व्यावसायिक क्षेत्र के साथ घर से संचालित छोटा कारोबार भी सर्वे में सामने आया तो उसकी स्थिति की जांच की जाएगी। इस सर्वे के बाद निगम के पास शहर में रिहायशी संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल का नया और विस्तृत रिकॉर्ड तैयार होगा। इसी आधार पर आगे नोटिस, उपयोग परिवर्तन और कार्रवाई की प्रक्रिया तय की जा सकती है।
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कांग्रेस बोली- रहवासी और व्यापारी दोनों भुगत रहे खामियाजा
पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के मामले में भ्रष्टाचार हुआ है। कांग्रेस सरकार के समय मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे रोक दिया। पीसी शर्मा ने कहा कि मास्टर प्लान लागू नहीं होने का असर अब शहर की व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और अब नगर निगम की कार्रवाई के बीच रहवासी और व्यापारी दोनों परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन करेगी।
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10 से 15 दिन में पूरा करने का लक्ष्य
नगर निगम ने सर्वे को तेजी से पूरा करने की तैयारी की है। इसके लिए सभी 21 जोन में विशेष दल बनाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार करीब 10 से 15 दिन में सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। टीमें मौके पर जाकर देखेंगी कि भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है और वास्तविकता में वहां किस तरह की गतिविधि संचालित हो रही है। संपत्ति कर के रिकॉर्ड से भी इसका मिलान किया जाएगा।
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सड़क की चौड़ाई से लेकर जल निकाय तक जांच
सिर्फ भवन के इस्तेमाल की जांच ही नहीं होगी। निगम सड़क की चौड़ाई, भवन की अनुमति और आसपास की स्थिति का भी सत्यापन करेगा। जल निकायों और हरित पट्टी वाले क्षेत्रों में स्थित संपत्तियां भी सर्वे के दायरे में रहेंगी। निगम का मकसद यह पता लगाना है कि कितनी संपत्तियां नियमों के अनुसार व्यावसायिक उपयोग में हैं और कितने मामलों में बिना अनुमति आवासीय भवनों में कारोबार किया जा रहा है।
मौके पर ही दिया जाएगा नोटिस
सर्वे के दौरान यदि किसी भवन में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि पाई गई तो संबंधित संपत्ति मालिक को मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है। निगम के रिकॉर्ड में फिलहाल करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं, जबकि बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां भी होने का अनुमान है, जहां कारोबार तो चल रहा है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं ली गई। निगम की कार्रवाई आगे बढ़ने पर ऐसे मामलों में सीलिंग तक की कार्रवाई हो सकती है।
15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में देनी है रिपोर्ट
आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। 5 अगस्त की सुनवाई के बाद कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम को 15 सितंबर तक अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। इसी समयसीमा को देखते हुए शहरभर में सर्वे की प्रक्रिया तेज की गई है।
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बड़े बाजार ही नहीं, कॉलोनियां भी जांच के घेरे में
अब तक कार्रवाई को लेकर जिन प्रमुख बाजारों और सड़कों की चर्चा होती रही है, उससे आगे बढ़कर निगम की नजर रिहायशी कॉलोनियों पर भी रहेगी। यानी किसी बड़े व्यावसायिक क्षेत्र के साथ घर से संचालित छोटा कारोबार भी सर्वे में सामने आया तो उसकी स्थिति की जांच की जाएगी। इस सर्वे के बाद निगम के पास शहर में रिहायशी संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल का नया और विस्तृत रिकॉर्ड तैयार होगा। इसी आधार पर आगे नोटिस, उपयोग परिवर्तन और कार्रवाई की प्रक्रिया तय की जा सकती है।
