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Bhopal: प्रदेश भर के एमबीबीएस इंटर्न ने शुरू की हड़ताल, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग, चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार
Fri, 24 Jul 2026 06:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 24 Jul 2026 06:25 PM IST
सार
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न शुक्रवार दोपहर 2 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। इंटर्न्स ने चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार करते हुए 14,337 से बढ़ाकर 30 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग की है। उनका कहना है कि कई दौर के ज्ञापन, पदयात्रा और शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया।
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एमबीबीए इंटर्न्स की जीएमसी भोपाल में हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत एमबीबीएस इंटर्न और भावी इंटर्न ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुक्रवार दोपहर 2 बजे से हड़ताल शुरू कर दी है। इंटर्न्स ने इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले 14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह किए जाने की मांग को लेकर चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार कर दिया है। आंदोलन का असर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों की सेवाओं पर पड़ सकता है। इंटर्न्स का कहना है कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से लंबित है। पिछले कई सप्ताह से वे पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाताओं को ज्ञापन सौंपे गए। साथ ही जनजागरूकता अभियान, पदयात्रा, बाइक रैली और काली पट्टी बांधकर विरोध जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया
इंटर्न्स ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, संचालक चिकित्सा शिक्षा, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा), अपर मुख्य सचिव (वित्त), वित्त मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक कई बार ज्ञापन और आवेदन भेजे गए, लेकिन अब तक स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
यह भी पढ़ें-जेपी अस्पताल में बवाल: 21 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, दी आत्मदाह की चेतावनी, अस्पताल की व्यवस्था चरमराई
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एक दिन पहले निकाली थी 1200 इंटर्न्स की पदयात्रा
हड़ताल से एक दिन पहले, 23 जुलाई को करीब 1,200 इंटर्न्स और भावी इंटर्न्स ने भोपाल में हमीदिया अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक विशाल पदयात्रा निकाली थी। यहां मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग दोहराई गई थी। इंटर्न्स को उम्मीद थी कि सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला लेगी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया।
इंटर्न्स बोले-अब हड़ताल ही आखिरी विकल्प
आंदोलन कर रहे इंटर्न्स का कहना है कि लगातार संवाद और शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद समाधान नहीं निकला। इसलिए वे शुक्रवार दोपहर 2 बजे से चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार करने के लिए विवश हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार यदि जल्द उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
यह भी पढ़ें-अरेरा हिल्स थाना प्रभारी शर्मा व एक आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंधों के आरोप में कार्रवाई
क्या है प्रमुख मांग
- वर्तमान 14,337 प्रतिमाह इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह किया जाए।
- प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में समान और सम्मानजनक स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की जाए।
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स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया
इंटर्न्स ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा, संचालक चिकित्सा शिक्षा, अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा), अपर मुख्य सचिव (वित्त), वित्त मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक कई बार ज्ञापन और आवेदन भेजे गए, लेकिन अब तक स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
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एक दिन पहले निकाली थी 1200 इंटर्न्स की पदयात्रा
हड़ताल से एक दिन पहले, 23 जुलाई को करीब 1,200 इंटर्न्स और भावी इंटर्न्स ने भोपाल में हमीदिया अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक विशाल पदयात्रा निकाली थी। यहां मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग दोहराई गई थी। इंटर्न्स को उम्मीद थी कि सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला लेगी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया।
इंटर्न्स बोले-अब हड़ताल ही आखिरी विकल्प
आंदोलन कर रहे इंटर्न्स का कहना है कि लगातार संवाद और शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद समाधान नहीं निकला। इसलिए वे शुक्रवार दोपहर 2 बजे से चिकित्सीय कार्य का बहिष्कार करने के लिए विवश हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार यदि जल्द उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
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क्या है प्रमुख मांग
- वर्तमान 14,337 प्रतिमाह इंटर्नशिप स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 प्रतिमाह किया जाए।
- प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में समान और सम्मानजनक स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की जाए।
