{"_id":"6a632e3688be4a8bf7068077","slug":"uproar-at-jp-hospital-21-employees-fired-threat-of-self-immolation-issued-hospital-operations-in-disarray-2026-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेपी अस्पताल में बवाल: 21 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, दी आत्मदाह की चेतावनी, अस्पताल की व्यवस्था चरमराई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेपी अस्पताल में बवाल: 21 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, दी आत्मदाह की चेतावनी, अस्पताल की व्यवस्था चरमराई
Fri, 24 Jul 2026 02:52 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 24 Jul 2026 02:52 PM IST
सार
जेपी अस्पताल में 21 रोगी कल्याण समिति के कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना सेवा से हटाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सेवा बहाली की मांग की है। एक कर्मचारी ने न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई शासन के आदेश के तहत की गई है।
विज्ञापन
जेपी अस्पताल से निकाले गए कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल में जिला रोगी कल्याण समिति के माध्यम से वर्षों से कार्यरत 21 कर्मचारियों की सेवाएं अचानक समाप्त किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान 58 वर्षीय एम्बुलेंस चालक रमेश शर्मा ने न्याय नहीं मिलने पर अस्पताल के गेट नंबर-21 के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी दे दी। रमेश शर्मा ने कहा, यह सेवा समाप्ति नहीं, मेरा जीवन समाप्त करना है। 58 साल की उम्र में अब मुझे कौन नौकरी देगा? अगर न्याय नहीं मिला तो यहीं आत्मदाह करूंगा।
बिना नोटिस हटाने का आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि 22 जुलाई को सुबह नियमित ड्यूटी करने के बाद करीब 11 बजे उन्हें अचानक सेवा समाप्ति का आदेश थमा दिया गया। न कोई कारण बताया गया और न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया। हटाए गए कर्मचारियों में वाहन चालक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और कम्प्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं। इनमें कई कर्मचारी 20 से 25 वर्षों से अस्पताल में सेवाएं देने का दावा कर रहे हैं।
हार्ट अटैक के बाद नौकरी जाने का दर्द
एम्बुलेंस चालक रमेश शर्मा ने बताया कि वह वर्ष 1999 से अस्पताल में कार्यरत हैं और कोरोना काल में भी लगातार ड्यूटी करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्हें हार्ट अटैक आया था और चिकित्सकों ने दो सप्ताह के भीतर एंजियोप्लास्टी कराने की सलाह दी है। ऐसे समय में नौकरी खत्म होने से उनका परिवार आर्थिक संकट में आ गया है।
विज्ञापन
वेतन कटौती के भी लगाए आरोप
कर्मचारियों ने अस्पताल प्रबंधन पर मनमाने ढंग से वेतन काटने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि महीने में 14 से 15 हजार रुपये वेतन मिलता है, लेकिन बायोमीट्रिक या रात्रि ड्यूटी के बाद मिलने वाले अवकाश को अनुपस्थिति मानकर कई दिनों का वेतन काट लिया जाता था। कर्मचारियों का दावा है कि कई बार 8 से 10 दिन तक का वेतन काटा गया।
2019 के आदेश की गलत व्याख्या का दावा
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हटाने के लिए वर्ष 2019 के शासनादेश का हवाला दिया गया है, जबकि वह आदेश 2019 के बाद नई नियुक्तियां नहीं करने से संबंधित था। उनका आरोप है कि वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों पर इस आदेश को लागू कर सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
अस्पताल की व्यवस्था पर असर
21 कर्मचारियों के हटने के बाद अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। पंजीयन काउंटरों पर मरीजों को एक से दो घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि फार्मेसी में नियमित स्टाफ की कमी के कारण इंटर्न छात्रों के माध्यम से दवाइयां वितरित कराई जा रही हैं।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में मानसून की वापसी, अभी भी 10% बारिश की कमी, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
कर्मचारी संगठन का समर्थन
कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि अस्पताल पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को हटाना अनुचित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की सेवाएं बहाल नहीं की गईं तो अस्पताल में धरना और भूख हड़ताल की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री से भी लगाई गुहार
कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। उनका दावा है कि उन्हें सेवा में बनाए रखने का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ें-अरेरा हिल्स थाना प्रभारी शर्मा व एक आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंधों के आरोप में कार्रवाई
सिविल सर्जन का पक्ष
जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने कहा कि कर्मचारियों की सेवाएं शासन के निर्देशों के आधार पर समाप्त की गई हैं। उनके अनुसार यह निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है और अस्पताल प्रशासन उसी का पालन कर रहा है।
विज्ञापन
बिना नोटिस हटाने का आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि 22 जुलाई को सुबह नियमित ड्यूटी करने के बाद करीब 11 बजे उन्हें अचानक सेवा समाप्ति का आदेश थमा दिया गया। न कोई कारण बताया गया और न ही पक्ष रखने का अवसर दिया गया। हटाए गए कर्मचारियों में वाहन चालक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और कम्प्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं। इनमें कई कर्मचारी 20 से 25 वर्षों से अस्पताल में सेवाएं देने का दावा कर रहे हैं।
विज्ञापन
हार्ट अटैक के बाद नौकरी जाने का दर्द
एम्बुलेंस चालक रमेश शर्मा ने बताया कि वह वर्ष 1999 से अस्पताल में कार्यरत हैं और कोरोना काल में भी लगातार ड्यूटी करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्हें हार्ट अटैक आया था और चिकित्सकों ने दो सप्ताह के भीतर एंजियोप्लास्टी कराने की सलाह दी है। ऐसे समय में नौकरी खत्म होने से उनका परिवार आर्थिक संकट में आ गया है।
विज्ञापन
वेतन कटौती के भी लगाए आरोप
कर्मचारियों ने अस्पताल प्रबंधन पर मनमाने ढंग से वेतन काटने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि महीने में 14 से 15 हजार रुपये वेतन मिलता है, लेकिन बायोमीट्रिक या रात्रि ड्यूटी के बाद मिलने वाले अवकाश को अनुपस्थिति मानकर कई दिनों का वेतन काट लिया जाता था। कर्मचारियों का दावा है कि कई बार 8 से 10 दिन तक का वेतन काटा गया।
2019 के आदेश की गलत व्याख्या का दावा
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हटाने के लिए वर्ष 2019 के शासनादेश का हवाला दिया गया है, जबकि वह आदेश 2019 के बाद नई नियुक्तियां नहीं करने से संबंधित था। उनका आरोप है कि वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों पर इस आदेश को लागू कर सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
अस्पताल की व्यवस्था पर असर
21 कर्मचारियों के हटने के बाद अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। पंजीयन काउंटरों पर मरीजों को एक से दो घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि फार्मेसी में नियमित स्टाफ की कमी के कारण इंटर्न छात्रों के माध्यम से दवाइयां वितरित कराई जा रही हैं।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में मानसून की वापसी, अभी भी 10% बारिश की कमी, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
कर्मचारी संगठन का समर्थन
कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि अस्पताल पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को हटाना अनुचित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की सेवाएं बहाल नहीं की गईं तो अस्पताल में धरना और भूख हड़ताल की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री से भी लगाई गुहार
कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। उनका दावा है कि उन्हें सेवा में बनाए रखने का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ें-अरेरा हिल्स थाना प्रभारी शर्मा व एक आरक्षक निलंबित, महिला से अनैतिक संबंधों के आरोप में कार्रवाई
सिविल सर्जन का पक्ष
जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने कहा कि कर्मचारियों की सेवाएं शासन के निर्देशों के आधार पर समाप्त की गई हैं। उनके अनुसार यह निर्णय शासन स्तर पर लिया गया है और अस्पताल प्रशासन उसी का पालन कर रहा है।
