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जात-पात पूछे न कोई... सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताई गुरु रविदास महाराज की महिमा, कहा- उनके बताए मार्ग पर चलें
Tue, 18 Aug 2026 04:20 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 18 Aug 2026 04:20 PM IST
सार
संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामाजिक समरसता और जातिवाद से मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास के बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में समानता और एकता स्थापित की जा सकती है।
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रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम समेत अन्य नेतागण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज के 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय 'समरसता संकल्प अभियान' और 'कलश वंदन यात्रा' कार्यक्रम में शामिल हुए। भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान उन्होंने संभागीय प्रतिनिधियों को कलश भी वितरित किए। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष लालसिंह आर्य सहित कई जनप्रतिनिधि और संत उपस्थित रहे।
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जातिवाद और छुआछूत से समाज को मुक्त करने का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार समाज को जातिवाद और छुआछूत से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। समरसता संकल्प अभियान का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता स्थापित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन में पवित्र भाव जागृत करने की आवश्यकता है। समय के साथ देश में सकारात्मक बदलाव आए हैं। अयोध्या में बने एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि और पंजाब में एयरपोर्ट का नाम संत रविदास महाराज के नाम पर रखा गया है।
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संत रविदास के स्थलों को बनाया जाएगा तीर्थ
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि सागर में 100 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास महाराज का भव्य मंदिर और स्मारक तैयार किया जा रहा है। इसके लोकार्पण के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उज्जैन में संत रविदास से जुड़े स्थलों को संरक्षित किया जाएगा। साथ ही उनकी स्मृतियों से जुड़े स्थानों को विकसित कर उन्हें सभी सुविधाओं से युक्त तीर्थ स्थल बनाया जाएगा।
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संतों ने समाज को टूटने से बचाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पवित्र धरती पर जन्मे संत रविदास महाराज ने समाज को एकता का संदेश दिया। उस समय विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय परंपराओं को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन संतों ने समाज को बिखरने से बचाया। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समाज को यह संदेश दिया था कि 'जात-पात पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।' उन्होंने अपने जीवन में कर्म और भक्ति को समान महत्व दिया। उनके भजन आज भी लोगों के जीवन में प्रेरणा का स्रोत हैं।
समरसता की मिसाल पेश करने की जरूरत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संत रविदास ने समाज को कटुता छोड़कर समरसता अपनाने का संदेश दिया था। इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सागर में बन रहा संत रविदास का मंदिर सामाजिक समरसता का प्रतीक बनेगा। समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर विकसित भारत के निर्माण का संकल्प पूरा किया जाएगा। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष लालसिंह आर्य ने कहा कि संत रविदास ने सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और धर्मांतरण के विरोध का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं को आज के समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
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20 अगस्त से प्रदेश के सभी जिलों में निकलेगी कलश वंदन यात्रा
लालसिंह आर्य ने बताया कि काशी से शुरू हुई कलश यात्रा के तहत देशभर के 51 स्थानों पर कलश पूजन किया गया है। काशी से निकले 129 कलशों में संत रविदास की जन्मस्थली की मिट्टी रखी गई है। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त से मध्यप्रदेश के सभी जिलों में कलश वंदन यात्रा शुरू होगी। इसके बाद गांवों और कस्बों में शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। अभियान के अंतिम चरण में छात्रावासों में संपर्क अभियान चलाकर विद्यार्थियों को संत रविदास के जीवन और विचारों से परिचित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशभर में 29 जुलाई से 30 अगस्त तक संत संपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है और अब तक 29 हजार से अधिक संतों का सम्मान किया जा चुका है।
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जातिवाद और छुआछूत से समाज को मुक्त करने का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार समाज को जातिवाद और छुआछूत से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। समरसता संकल्प अभियान का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता स्थापित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने मन में पवित्र भाव जागृत करने की आवश्यकता है। समय के साथ देश में सकारात्मक बदलाव आए हैं। अयोध्या में बने एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि और पंजाब में एयरपोर्ट का नाम संत रविदास महाराज के नाम पर रखा गया है।
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संत रविदास के स्थलों को बनाया जाएगा तीर्थ
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि सागर में 100 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास महाराज का भव्य मंदिर और स्मारक तैयार किया जा रहा है। इसके लोकार्पण के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उज्जैन में संत रविदास से जुड़े स्थलों को संरक्षित किया जाएगा। साथ ही उनकी स्मृतियों से जुड़े स्थानों को विकसित कर उन्हें सभी सुविधाओं से युक्त तीर्थ स्थल बनाया जाएगा।
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संतों ने समाज को टूटने से बचाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पवित्र धरती पर जन्मे संत रविदास महाराज ने समाज को एकता का संदेश दिया। उस समय विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय परंपराओं को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन संतों ने समाज को बिखरने से बचाया। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समाज को यह संदेश दिया था कि 'जात-पात पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होई।' उन्होंने अपने जीवन में कर्म और भक्ति को समान महत्व दिया। उनके भजन आज भी लोगों के जीवन में प्रेरणा का स्रोत हैं।
समरसता की मिसाल पेश करने की जरूरत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संत रविदास ने समाज को कटुता छोड़कर समरसता अपनाने का संदेश दिया था। इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सागर में बन रहा संत रविदास का मंदिर सामाजिक समरसता का प्रतीक बनेगा। समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर विकसित भारत के निर्माण का संकल्प पूरा किया जाएगा। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष लालसिंह आर्य ने कहा कि संत रविदास ने सामाजिक समरसता, मानव कल्याण और धर्मांतरण के विरोध का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं को आज के समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
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20 अगस्त से प्रदेश के सभी जिलों में निकलेगी कलश वंदन यात्रा
लालसिंह आर्य ने बताया कि काशी से शुरू हुई कलश यात्रा के तहत देशभर के 51 स्थानों पर कलश पूजन किया गया है। काशी से निकले 129 कलशों में संत रविदास की जन्मस्थली की मिट्टी रखी गई है। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त से मध्यप्रदेश के सभी जिलों में कलश वंदन यात्रा शुरू होगी। इसके बाद गांवों और कस्बों में शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। अभियान के अंतिम चरण में छात्रावासों में संपर्क अभियान चलाकर विद्यार्थियों को संत रविदास के जीवन और विचारों से परिचित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशभर में 29 जुलाई से 30 अगस्त तक संत संपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है और अब तक 29 हजार से अधिक संतों का सम्मान किया जा चुका है।
