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Bhopal News: ई-अटेंडेंस पर सख्ती, आयुक्त ने खुद लगाई हाजिरी, शिक्षक संगठन ने 5 घंटे लॉग-आउट की मांग उठाई
Mon, 17 Aug 2026 07:04 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 17 Aug 2026 07:04 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर विभाग ने सख्ती बढ़ाई है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने खुद हाजिरी लगाकर 3 लाख से ज्यादा शिक्षकों से व्यवस्था अपनाने की अपील की। वहीं शिक्षक संगठन ने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं का हवाला देते हुए लॉग-आउट की अवधि 6 से घटाकर 5 घंटे करने की मांग की है।
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ई-अटेंडेंस लगाते आयुक्त अभिषेक सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर विभाग और शिक्षक संगठन आमने-सामने नजर आ रहे हैं। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने सोमवार सुबह 9:33 बजे खुद ई-अटेंडेंस लगाकर प्रदेश के 3 लाख से ज्यादा शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों से व्यवस्था का पालन करने की अपील की। वहीं, शासकीय शिक्षक संगठन ने ग्रामीण क्षेत्रों की व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए लॉग-आउट की समय-सीमा 6 घंटे से घटाकर पहले की तरह 5 घंटे करने की मांग की है।
आयुक्त बोले- विभाग में रहने तक रोज लगाऊंगा ई-अटेंडेंस
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अपनी पहली ई-अटेंडेंस लगाने के बाद कहा कि वे विभाग में रहने तक नियमित रूप से इसी व्यवस्था का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था बेहतर होगी और इसका असर आने वाली परीक्षाओं के परिणामों में भी दिखाई देगा। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों से ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अपनाने की अपील की।
‘
हमारे शिक्षक’ ऐप में अब कैप्चा जरूरी
ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने के लिए हमारे शिक्षक ऐप में कैप्चा प्रक्रिया जोड़ी गई है। अब हाजिरी दर्ज करते समय साधारण जोड़-घटाव वाला कैप्चा भरना होगा। इसका उद्देश्य एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों के लॉगिन या लॉगआउट करने से सर्वर पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। पिछले दिनों करीब 1.74 लाख शिक्षकों के एक साथ ऐप से लॉगआउट करने के कारण तकनीकी समस्या सामने आई थी। इसके बाद सर्वर की क्षमता बढ़ाई गई है।
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15 मिनट का अतिरिक्त समय मिलेगा
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुबह 10:30 बजे और दूसरी पाली में शाम 4:15 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करने पर 15 मिनट का ग्रेस पीरियड मिलेगा। किसी जायज कारण से देर होने पर शिक्षक प्राचार्य को वॉट्सऐप के जरिए सूचना दे सकेंगे, लेकिन इसे नियमित आदत नहीं बनाया जा सकेगा। बारिश के दौरान उफनती नदियों और नालों के कारण स्कूल पहुंचना जोखिम भरा होने की स्थिति में भी शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी परिस्थितियों में उचित माध्यम से दी गई जानकारी को स्वीकार किया जाएगा।
शिक्षक संगठन ने उठाया 5 घंटे का मुद्दा
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए ई-अटेंडेंस में लॉग-आउट की समय-सीमा 6 घंटे से घटाकर पूर्ववत 5 घंटे करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल कई बार मुख्य मार्गों से काफी दूर होते हैं। सार्वजनिक परिवहन सीमित होने के साथ बारिश के मौसम में सड़क, नदी-नालों और अन्य रास्तों की स्थिति खराब हो जाती है। ऐसे में 6 घंटे की तकनीकी समय-सीमा शिक्षकों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती है।
शहर और गांव की परिस्थितियां अलग
उपेन्द्र कौशल ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। दूरदराज के स्कूलों में नेटवर्क, इंटरनेट, परिवहन और मौसम से जुड़ी समस्याएं आम हैं। इन कारणों से शिक्षक समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज करने या लॉग-आउट करने में तकनीकी परेशानी का सामना कर सकते हैं। उनका कहना है कि पहले 5 घंटे की लॉग-आउट व्यवस्था थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियों के हिसाब से अधिक व्यावहारिक थी। इसलिए इसे दोबारा लागू किया जाना चाहिए।
तकनीकी दिक्कत में वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
शिक्षक संगठन ने कहा कि ई-अटेंडेंस का उद्देश्य पारदर्शिता और वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि तकनीकी दिक्कतों के कारण शिक्षकों पर कार्रवाई का दबाव बनाना। नेटवर्क, मोबाइल, सर्वर या इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या होने पर शिक्षकों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि ऐसी स्थिति में उपस्थिति पंजी और अन्य उपलब्ध प्रमाणों को भी मान्य किया जाए।
सरकार से तत्काल फैसला लेने की मांग
उपेन्द्र कौशल ने शासन और शिक्षा विभाग से ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए लॉग-आउट की समय-सीमा 6 घंटे से घटाकर 5 घंटे करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने की मांग की है। यानी एक तरफ विभाग ई-अटेंडेंस को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है, वहीं शिक्षक संगठन व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक बदलाव की मांग कर रहा है। अब देखना होगा कि सरकार 5 घंटे की पुरानी व्यवस्था को लेकर क्या फैसला करती है।
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आयुक्त बोले- विभाग में रहने तक रोज लगाऊंगा ई-अटेंडेंस
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अपनी पहली ई-अटेंडेंस लगाने के बाद कहा कि वे विभाग में रहने तक नियमित रूप से इसी व्यवस्था का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था बेहतर होगी और इसका असर आने वाली परीक्षाओं के परिणामों में भी दिखाई देगा। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों से ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अपनाने की अपील की।
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हमारे शिक्षक’ ऐप में अब कैप्चा जरूरी
ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने के लिए हमारे शिक्षक ऐप में कैप्चा प्रक्रिया जोड़ी गई है। अब हाजिरी दर्ज करते समय साधारण जोड़-घटाव वाला कैप्चा भरना होगा। इसका उद्देश्य एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों के लॉगिन या लॉगआउट करने से सर्वर पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। पिछले दिनों करीब 1.74 लाख शिक्षकों के एक साथ ऐप से लॉगआउट करने के कारण तकनीकी समस्या सामने आई थी। इसके बाद सर्वर की क्षमता बढ़ाई गई है।
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15 मिनट का अतिरिक्त समय मिलेगा
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुबह 10:30 बजे और दूसरी पाली में शाम 4:15 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करने पर 15 मिनट का ग्रेस पीरियड मिलेगा। किसी जायज कारण से देर होने पर शिक्षक प्राचार्य को वॉट्सऐप के जरिए सूचना दे सकेंगे, लेकिन इसे नियमित आदत नहीं बनाया जा सकेगा। बारिश के दौरान उफनती नदियों और नालों के कारण स्कूल पहुंचना जोखिम भरा होने की स्थिति में भी शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी परिस्थितियों में उचित माध्यम से दी गई जानकारी को स्वीकार किया जाएगा।
शिक्षक संगठन ने उठाया 5 घंटे का मुद्दा
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए ई-अटेंडेंस में लॉग-आउट की समय-सीमा 6 घंटे से घटाकर पूर्ववत 5 घंटे करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल कई बार मुख्य मार्गों से काफी दूर होते हैं। सार्वजनिक परिवहन सीमित होने के साथ बारिश के मौसम में सड़क, नदी-नालों और अन्य रास्तों की स्थिति खराब हो जाती है। ऐसे में 6 घंटे की तकनीकी समय-सीमा शिक्षकों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती है।
शहर और गांव की परिस्थितियां अलग
उपेन्द्र कौशल ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता। दूरदराज के स्कूलों में नेटवर्क, इंटरनेट, परिवहन और मौसम से जुड़ी समस्याएं आम हैं। इन कारणों से शिक्षक समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज करने या लॉग-आउट करने में तकनीकी परेशानी का सामना कर सकते हैं। उनका कहना है कि पहले 5 घंटे की लॉग-आउट व्यवस्था थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियों के हिसाब से अधिक व्यावहारिक थी। इसलिए इसे दोबारा लागू किया जाना चाहिए।
तकनीकी दिक्कत में वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
शिक्षक संगठन ने कहा कि ई-अटेंडेंस का उद्देश्य पारदर्शिता और वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि तकनीकी दिक्कतों के कारण शिक्षकों पर कार्रवाई का दबाव बनाना। नेटवर्क, मोबाइल, सर्वर या इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या होने पर शिक्षकों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि ऐसी स्थिति में उपस्थिति पंजी और अन्य उपलब्ध प्रमाणों को भी मान्य किया जाए।
सरकार से तत्काल फैसला लेने की मांग
उपेन्द्र कौशल ने शासन और शिक्षा विभाग से ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए लॉग-आउट की समय-सीमा 6 घंटे से घटाकर 5 घंटे करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने की मांग की है। यानी एक तरफ विभाग ई-अटेंडेंस को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है, वहीं शिक्षक संगठन व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक बदलाव की मांग कर रहा है। अब देखना होगा कि सरकार 5 घंटे की पुरानी व्यवस्था को लेकर क्या फैसला करती है।
