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Bhopal News: 3 करोड़ के बैंक ऋण में सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला, ईओडब्ल्यू ने दर्ज की FIR

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Thu, 26 Feb 2026 08:59 AM IST
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सार

भोपाल में ईओडब्ल्यू ने 3 करोड़ रुपये के बैंक ऋण में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों ने शिकायतकर्ता की संपत्तियाँ गिरवी रखकर ऋण लिया और राशि का निजी उपयोग किया।

Bhopal News: Case of planned fraud in bank loan of Rs 3 crore, EOW registers FIR
ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोपाल में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने लगभग 3 करोड़ रुपये के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता श्री दीपक भावसार, निवासी भोपाल, ने 12 जून 2019 को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि राहुल दुबे, संगीता दुबे, प्रताप नारायण दुबे, अतुल दुबे, भुवनेश्वर पाण्डे और स्वाति शुक्ला सहित अन्य ने पूर्व नियोजित योजना के तहत उनकी तीन संपत्तियों को पंजाब नेशनल बैंक, सियागंज, इंदौर में को-लेटरल सिक्योरिटी के रूप में गिरवी रखकर 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट प्राप्त की और राशि का निजी एवं पारिवारिक कंपनियों में दुरुपयोग किया।
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जांच में सामने आया कि वर्ष 2017 में आरोपियों ने शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर “स्पेक्ट्रो फर्टकेम इंडिया प्रा. लि.” नामक कंपनी स्थापित की। शिकायतकर्ता को निदेशक बनाया गया, जबकि कंपनी का वास्तविक संचालन प्रताप नारायण दुबे और भुवनेश्वर पाण्डे द्वारा किया गया। बैंक से स्वीकृत 3 करोड़ रुपये में से लगभग 2.81 करोड़ रुपये को जून 2017 से अक्टूबर 2017 के बीच विभिन्न कंपनियों के खातों में स्थानांतरित किया गया। इनमें अधिकांश कंपनियाँ आरोपीगण या उनके परिवारजनों के स्वामित्व में थीं, जैसे डीडी सुपर बायो ऑर्गेनिक प्रा. लि., डीडी केमिकल्स, स्वाति एंगिकॉम, मृतंजय केमटेक, अमेया एजेंसी, रिधिमा ऑर्गेनिक और महाकाल केमिकल्स। जांच में यह भी पता चला कि इन कंपनियों में कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं हुई, कुछ कंपनियाँ निष्क्रिय या अस्तित्वहीन पाई गईं।

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जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि भुवनेश्वर पाण्डे को दो कारें खरीदने हेतु 18.50 लाख रुपये का लोन लेने की अनुमति 18 अगस्त 2017 के एक बोर्ड प्रस्ताव में दी गई, जिसमें शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए। कंपनी का उद्देश्य कृषि उत्पादों की ट्रेडिंग बताया गया था, लेकिन वास्तविक व्यापारिक गतिविधि का कोई प्रमाण नहीं मिला। इस प्रकार, आरोपीगण ने शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर संपत्तियों को गिरवी रखवाया, ऋण प्राप्त किया, राशि का दुरुपयोग किया और जाली दस्तावेजों का उपयोग किया। इसके आधार पर ईओडब्ल्यू ने राहुल दुबे, संगीता दुबे, प्रताप नारायण दुबे, अतुल दुबे, भुवनेश्वर पाण्डे, स्वाति शुक्ला सहित अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक साजिश), 467, 468 और 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। प्रकरण की विवेचना जारी है और आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।
 
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