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भोपाल के दुकानदारों को जल्द राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद, सड़कों पर उतरे व्यापारी,किया शक्ति प्रदर्शन

Tue, 18 Aug 2026 03:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 18 Aug 2026 03:37 PM IST
सार

भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़कों पर उतरे। न्यू मार्केट से रोशनपुरा तक रैली निकालकर मास्टर प्लान और मिश्रित भू-उपयोग लागू करने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि मास्टर प्लान में 3-4 महीने लग सकते हैं, जबकि कार्रवाई 5 हफ्ते में होनी है। ऐसे में अब 15 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से राहत की उम्मीद है।

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No immediate relief for Bhopal shopkeepers: Hopes pinned on the Supreme Court; traders took to the streets and
व्यारियों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर हो रही सीलिंग कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में व्यापारी सड़कों पर उतर आए। न्यू मार्केट से रोशनपुरा चौराहे तक रैली निकालकर व्यापारियों ने शक्ति प्रदर्शन किया। सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और जन-गण-मन गाकर विरोध जताया। व्यापारियों की सबसे बड़ी मांग भोपाल में जल्द मास्टर प्लान लागू करने और मिश्रित भू-उपयोग की व्यवस्था करने की है। उनका कहना है कि शहर में 62 हजार से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जहां रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यदि इन पर सीलिंग की कार्रवाई होती है तो हजारों दुकानदारों के साथ उनसे जुड़े कर्मचारियों और परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।
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मास्टर प्लान में लगेंगे समय, लेकिन कार्रवाई 5 हफ्ते में
व्यापारी लगातार सरकार से मास्टर प्लान लागू करने और मिश्रित भू-उपयोग की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम 3 से 4 महीने से ज्यादा समय लग सकते हैं। दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार नगर निगम को करीब 5 सप्ताह के भीतर कार्रवाई करनी है। ऐसे में व्यापारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल समय का है। उनका कहना है कि सरकार यदि अभी प्रक्रिया शुरू भी करती है तो तब तक बड़ी संख्या में दुकानदारों पर कार्रवाई हो सकती है। यही वजह है कि अब व्यापारी वर्ग को सर्वोच्च न्यायालय से राहत की उम्मीद है।
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15 सितंबर की सुनवाई पर नजर
व्यापारी वर्ग 15 सितंबर को होने वाली सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को भी उनके पक्ष में खड़ा होकर ऐसा व्यावहारिक समाधान सामने रखना चाहिए, जिससे न्यायालय के निर्देशों का पालन भी हो और वर्षों से चल रहे कारोबार भी बच सकें।
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बोले- टैक्स लेते हो तो कारोबार का रास्ता भी बताओ
व्यापारियों ने कहा कि वे वर्षों से संपत्ति कर समेत दूसरे करों का भुगतान कर रहे हैं। कई प्रतिष्ठानों के पास व्यावसायिक बिजली कनेक्शन भी हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई से पहले सरकार को कारोबार को नियमों के दायरे में लाने का रास्ता देना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि एक दुकान या प्रतिष्ठान बंद होने का असर सिर्फ मालिक तक सीमित नहीं रहेगा। उससे जुड़े कर्मचारियों और उन पर निर्भर परिवारों की आजीविका भी प्रभावित होगी।

न्यू मार्केट से रोशनपुरा तक रैली
मंगलवार को व्यापारियों की रैली न्यू मार्केट से शुरू होकर रोशनपुरा चौराहे तक पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर निगम की कार्रवाई के खिलाफ नारे लगाए। कुछ व्यापारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़े, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शन में महिला व्यापारी भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं। ब्यूटी कारोबार से जुड़ी महिलाओं ने भी विरोध जताया। एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप कर अपना विरोध दर्ज कराया।

निगम ने जारी किए 6,589 नोटिस
आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर नगर निगम अब तक 6,589 नोटिस जारी कर चुका है। निगम के अनुसार करीब 750 मामलों में अधिभोग उल्लंघन की अवधि अगले तीन दिन में पूरी हो रही है। इन मामलों में अंतिम सूचना पत्र दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रहने पर सुनवाई और अंतिम आदेश की प्रक्रिया के बाद प्रतिष्ठान सील किए जा सकते हैं। नगर निगम के संपत्ति कर रिकॉर्ड में 62,500 से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित हैं, जो रहवासी क्षेत्रों में हैं और उनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। निगम का अनुमान है कि आगे नोटिस की संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है।


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अब सरकार की रणनीति पर नजर
व्यापारियों का कहना है कि वे मास्टर प्लान और मिश्रित भू-उपयोग की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। लेकिन इसमें समय लगने की स्थिति में तत्काल राहत जरूरी है। अब व्यापारियों की नजर सरकार के अगले कदम और 15 सितंबर की सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई पर है। देखना होगा कि सरकार 62 हजार से ज्यादा दुकानदारों के कारोबार और रोजगार को बचाने के लिए क्या रास्ता निकालती है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बीच रहवासियों और व्यापारियों, दोनों की मांगों के बीच संतुलन कैसे बनाती है।


 
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