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दतिया का दंगल: आशुतोष साध रहे जातीय समीकरण तो घनश्याम को जनता से सीधा जुड़ाव पहुंचा रहा लाभ

Mon, 27 Jul 2026 08:29 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 27 Jul 2026 08:29 AM IST
सार

30 जुलाई को रहे दतिया उपचुनाव 2026 में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है। हालांकि, जातीय समीकरण और भाजपा के परंपरागत वोट बैंक के चलते भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का पलड़ा कुछ भारी नजर आ रहा है। वहीं, राजपरिवार से जुड़े होने और पूर्व में दो बार विधायक रहने से कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह का भी क्षेत्र की जनता से व्यक्तिगत जुड़ाव बड़ी ताकत माना जा रहा है। ऐसे में मुकाबला कांटे का रहने और जीत-हार का अंतर बेहद कम रहने के आसार हैं।  

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Datia's Electoral Battle: Ashutosh focuses on caste equations, while Ghanshyam benefits from direct public con
दतिया उपचुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दतिया ही नहीं, ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग से जुड़े इलाकों में उत्तर प्रदेश की सीमा और सामाजिक संरचना के कारण जातीय समीकरण चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। दतिया में भी भाजपा और कांग्रेस ने अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है। दतिया में किसी एक समाज के वोट से चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। भाजपा के लिए ब्राह्मण-सवर्ण-वैश्य और ओबीसी वोट बैंक को एकजुट रखना अहम है, जबकि कांग्रेस की नजर जाटव-अहिरवार और अल्पसंख्यक वोटों पर है। कुशवाहा-काछी, यादव, लोधी, बघेल-पाल और अन्य सामाजिक समूहों का रुख भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। घनश्याम सिंह का व्यक्तिगत संपर्क और दो बार विधायक रहने का अनुभव भाजपा के लिए चुनौती है। वहीं, भाजपा के पक्ष में सत्ता और संगठन की ताकत के साथ आशुतोष तिवारी की जातीय पृष्ठभूमि काम कर सकती है। हालांकि, 30 जुलाई को मतदान के बाद ही साफ होगा कि दतिया के मतदाताओं ने जातीय समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और सत्ता-संगठन में से किसे ज्यादा महत्व दिया। 
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कांग्रेस को जाटव-अहिरवार वोट से उम्मीद
दतिया विधानसभा में अहिरवार-जाटव समाज की आबादी करीब 14.7% बताई जा रही है। यह ब्राह्मण समाज के लगभग बराबर है। कांग्रेस का परंपरागत दलित वोट बैंक इस चुनाव में उसके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जाटव-अहिरवार वोट कांग्रेस के पक्ष में मजबूती से जाता है तो घनश्याम सिंह का मुकाबला काफी मजबूत हो सकता है। वहीं, भाजपा की कोशिश इस वोट बैंक में सेंध लगाने की होगी। 
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ब्राह्मण समाज सबसे बड़ा सामाजिक समूह
जातीय आंकड़ों के अनुसार दतिया विधानसभा में ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी 14.8% है। यह सबसे बड़ा सामाजिक समूह है। आशुतोष तिवारी के इसी समाज से होने के कारण भाजपा इस वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। पूर्व मंत्री और दतिया में प्रभाव रखने वाले नेता नरोत्तम मिश्रा भी आशुतोष के समर्थन में सक्रिय हैं। ऐसे में भाजपा के सामने ब्राह्मण मतदाताओं के साथ अपने सवर्ण और वैश्य आधार को भी मजबूत रखने की चुनौती है। 

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12.2% कुशवाहा-काछी वोट भी अहम
दतिया में कुशवाहा-काछी समाज की आबादी करीब 12.2% बताई जा रही है। ये दतिया के सबसे बड़े सामाजिक समूहों में शामिल है। दोनों दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा की ओर से कुशवाहा समाज से आने वाले नेताओं को प्रचार में सक्रिय किया जा रहा है। इस वर्ग का रुख चुनाव के अंतिम नतीजे को प्रभावित कर सकता है।

यादव और लोधी वोट भी बदल सकते हैं गणित
दतिया में यादव समाज की आबादी 7.4% और लोधी समाज की 6.9% बताई गई है। दोनों को मिलाकर यह हिस्सेदारी 14% से अधिक होती है। ऐसे में इन दोनों समाजों का समर्थन भी किसी प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने में अहम हो सकता है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रहलाद पटेल और लोधी समाज के नेताओं को प्रचार में सक्रिय किया जा रहा है। पार्टी की कोशिश इन वर्गों के अपने सामाजिक आधार को बनाए रखने की है। 

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घनश्याम सिंह के व्यक्तिगत संपर्क पर कांग्रेस को भरोसा
कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दतिया से दो बार विधायक रह चुके हैं और राजपरिवार से जुड़े होने के कारण क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत संपर्क माना जाता है। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर उनके पक्ष में माहौल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कांग्रेस का मुख्य भरोसा उसके परंपरागत दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर है। इसके साथ ही पार्टी की कोशिश अन्य पिछड़े और सवर्ण वर्गों में भी समर्थन जुटाने की है। 

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कम अंतर से जीत-हार के आसार
वरिष्ठ पत्रकार गणेश साकल्ले ने कहा कि दतिया में दोनों ही मुख्य पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा जातीय समीकरण को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।   जातीय समीकरण आशुतोष तिवारी के पक्ष में जाते सकते हैं। भाजपा का परंपरागत वोट ब्राह्मण, सर्वण और वैश्य है। ओबीसी भी लंबे समय से भाजपा को वोट देते आ रहा है। लोधी, यादव भी भाजपा को वोट देते आ रहे हैं। प्रहलाद पटेल और उमा भारती, आशुतोष तिवारी ब्राह्मण हैं। ओबीसी वोट बैंक भाजपा की तरफ रहा है। पिछले 20 साल से पार्टी ने प्रदेश में ओबीसी वर्ग से ही मुख्यमंत्री बनाए हैं। यादव भी उनकी तरफ आते हैं। हालांकि, कांग्रेस को दो बार विधायक रहे और राजपरिवार से आने वाले घनश्याम सिंह की छवि और स्थानीय मुद्दों पर भरोसा है। कांग्रेस के लिए अपने परंपरागत दलित वोट बैंक को पूरी तरह अपने पक्ष में बनाए रखना इस चुनाव में निर्णायक साबित होगा।
 
दतिया का जातीय गणित
समाज    अनुमानित आबादी

ब्राह्मण    14.8%
अहिरवार-जाटव    14.7%
कुशवाहा-काछी    12.2%
यादव    7.4%
लोधी    6.9%
बघेल-पाल    5.3%
मुस्लिम    3.7%
बनिया    3.7%
ठाकुर-राजपूत    3%
रावत (मीणा)    2.9%
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