MP: दोबारा पोस्टमार्टम से कौन से राज खुलेंगे? गिरिबाला सिंह की जमानत के खिलाफ क्यों खड़ी हुई सरकार? जानिए!
त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में जांच तेज हो गई है। समर्थ सिंह को भोपाल लाया गया है, जबकि दिल्ली एम्स की टीम आज दोबारा पोस्टमार्टम कर सकती है। वहीं, पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत का राज्य सरकार ने विरोध किया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस हाईप्रोफाइल केस में कई अहम खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है।अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद इस चर्चित मामले का राज खुलेगा। चलिए बता रहे हैं इस केस में अब-तक क्या-क्या हुआ?
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विस्तार
त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में शुक्रवार का दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। वहीं, शनिवार को इस केस को लेकर कई बड़े अपडेट सामने आ सकते हैं। समर्थ सिंह के सरेंडर करने के बाद उसे जबलपुर से भोपाल लाया गया है। भोपाल पुलिस आज उन्हें कोर्ट में पेशकर रिमांड की मांग कर सकती है। वहीं, आज दिल्ली एम्स की टीम दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भोपाल पहुंच सकती है।त्विषा शर्मा केस में दोबारा पोस्टमार्टम से कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
त्विषा शर्मा की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर जानें क्यों खड़े हुए थे सवाल?
त्विषा शर्मा केस में सबसे अहम बात दोबारा पोस्टमार्टम की है क्योंकि पहली रिपोर्ट पर परिवार वालों ने कई सवाल खड़े कर दिए थे? परिवार वालों का आरोप था कि पोस्टमार्टम के दौरान कई तरह से लापरवाही की गई। तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। इस वजह से पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट संदेह के घेरे में थी।
त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा और भाई मेजर हर्षित शर्मा ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि त्विषा की सास (पूर्व सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह) की सगी बहन भोपाल की एक बेहद वरिष्ठ चिकित्सक (डॉक्टर) हैं। परिजनों के मुताबिक, 12 मई को त्विषा की मौत के बाद गिरिबाला सिंह अपने बेटे के साथ खुद शव लेकर एम्स पहुंची थीं। इसके बाद गिरिबाला सिंह की डॉक्टर बहन पूरी रात एम्स अस्पताल में ही मौजूद रहीं। अगले दिन 13 मई की सुबह जब त्विषा का पोस्टमार्टम किया जा रहा था, तब भी उनकी डॉक्टर बहन डॉक्टरों के पैनल के पास वहां मौजूद थीं। चूंकि, एम्स भोपाल में उनकी पहचान के कई वरिष्ठ चिकित्सक हैं, इसलिए परिजनों को आशंका है कि पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को प्रभावित किया गया है।
त्विषा शर्मा के शरीर पर चोंट के निशान क्यों पड़ें?
परिजनों का सीधा आरोप है कि त्विषा शर्मा की पीएम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कुछ नए और पुराने चोटों के निशान पाए गए हैं। शरीर पर संघर्ष के स्पष्ट निशान होने का मतलब है कि मौत से पहले उसके साथ मारपीट हुई थी। उसने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। इन तमाम सबूतों के बावजूद एम्स ने अपनी रिपोर्ट में इसे महज एक आत्महत्या (सुसाइड) करार दे दिया। इन चोटों को लेकर रिपोर्ट में कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया।
जिम्नास्टिक बेल्ट को लेकर मिलेगा जवाब
जिस जिम्नास्टिक बेल्ट के सहारे त्विषा फंदे पर लटकी मिली थी, पुलिस ने घटना के तुरंत बाद उसे जब्त क्यों नहीं किया? पोस्टमार्टम के समय एम्स के डॉक्टरों के दल ने पुलिस से यह क्यों नहीं पूछा कि अगर यह फांसी लगाकर खुदकुशी का मामला है, तो लिगेचर (फंदा) कहां है और किस वस्तु से फंदा बनाया गया था?
जब परिजनों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और यह बात मीडिया में सुर्खियां बनी, तब जाकर घटना के पांचवें दिन यानी 17 मई को कटारा हिल्स थाना पुलिस ने उस जिम्नास्टिक बेल्ट (लिगेचर) को जब्त किया और जांच के लिए एम्स भेजा। इसके बाद, सोमवार 18 मई को एम्स ने तुरंत यह सप्लीमेंट्री रिपोर्ट दे दी कि जो लिगेचर रविवार को पुलिस ने सौंपा है, उसी से फंदा लगाकर आत्महत्या की गई है। डॉक्टरों की इस जल्दबाजी ने परिजनों के शक को और पुख्ता कर दिया।
शव के डिकंपोज थ्योरी पर उठे सवाल
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जहां अमेरिका जैसे आधुनिक देशों में शव को माइनस 4 डिग्री तापमान पर भी लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। शव खराब नहीं होता, वहीं एम्स भोपाल ने स्थानीय पुलिस के साथ कथित मिलीभगत करते हुए एक अजीब दलील दी। एम्स ने कहा कि उनके पास शव को सड़ने (डिकंपोज होने) से बचाने के लिए जरूरी माइनस 80 डिग्री तापमान वाले डीप फ्रीजर की सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए त्विषा का शव जल्द ही खराब हो सकता है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर कटारा हिल्स पुलिस ने 20 मई को मृतका के पिता को एक आधिकारिक पत्र थमा दिया, जिसमें लिखा था कि आप जल्दी से शव को अपने कब्जे में लेकर अंतिम संस्कार करें, ताकि बॉडी को डिकंपोज होने से बचाया जा सके।
त्विषा के परिजनों के वकील ने इन्हीं तमाम ठोस और संदेहास्पद आधारों को लेकर जबलपुर उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की थी। शुक्रवार को इस पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद उच्च न्यायालय ने दिल्ली एम्स की विशेष टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया है। अब जल्द ही दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम विशेष रूप से भोपाल आएगी और त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कर अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर इस केस की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
पूर्व जज गिरिबाला की जमानत पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
वहीं, राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र की रहने वाली त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में उनकी सास और भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को भी दहेज हत्या का आरोपी बनाया गया है। गिरिबाला सिंह वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम बेंच-2 की अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें भोपाल की विशेष अदालत से मिली अग्रिम जमानत पर अब लगातार गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मृतका त्विषा के परिजन पहले दिन से ही पूर्व जज को अग्रिम जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध कर रहे थे।
जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहीं गिरिबाला सिंह
दहेज हत्या की कथित आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह से पूछताछ करने के लिए भोपाल पुलिस अब तक तीन बार नोटिस भेज चुकी है। इसके बावजूद गिरिबाला सिंह पूछताछ के लिए थाने में उपस्थित नहीं हुईं। अग्रिम जमानत मिलने के बाद जब पुलिस ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, तो पता चला कि वह भोपाल में ही मौजूद हैं, लेकिन वह पुलिस जांच में किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं कर रही हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में रखा सरकार का पक्ष
इसी असहयोग को आधार बनाकर मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर उच्च न्यायालय में गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त (कैंसल) कराने के लिए एक याचिका दायर की है। शुक्रवार को इस मामले पर जबलपुर उच्च न्यायालय के जस्टिस अवनीन्द्र सिंह की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने दलील देते हुए कहा, 'सशर्त अग्रिम जमानत मिलने के कारण आरोपी द्वारा अभियोजन पक्ष (पुलिस) को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया जा रहा है। जांच में सहयोग न मिलने से केस के महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। गिरिबाला सिंह पुलिस की पूछताछ से लगातार बच रही हैं, जिससे यह प्रबल आशंका पैदा होती है कि दहेज हत्या के इस संवेदनशील मामले में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। अतः न्याय के हित में गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को तत्काल निरस्त किया जाए।'
जस्टिस अवनीन्द्र सिंह ने इस मामले की गंभीरता और इसमें शामिल कानूनी पहलुओं को देखते हुए सुनवाई के दौरान ही राज्य सरकार की इस याचिका को उच्च न्यायालय की डबल बेंच (खंडपीठ) को रेफर कर दिया। इसके साथ ही माननीय कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह संबंधित पक्षों को इस मामले से जुड़े नोटिस तामील (सर्व) करवाए।
जबलपुर कोर्ट में क्यों नहीं मान्य हुआ समर्थ का सरेंडर?
शुक्रवार दोपहर बाद करीब चार बजे समर्थ सिंह खुद का भेष बदलकर और चेहरे पर मास्क लगाकर जबलपुर जिला अदालत में सरेंडर करने पहुंचे। उन्होंने न्यायाधीश के सामने खुद को दहेज हत्या का आरोपी बताते हुए सरेंडर करने की पेशकश की। हालांकि, न्यायाधीश ने उनकी इस गुहार को यह कहते हुए खारिज कर दिया और सरेंडर कराने से साफ मना कर दिया। इस मामले में वकीलों ने कहा कि जिस अदालत में यह मूल प्रकरण चल रहा है (यानी भोपाल की संबंधित अदालत), आरोपी उसी अदालत में जाकर सरेंडर कर सकता है। यही वजह रही कि तमाम कोशिशों के बावजूद समर्थ सिंह जबलपुर जिला अदालत में कानूनी रूप से सरेंडर नहीं कर पाए।
इसके बाद जिला अदालत के वकीलों ने परिसर में जमकर हंगामा शुरू कर दिया। वहां आरोपी पक्ष और पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और कहासुनी हो गई। माहौल इतना गरमा गया कि दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की तक आने की स्थिति बन गई
मौके पर मौजूद रही पुलिस
अदालत परिसर में भारी गहमा-गहमी और तनाव को देखते हुए न्यायाधीश ने तुरंत जबलपुर पुलिस को मौके पर बुलाया। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि समर्थ सिंह को तत्काल हिरासत में लिया जाए और इस संबंध में भोपाल पुलिस को सूचित किया जाए। इस निर्देश के बाद जबलपुर पुलिस ने आरोपी को अपनी कस्टडी में ले लिया। सूचना मिलते ही भोपाल पुलिस की टीम जबलपुर पहुंची और समर्थ सिंह को अपनी कस्टडी में लेकर जबलपुर से रवाना हो गई, जो आधी रात के बाद भोपाल पहुंची।
त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले की पूरी और विस्तृत टाइमलाइन
12 मई की रात (करीब 10:00 बजे के बाद): भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में 31 वर्षीय त्विषा शर्मा की जिम्नास्टिक बेल्ट के फंदे से लटकी हुई लाश मिली।
12 मई की रात (करीब 10:30 बजे): परिजनों और ससुराल पक्ष द्वारा त्विषा को तुरंत भोपाल एम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया।
12-13 मई की दरमियानी रात (12:00 बजे के कुछ मिनट बाद): एम्स अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, त्विषा के शव को मृत अवस्था में अस्पताल के मर्चुरी वार्ड में लाया गया था।
13 मई की सुबह: एम्स भोपाल के डॉक्टरों के पैनल द्वारा त्विषा के शव का पहला पोस्टमॉर्टम संपन्न किया गया।
13 मई की सुबह: भोपाल पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मृतका की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या (Dowry Death) का आपराधिक प्रकरण दर्ज किया।
13 मई की दोपहर: एम्स की जल्दबाजी और पुलिसिया कार्रवाई से असंतुष्ट परिजनों ने भोपाल पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर न्याय की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया।
13 मई: आरोपी सास गिरिबाला सिंह की ओर से विशेष अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन दायर किया गया।
14 मई की शाम (करीब 4:30 बजे): भोपाल की विशेष अदालत ने आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई की मंजूरी दे दी।
15 मई: मृतका त्विषा के परिजनों ने एम्स भोपाल द्वारा जारी की गई पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया और इसे प्रभावित रिपोर्ट बताया।
15-16 मई: मामले में स्थानीय प्रभाव को देखते हुए परिजनों ने इस पूरे हाईप्रोफाइल केस की निष्पक्ष जांच दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर करने की पुरजोर मांग उठाई।
17 मई की दोपहर (12:00 बजे): न्याय की गुहार लेकर परिजनों ने मुख्यमंत्री आवास (CM House) के बाहर धरना दिया। इसके बाद उन्होंने सीएम सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस बड़े घटनाक्रम के बाद खुद भोपाल पुलिस आयुक्त (CP) ने परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया।
17 मई (पांचवें दिन): कटारा हिल्स पुलिस ने मामले में अत्यधिक दबाव बढ़ने के बाद घटना में इस्तेमाल लिगेचर (जिम्नास्टिक बेल्ट) को पहली बार जब्त किया।
18 मई: परिजनों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली एम्स के डॉक्टरों से दोबारा स्वतंत्र पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की।
18 मई: भोपाल पुलिस ने कोर्ट और परिजनों को आवेदन देकर कहा कि या तो परिजन शव को जल्द अपने कब्जे में लें, अन्यथा पुलिस खुद उसका अंतिम संस्कार कर देगी।
18 मई (सोमवार): एम्स भोपाल ने पुलिस द्वारा रविवार को दिए गए लिगेचर की तुरंत जांच कर सप्लीमेंट्री रिपोर्ट दी कि इसी से फांसी लगाई गई थी।
20 मई: कटारा हिल्स पुलिस ने त्विषा के परिजनों को एक लिखित पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि एम्स में शव को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित डीप फ्रीजर की व्यवस्था नहीं है। बॉडी डिकम्पोज (सड़) सकती है, इसलिए आप तुरंत शव को अपने सुपुर्द लीजिए।
20 मई: परिजनों की इस मांग पर सुनवाई करते हुए भोपाल जिला अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने का आदेश देने से यह कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि भोपाल के बाहर (जैसे दिल्ली एम्स से) पीएम कराने का आदेश देना उनके न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
20 मई: मामले के तूल पकड़ने पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजकर पूरे मामले पर विस्तृत जवाब तलब किया।
20 मई: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने देश के केंद्रीय गृह मंत्री और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर त्विषा शर्मा मौत मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) जांच कराए जाने की मांग की।
21 मई: आरोपी पति समर्थ सिंह ने गिरफ्तारी से बचने के लिए जबलपुर उच्च न्यायालय में अपनी अग्रिम जमानत याचिका दायर की।
21 मई: मृतका त्विषा के परिजनों की ओर से भी जबलपुर उच्च न्यायालय में दोबारा पीएम कराने और सास गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से मिली अग्रिम जमानत को निरस्त करने के लिए दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं।
21 मई: परिजनों के वकील ने भोपाल जिला अदालत में एक और याचिका दायर कर मांग की कि 12 मई से 13 मई के बीच आरोपी गिरिबाला सिंह के लगभग चार दर्जन (48) मोबाइल नंबरों पर हुई बातचीत की सघन जांच हो, उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) व अन्य डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं और उन्हें पुलिस केस डायरी का हिस्सा बनाया जाए।
22 मई (शुक्रवार): मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्विषा शर्मा की मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने के लिए अपनी आधिकारिक सहमति दे दी और इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिख दिया।
22 मई (शुक्रवार): जबलपुर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली एम्स की टीम से त्विषा का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश जारी कर दिया। इसी दिन हाईकोर्ट में आरोपी पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने की नौबत आई, जिसे भांपकर उनके वकील ने याचिका वापस ले ली।
22 मई (शुक्रवार): अग्रिम जमानत याचिका वापस होने के बाद आरोपी वकील समर्थ सिंह भेष बदलकर जबलपुर जिला अदालत में सरेंडर करने पहुंचा, लेकिन वहां के जज ने तकनीकी कारणों से सरेंडर लेने से मना कर दिया। इसके तुरंत बाद कोर्ट परिसर में मचे हंगामे के बीच जबलपुर पुलिस ने समर्थ सिंह को अपनी कस्टडी में ले लिया।
22 मई (शुक्रवार): पूरे घटनाक्रम के बीच जब मीडिया ने इस केस की सीबीआई जांच को लेकर सवाल पूछा, तो आरोपी गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता आपा खो बैठे और मीडियाकर्मियों पर जमकर भड़कते हुए चीखने-चिल्लाने लगे।
22-23 मई की दरमियानी देर रात: भोपाल पुलिस की एक विशेष टीम जबलपुर से आरोपी समर्थ सिंह को हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच भोपाल पहुंची और उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
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