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Bhopal News: मातृ मौतों का सच सामने लाएगा सिस्टम,डेढ़ घंटे में वजह स्पष्ट, एम्स में फ्री क्लिनिकल ऑटोप्सी शुरू

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 10 Apr 2026 06:16 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश में अब गर्भावस्था के दौरान होने वाली मौतों की असली वजह छिपी नहीं रहेगी। एम्स भोपाल की फ्री क्लिनिकल ऑटोप्सी पहल से न सिर्फ परिवारों को सच्चाई मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए मजबूत आधार भी तैयार होगा।

Bhopal News: The System to Uncover the Truth Behind Maternal Deaths—Cause Identified Within 90 Minutes; Free C
एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु के बढ़ते मामलों के बीच अब मौत के पीछे की असली वजह छिपी नहीं रहेगी। गर्भावस्था या प्रसव के दौरान महिला की मौत होने पर अब वैज्ञानिक तरीके से कारणों की पहचान की जाएगी। इसी दिशा में एम्स भोपाल ने क्लिनिकल ऑटोप्सी की नई सुविधा शुरू की है, जो पूरी तरह नि:शुल्क है और इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं रहती। प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, हर एक लाख प्रसव पर 159 महिलाओं की मौत हो रही है, जबकि हर हजार जन्म पर 40 नवजात दम तोड़ देते हैं। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों और खामियों को उजागर करते हैं।
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अब हर मौत की होगी वैज्ञानिक जांच
अक्सर गर्भवती महिलाओं की मौत के मामलों में वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। इससे न तो परिवार को सच्चाई मिलती है और न ही सिस्टम में सुधार के लिए ठोस आधार बन पाता है। अब क्लिनिकल ऑटोप्सी के जरिए शरीर के जरूरी हिस्सों की जांच कर बीमारी, जटिलता या अन्य कारणों की सटीक पहचान की जाएगी। यह प्रक्रिया मेडिको-लीगल ऑटोप्सी से अलग है, क्योंकि इसमें पुलिस की जरूरत नहीं होती और यह पूरी तरह परिवार की सहमति से की जाती है।
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डेढ़ घंटे में प्रक्रिया पूरी, सम्मान का पूरा ध्यान

एम्स में यह जांच करीब डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है। डॉक्टर केवल आवश्यक ऊतकों की जांच करते हैं और बाद में शरीर को पूरी सावधानी से पहले जैसा ही सुरक्षित कर दिया जाता है। चेहरे या शरीर की बनावट पर कोई असर नहीं पड़ता और पूरी प्रक्रिया गरिमा के साथ पूरी की जाती है।

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परिवार को मिलेगी पूरी सच्चाई
ऑटोप्सी के बाद डॉक्टर हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी के आधार पर रिपोर्ट तैयार करते हैं, जो कुछ ही दिनों में परिजनों को सौंप दी जाती है। इससे परिवार यह समझ पाता है कि मौत किन कारणों से हुई और इलाज में कहीं कोई चूक तो नहीं रही। इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सरकार को मातृ मृत्यु के मामलों का सटीक और प्रमाणिक डेटा मिलेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, संसाधनों की कमी और इलाज की खामियों को चिन्हित कर भविष्य की रणनीति तैयार की जा सकेगी। इस नई व्यवस्था में परिजन सीधे डॉक्टरों से बातचीत कर सकते हैं और पूरी प्रक्रिया को समझ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब मौत के असली कारण सामने आएंगे, तब ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।

 
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