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Bhopal News: कांग्रेस का सरकार पर बड़ा आरोप, नायक बोले- जल संसाधन विभाग में परसेंटेज राज, डेढ़ साल से टेंडर ठप

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 02 Mar 2026 06:51 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग में बड़े टेंडरों को लेकर कथित परसेंटेज मॉडल और फिक्स साठगांठ का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने दावा किया कि 2023-24 के टेंडरों में गिनी-चुनी कंपनियां बार-बार L1, L2, L3 बनकर सामने आईं और डेढ़ साल से नए टेंडर लगभग ठप हैं।

Bhopal News: Allegations of percentage raj in the Water Resources Department, tenders stalled for one and a ha
पीसीसी में प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग में कथित परसेंटेज मॉडल और फिक्स टेंडर सिस्टम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता राहुल राज ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि बड़े टेंडरों में कमीशन आधारित साठगांठ का तंत्र सक्रिय है और पिछले करीब डेढ़ वर्ष से नए बड़े टेंडर नहीं लगना इसी का परिणाम हो सकता है।
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300 करोड़ से ऊपर के टेंडरों पर सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि 300 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स में पहले से प्रतिशत तय किए जाते हैं। कथित रूप से बिचौलियों के जरिए विभागीय और उच्च स्तर तक कमीशन का नेटवर्क काम करता है। यदि तय “हिसाब” पूरा न पहुंचे तो टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होती है।
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प्रेस वार्ता में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से जुड़े कुछ नामों और संबंधों पर भी सवाल उठाए गए, हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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फर्जी बिलिंग और गुणवत्ता पर प्रश्न
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रोजेक्ट्स में साइट पर सामग्री पहुंचे बिना भुगतान निकाले जाने और DI पाइप की जगह HDPE पाइप बिछाने जैसी शिकायतें मिली हैं। साथ ही L1 घोषित होने के बाद 2% तक की अनिवार्य कटौती का भी दावा किया गया। कृषि वर्ष बनाम जमीनी हकीकत सरकार द्वारा सिंचाई रकबा बढ़ाने और कृषि वर्ष घोषित करने के दावों के बीच कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि टेंडर प्रक्रिया ठप है तो परियोजनाएं कैसे पूरी होंगी और किसानों तक पानी कैसे पहुंचेगा।

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जांच की मांग
कांग्रेस ने 2023-24 के सभी टेंडरों की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच, सार्वजनिक दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच तथा कथित संदिग्ध परिसरों की पड़ताल की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल टेंडर का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, युवाओं के रोजगार और किसानों के भविष्य से जुड़ा है।
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