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भोपाल स्लॉटर हाउस: MIC चर्चा से 20 साल की लीज तक कैसे पहुंचा मामला?दस्तावेज ने खोली प्रशासनिक प्रक्रिया की पोल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Wed, 14 Jan 2026 06:00 PM IST
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सार

भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस मामले में एमआईसी बैठक की चर्चा और बाद में जारी नोटशीट के बीच बड़ा विरोधाभास सामने आया है। बैठक में केवल समय वृद्धि पर बात हुई थी, लेकिन नोटशीट में इसे 20 साल की लीज का संकल्प बताया गया।

Bhopal Slaughterhouse: How did the matter progress from MIC discussion to a 20-year lease? Documents expose fl
बीएमसी भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल नगर निगम के जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस को लेकर विवाद अब धार्मिक या राजनीतिक दायरे से निकलकर प्रशासनिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक और उसके बाद जारी हुई नोटशीट के बीच सामने आए दो अलग-अलग आधिकारिक दस्तावेजों ने निगम के भीतर गंभीर विरोधाभास उजागर कर दिए हैं।
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इसलिए खड़े हो रहे सवाल
24 अक्टूबर-25 को हुई एमआईसी बैठक में स्लॉटर हाउस से जुड़ा विषय केवल समय वृद्धि के तौर पर चर्चा में आया था। यह एजेंडा का अंतिम बिंदु था और सदस्यों को इसी सीमित दायरे में जानकारी दी गई थी। लेकिन इसके बाद जब स्वच्छ भारत मिशन (यांत्रिकी) के अधिकारियों के हस्ताक्षर से नोटशीट जारी हुई, तो उसी विषय को महापौर परिषद का संकल्प बताते हुए स्लॉटर हाउस को 20 साल की लीज पर देने की मंजूरी का उल्लेख कर दिया गया।यही वह बिंदु है, जहां से सवाल खड़े हो रहे हैं क्या एमआईसी में वास्तव में 20 साल की लीज का कोई स्पष्ट निर्णय हुआ था?या फिर चर्चा को संकल्प का रूप देकर आगे बढ़ा दिया गया?
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एमआईसी के भीतर भी असंतोष
जानकारी के मुताबिक, इस नोटशीट के सामने आने के बाद एमआईसी के कई सदस्यों ने निजी तौर पर नाराजगी जताई है। कुछ सदस्यों का कहना है कि यदि लीज जैसी दीर्घकालिक व्यवस्था का फैसला होना था, तो इसे स्पष्ट रूप से परिषद के सामने रखा जाना चाहिए था।

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पहले लौट चुके प्रस्ताव, अब कैसे बदला रुख
दिलचस्प तथ्य यह है कि पूर्व महापौर कृष्णा गौर और आलोक शर्मा के कार्यकाल में स्लॉटर हाउस से जुड़े प्रस्ताव लौटा दिए गए थे। उस समय इन्हें स्वीकृति नहीं मिली, लेकिन वर्तमान परिषद के कार्यकाल में न केवल संचालन शुरू हुआ, बल्कि इसके दस्तावेजी फैसलों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू यह है कि स्लॉटर हाउस से जुड़ा प्रस्ताव नगर निगम परिषद में कभी नहीं लाया गया। इसी कारण विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के कुछ पार्षद भी असहज स्थिति में नजर आए और परिषद की बैठक में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

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जिम्मेदारी तय करने की कवायद तेज
हालांकि इधर महापौर मालती राय का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया प्रशासक के कार्यकाल में हुई थी और वर्तमान परिषद पर इसका सीधा दायित्व नहीं है। जबकि नेता पतिपक्ष शाबिस्ता जकी का कहना है कि स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव एमआईसी द्वारा गोपनीय तरीके से पास कर दिया गया और इसे परिषद की बैठक में भी नहीं लाया गया।
 
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