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Bhopal News: भोपाल गैस कांड के 40 साल बाद भी असर बरकरार, गैस संगठन बोले- तीन किमी दायरे में कैंसर का कहर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 04 Feb 2026 07:26 PM IST
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सार
संभावना ट्रस्ट क्लिनिक के सर्वे में खुलासा हुआ है कि भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के तीन किलोमीटर दायरे में रहने वाली गैस प्रभावित आबादी में कैंसर की दर सामान्य क्षेत्रों की तुलना में करीब 13 गुना अधिक है।
संभावना ट्रस्ट क्लिनिक की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों पर गैस त्रासदी का असर दशकों बाद भी साफ नजर आ रहा है। फैक्ट्री से तीन किलोमीटर के दायरे में बसे इलाकों जेपी नगर, कैंची छोला और काजी कैंप में कैंसर के मरीजों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक पाई गई है। संभावना ट्रस्ट क्लिनिक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन क्षेत्रों में रहने वाले 21 हजार से अधिक गैस प्रभावित लोगों में 334 कैंसर मरीज चिन्हित किए गए हैं, जिनमें नई पीढ़ी और बच्चे भी शामिल हैं।
पुरुषों में कैंसर की दर महिलाओं से अधिक
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्ट में बताया गया कि 1984 की गैस त्रासदी से प्रभावित आबादी में कैंसर की दर, प्रभावित न होने वाले इलाकों की तुलना में करीब 13 गुना ज्यादा है। खास बात यह है कि पुरुषों में कैंसर की दर महिलाओं से अधिक दर्ज की गई है। गैस प्रभावित क्षेत्रों में खून, फेफड़े और गले के कैंसर सबसे ज्यादा सामने आए हैं।
यह भी पढ़ें-भोपाल एम्स में अब रोबोट करेंगे कैंसर की सर्जरी, एक-दो महीने में शुरू होगी सुविधा
आबादी में प्रति एक लाख लोगों पर कैंसर की दर 1,569 से अधिक
संभावना ट्रस्ट क्लिनिक के सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वे के तहत 21,276 गैस प्रभावित और 25,528 गैर-प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। यह सर्वे समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर आधारित था। क्लिनिक के अनुसार, गैस प्रभावित आबादी में प्रति एक लाख लोगों पर कैंसर की दर 1,569 से अधिक है, जबकि गैर-प्रभावित क्षेत्रों में यह आंकड़ा महज 117 के आसपास है।
यह भी पढ़ें-सरकार पर कांग्रेस का तीखा हमला,पटवारी बोले-कर्ज में शिवराज सरकार को भी छोड़ा पीछे, मंत्री दें इस्तीफा
कार्बाइड हादसे का स्वास्थ्य पर प्रभाव अब भी खत्म नहीं
सर्वे में यह भी सामने आया कि गैस प्रभावित लोगों में खून का कैंसर 21 गुना, फेफड़ों का कैंसर करीब 29 गुना और गले का कैंसर लगभग 34 गुना तक ज्यादा पाया गया। यह अध्ययन साफ तौर पर दर्शाता है कि यूनियन कार्बाइड हादसे का स्वास्थ्य पर प्रभाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। गौरतलब है कि 1996 से कार्यरत संभावना ट्रस्ट क्लिनिक गैस त्रासदी पीड़ितों को मुफ्त इलाज उपलब्ध करा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े न सिर्फ गंभीर चेतावनी हैं, बल्कि प्रभावित इलाकों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य निगरानी और विशेष चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत को भी उजागर करते हैं।
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पुरुषों में कैंसर की दर महिलाओं से अधिक
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर जारी रिपोर्ट में बताया गया कि 1984 की गैस त्रासदी से प्रभावित आबादी में कैंसर की दर, प्रभावित न होने वाले इलाकों की तुलना में करीब 13 गुना ज्यादा है। खास बात यह है कि पुरुषों में कैंसर की दर महिलाओं से अधिक दर्ज की गई है। गैस प्रभावित क्षेत्रों में खून, फेफड़े और गले के कैंसर सबसे ज्यादा सामने आए हैं।
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आबादी में प्रति एक लाख लोगों पर कैंसर की दर 1,569 से अधिक
संभावना ट्रस्ट क्लिनिक के सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वे के तहत 21,276 गैस प्रभावित और 25,528 गैर-प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। यह सर्वे समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर आधारित था। क्लिनिक के अनुसार, गैस प्रभावित आबादी में प्रति एक लाख लोगों पर कैंसर की दर 1,569 से अधिक है, जबकि गैर-प्रभावित क्षेत्रों में यह आंकड़ा महज 117 के आसपास है।
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कार्बाइड हादसे का स्वास्थ्य पर प्रभाव अब भी खत्म नहीं
सर्वे में यह भी सामने आया कि गैस प्रभावित लोगों में खून का कैंसर 21 गुना, फेफड़ों का कैंसर करीब 29 गुना और गले का कैंसर लगभग 34 गुना तक ज्यादा पाया गया। यह अध्ययन साफ तौर पर दर्शाता है कि यूनियन कार्बाइड हादसे का स्वास्थ्य पर प्रभाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। गौरतलब है कि 1996 से कार्यरत संभावना ट्रस्ट क्लिनिक गैस त्रासदी पीड़ितों को मुफ्त इलाज उपलब्ध करा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े न सिर्फ गंभीर चेतावनी हैं, बल्कि प्रभावित इलाकों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य निगरानी और विशेष चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत को भी उजागर करते हैं।

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