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गौवंश संरक्षण: सात स्थानों पर गौशाला निर्माण की टेंडर प्रक्रिया पूरी, ऑस्ट्रेलिया, दुबई की एजेंसी ने लिया भाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 25 Feb 2026 08:55 PM IST
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सार
विधानसभा में बेसहारा गौवंश और किसानों की फसल नुकसान का मुद्दा उठा। पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा कि दो साल में सड़कों से आवारा गौवंश की समस्या काफी हद तक खत्म कर दी जाएगी।
सड़क पर लावारिश पशु (फाइल फोटो)
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विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को बेसहारा गौवंश और फसल नुकसान के मुद्दे पर चर्चा हुई। ध्यानाकर्षण की सूचना पर पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने सरकार की कार्ययोजना स्पष्ट करते हुए कहा कि अगले दो वर्षों में सड़कों पर आवारा गौवंश की समस्या को काफी हद तक समाप्त कर दिया जाएगा। विधानसभा में कांग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल भैया ने निराश्रित पशुओं से किसानों की फसल नुकसान और यातायात प्रभावित होने की तरफ ध्यानाकर्षण सूचना दी थी। इस पर मंत्री लखन पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि 116 गौशालाएं अपूर्ण होने की बात कही गई है, लेकिन सरकार बड़े और व्यवस्थित मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। 25 जिलों में 29 स्थानों का चयन कर लिया गया है, जिनकी जमीन राजस्व विभाग से पशुपालन विभाग को हस्तांतरित की जा चुकी है। इनमें से 7 स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
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अगले 10 दिनों में एग्रीमेंट
उन्होंने बताया कि जबलपुर में 461 एकड़ भूमि, रायसेन में 320 एकड़ भूमि, दमोह में 520 एकड़ भूमि, सागर में 411 एकड़ भूमि, अशोकनगर में 293 एकड़ भूमि, खरगोन में 133 एकड़ भूमि, रीवा में 135 एकड़ भूमि पर गौशालाओं का निर्माण किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर टेंडर जारी हो चुके हैं और अगले 10 दिनों के भीतर एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। जून तक आधे से अधिक पूर्ण भी हो जाएंगे। इनमें नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के गौवंश को गौशालाओं में पहुंचाएंगे।
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10 लाख गौवंश बाहर
मंत्री ने सदन के सभी सदस्यों से कहा कि यह देश का पहला ऐसा मॉडल होगा, जो गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेगा। मंत्री ने कहा कि अभी 10 लाख से अधिक गौवंश बाहर है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत न्यूनतम 130 एकड़ क्षेत्र में कम से कम 5,000 गौवंश रखने की व्यवस्था होगी। कुछ स्थानों पर 20,000 से 30,000 तक गौवंश को रखने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री और कैबिनेट द्वारा विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है, जो देश में एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगा। मंत्री ने यह भी बताया कि इस योजना में ऑस्ट्रेलिया और दुबई से भी कंपनियों ने रुचि दिखाई है और टेंडर डाले हैं। इसके अलावा 22 अन्य गौशालाओं के टेंडर भी जारी किए जा रहे हैं, जो संभवतः एक महीने के भीतर प्राप्त हो जाएंगे। सरकार का दावा है कि यह पहल गौवंश संरक्षण को व्यवस्थित, आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक समाधान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पहले गौशालाओं को प्रति पशु 20 रुपये प्रतिदिन मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। इसमें 35 रुपये चारा और पोषण पर तथा 5 रुपये गौ-सेवकों के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि गौशाला संचालन चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन सरकार चरणबद्ध तरीके से शेड निर्माण और चारे की व्यवस्था पहले सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।
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दुबई या ऑस्ट्रेलिया के लोग, गौसेवा की भावना से काम नहीं करेंगे
विधानसभा में गौवंश के मुद्दे पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि सदन में कुत्तों से जुड़े विषयों पर अधिक समय मिलता है, जबकि गौवंश पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि विदेशों, जैसे दुबई या ऑस्ट्रेलिया के लोग, गौसेवा की भावना से काम नहीं करेंगे, इसलिए इस विषय पर स्थानीय और संवेदनशील दृष्टिकोण जरूरी है।
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अगले 10 दिनों में एग्रीमेंट
उन्होंने बताया कि जबलपुर में 461 एकड़ भूमि, रायसेन में 320 एकड़ भूमि, दमोह में 520 एकड़ भूमि, सागर में 411 एकड़ भूमि, अशोकनगर में 293 एकड़ भूमि, खरगोन में 133 एकड़ भूमि, रीवा में 135 एकड़ भूमि पर गौशालाओं का निर्माण किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर टेंडर जारी हो चुके हैं और अगले 10 दिनों के भीतर एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। जून तक आधे से अधिक पूर्ण भी हो जाएंगे। इनमें नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के गौवंश को गौशालाओं में पहुंचाएंगे।
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10 लाख गौवंश बाहर
मंत्री ने सदन के सभी सदस्यों से कहा कि यह देश का पहला ऐसा मॉडल होगा, जो गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेगा। मंत्री ने कहा कि अभी 10 लाख से अधिक गौवंश बाहर है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत न्यूनतम 130 एकड़ क्षेत्र में कम से कम 5,000 गौवंश रखने की व्यवस्था होगी। कुछ स्थानों पर 20,000 से 30,000 तक गौवंश को रखने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री और कैबिनेट द्वारा विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है, जो देश में एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगा। मंत्री ने यह भी बताया कि इस योजना में ऑस्ट्रेलिया और दुबई से भी कंपनियों ने रुचि दिखाई है और टेंडर डाले हैं। इसके अलावा 22 अन्य गौशालाओं के टेंडर भी जारी किए जा रहे हैं, जो संभवतः एक महीने के भीतर प्राप्त हो जाएंगे। सरकार का दावा है कि यह पहल गौवंश संरक्षण को व्यवस्थित, आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक समाधान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पहले गौशालाओं को प्रति पशु 20 रुपये प्रतिदिन मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। इसमें 35 रुपये चारा और पोषण पर तथा 5 रुपये गौ-सेवकों के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि गौशाला संचालन चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन सरकार चरणबद्ध तरीके से शेड निर्माण और चारे की व्यवस्था पहले सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।
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दुबई या ऑस्ट्रेलिया के लोग, गौसेवा की भावना से काम नहीं करेंगे
विधानसभा में गौवंश के मुद्दे पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि सदन में कुत्तों से जुड़े विषयों पर अधिक समय मिलता है, जबकि गौवंश पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि विदेशों, जैसे दुबई या ऑस्ट्रेलिया के लोग, गौसेवा की भावना से काम नहीं करेंगे, इसलिए इस विषय पर स्थानीय और संवेदनशील दृष्टिकोण जरूरी है।

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