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Bhopal News: कांग्रेस विधायक बरैया का विवादित बयान, SC-ST प्रतिनिधियों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Wed, 14 Jan 2026 06:32 PM IST
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सार

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम के कारण SC-ST प्रतिनिधियों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी हो गई है और वे अपनी बात खुलकर नहीं कह पाते। उन्होंने सामाजिक-आर्थिक गैर-बराबरी, धर्म और जाति की राजनीति पर सवाल उठाते हुए सेपरेट इलेक्टोरल को समाधान बताया।

Bhopal News: Congress MLA Baraiya makes controversial statement, says SC-ST representatives are like dogs with
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया - फोटो : अमर उजाला
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भोपाल में कांग्रेस की डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की राजनीतिक स्थिति को लेकर बेहद तीखे और विवादित शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम के कारण SC-ST वर्ग के विधायक-सांसद आज खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं हैं।बरैया ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल में प्रवेश करने के बाद हमारे प्रतिनिधियों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी हो जाती है, जो न काट सकता है और न भौंक सकता है। उनके मुताबिक यही वजह है कि आज SC-ST जनप्रतिनिधि अपने समाज की पीड़ा को प्रभावी ढंग से सामने नहीं रख पाते।
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सामाजिक और आर्थिक बराबरी अब भी दूर
विधायक बरैया ने कहा कि देश में राजनीतिक बराबरी तो दिखाई देती है, लेकिन सामाजिक और आर्थिक बराबरी अब भी दूर है। उन्होंने कहा कि जब तक देश के ऊपर जाति और धर्म हावी रहेंगे, तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है। बाबा साहब पहले ही आगाह कर चुके थे कि यदि धर्म और जाति राष्ट्र से ऊपर चले गए, तो संविधान भी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा।
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सेपरेट इलेक्टोरल ही वह रास्ता
बरैया ने यह भी कहा कि सेपरेट इलेक्टोरल ही वह रास्ता है, जिससे दलित-आदिवासी समाज को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज मिल सकती है। उनका कहना था कि बाबा साहब ने बाद के वर्षों में जॉइंट इलेक्टोरल को लेकर प्रायश्चित किया था और पढ़े-लिखे समाज से उम्मीद लगाने की बात कही थी।

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आदिवासी समाज की स्थिति पर भी चिंता
अपने संबोधन में विधायक बरैया ने आदिवासी समाज की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की सामाजिक-आर्थिक दुर्दशा का बड़ा कारण उनकी धार्मिक पहचान है और यदि आदिवासी समुदाय अपने पारंपरिक सरना धर्म की ओर लौटे, तो मुक्ति का रास्ता निकल सकता है। बरैया ने कहा कि झारखंड में सरना धर्म को लेकर की गई पहल इसी दिशा में एक उदाहरण है। बरैया का कहना था कि जब तक धर्म सत्ता और समाज के केंद्र में रहेगा, तब तक SC-ST और आदिवासी समाज को बराबरी नहीं मिल पाएगी। जैसे ही धर्म को नीचे और मानव गरिमा को ऊपर रखा जाएगा, तभी सामाजिक और आर्थिक न्याय संभव हो सकेगा।
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