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Bhopal News: भोपाल में 35 साल पुराने 11 अवैध मकान ध्वस्त, उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासन की कार्रवाई
Tue, 18 Aug 2026 05:42 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 18 Aug 2026 05:42 PM IST
सार
भोपाल के निशातपुरा में उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने 35 साल पुराने अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निजी जमीन पर बने 11 मकान ध्वस्त कर दिए। 0.75 एकड़ जमीन पर कब्जा कर तीन मंजिला मकान बनाए गए थे। चार पोकलेन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई हुई।
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अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
निशातपुरा क्षेत्र में मंगलवार को जिला प्रशासन ने उच्च न्यायालय के आदेश पर बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की। निजी जमीन पर करीब 35 साल से कब्जा कर बनाए गए 11 मकानों को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान चार पोकलेन मशीनें लगाई गईं और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा।यह जमीन करीब 0.75 एकड़ है और अविनाश जौहरी के स्वामित्व में है।
लंबे समय से अवैध कब्जा
प्रशासन के अनुसार, जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा था। कब्जाधारियों ने यहां तीन मंजिला तक पक्के मकान बना लिए थे। जमीन की रजिस्ट्री भी कराए जाने की बात सामने आई है। भू-स्वामी ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी।
आदेश के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने भोपाल जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस को जमीन खाली कराने के निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जिन निर्माणों पर कोई स्थगनादेश नहीं है, उन्हें हटाया जाए। इसी आदेश के तहत प्रशासनिक अमला मंगलवार को मौके पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की।
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पहले भी की थी जमीन खाली कराने की कोशिश
कार्रवाई का नेतृत्व बैरागढ़ के उपजिलाधिकारी रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने किया। प्रशासन के मुताबिक, इससे पहले भी जमीन खाली कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बिना किसी बड़े विरोध के मकान गिराए गए।
यह भी पढ़ें-भोपाल के दुकानदारों को जल्द राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद, सड़कों पर उतरे व्यापारी,किया शक्ति प्रदर्शन
सरकारी जमीन पर फिलहाल कार्रवाई नहीं
निजी जमीन से लगी करीब 0.3 एकड़ सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण की बात सामने आई है। हालांकि, इस जमीन के कुछ हिस्से पर उच्च न्यायालय का स्थगनादेश लागू है। इसलिए प्रशासन ने वहां फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को केवल उन्हीं मकानों को हटाया गया, जिन पर किसी अदालत का स्थगनादेश नहीं था। अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की गई है।
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लंबे समय से अवैध कब्जा
प्रशासन के अनुसार, जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा था। कब्जाधारियों ने यहां तीन मंजिला तक पक्के मकान बना लिए थे। जमीन की रजिस्ट्री भी कराए जाने की बात सामने आई है। भू-स्वामी ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली थी।
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आदेश के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने भोपाल जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस को जमीन खाली कराने के निर्देश दिए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जिन निर्माणों पर कोई स्थगनादेश नहीं है, उन्हें हटाया जाए। इसी आदेश के तहत प्रशासनिक अमला मंगलवार को मौके पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की।
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पहले भी की थी जमीन खाली कराने की कोशिश
कार्रवाई का नेतृत्व बैरागढ़ के उपजिलाधिकारी रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने किया। प्रशासन के मुताबिक, इससे पहले भी जमीन खाली कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बिना किसी बड़े विरोध के मकान गिराए गए।
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सरकारी जमीन पर फिलहाल कार्रवाई नहीं
निजी जमीन से लगी करीब 0.3 एकड़ सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण की बात सामने आई है। हालांकि, इस जमीन के कुछ हिस्से पर उच्च न्यायालय का स्थगनादेश लागू है। इसलिए प्रशासन ने वहां फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को केवल उन्हीं मकानों को हटाया गया, जिन पर किसी अदालत का स्थगनादेश नहीं था। अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की गई है।
