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भोपाल में कई दुकानों-होटलों के खाद्य नमूने फेल: पनीर से दूध तक अमानक, साढ़े छह लाख से ज्यादा जुर्माना
Fri, 23 Oct 2026 05:54 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 23 Oct 2026 05:54 PM IST
सार
भोपाल में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में 35 प्रतिष्ठानों के खाद्य नमूने अमानक या मिथ्या छाप पाए गए। पनीर, दूध, घी, मिठाई और नमकीन समेत कई खाद्य पदार्थ जांच के दायरे में आए। विभाग ने 35 से अधिक मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी है, जबकि पिछले तीन महीनों में लंबित मामलों की सुनवाई के बाद 6.50 लाख रुपये से अधिक जुर्माना लगाया गया।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल में बाजार से खरीदे जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में गंभीर सवाल उठे हैं। डेयरी, होटल, रेस्टोरेंट और किराना दुकानों से लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच में पनीर, दूध, क्रीम, घी, मिठाई और नमकीन समेत कई खाद्य पदार्थ अमानक या मिथ्या छाप पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने इन मामलों में 35 से अधिक प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति जारी की है। वहीं, अपर कलेक्टर न्यायालय में पिछले तीन महीनों के दौरान सुनवाई के बाद विभिन्न खाद्य मामलों में 6.50 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। विभाग की सूची में कुल 35 खाद्य कारोबारियों और प्रतिष्ठानों के नाम हैं। इनमें डेयरियों के साथ होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानें, किराना स्टोर और कैंटीन भी शामिल हैं। जांच में सबसे ज्यादा मामले पनीर के नमूनों से जुड़े हैं। इसके अलावा गाय और भैंस के दूध, क्रीम, घी, मावा कतली, मावा बर्फी, नमकीन खुरमा, लॉन्ग सेव और पेटिस के नमूनों पर भी सवाल उठे हैं।
पनीर के नमूनों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
खाद्य सुरक्षा प्रशासन की जारी सूची में पनीर के नमूनों की संख्या सबसे अधिक है। श्री कृष्णा डेयरी, नेशनल डेयरी, जीत ढाबा एंड फैमिली रेस्टोरेंट, होटल श्री रेजिडेंसी, शिव शंभू रेस्टोरेंट, होटल प्लाजा इन, होटल आमेर ग्रीन और होटल पुष्पांजलि सहित कई प्रतिष्ठानों के पनीर के नमूने अमानक पाए गए हैं। सूची में कृष्णा दूध डेयरी, नीलबड़ से पनीर और गाय के दूध, जबकि न्यू इंडियन डेयरी, अशोका गार्डन से भैंस के दूध का नमूना भी अमानक दर्ज किया गया है। नेशनल डेयरी एंड स्वीट्स, कोहेफिजा और राजा दूध डेयरी, बैरसिया के भैंस के दूध के नमूनों पर भी कार्रवाई की गई है।
मिठाई और नमकीन भी जांच में आए सवालों के घेरे में
मिठाइयों और नमकीन के नमूनों में भी गड़बड़ी मिली है। रानी स्वीट के मावा कतली, राजोरिया होटल और अजय बेकरी एंड स्वीट्स के मावा बर्फी के नमूने मिथ्या छाप पाए गए। तन्वी एंटरप्राइजेज के नमकीन खुरमा, कनक फैंसी जनरल एंड किराना स्टोर के लॉन्ग सेव और एमआईएमएस कैंटीन की पेटिस भी इसी श्रेणी में दर्ज हैं। मनभावन किराना एंड जनरल स्टोर्स से लिए गए को-प्योर घी, भूमि ब्रांड के नमूने को भी अमानक बताया गया है। वहीं, गुप्ता पान मसाला स्टोर, जहांगीराबाद से लिए गए मूंगफली दाने का नमूना भी जांच में अमानक निकला।
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दो दुकानों के सोयाबीन तेल पर प्रतिबंध संबंधी मामला
विभाग की सूची में गोस्वामी किराना स्टोर, न्यू बाग मुगलिया से लिए गए खुले रिफाइंड सोयाबीन तेल और श्री अरिहंत किराना स्टोर, भानपुर के सोयाबीन तेल को प्रतिबंधित श्रेणी में दर्ज किया गया है। इसके अलावा न्यू मेवाड़ा कृषि सेवा केंद्र, बरखेड़ा नाथू के भैंस के दूध का नमूना अमानक पाया गया। इस मामले में बिना पंजीयन का तथ्य भी सामने आया है।
यह भी पढ़ें-एमपी: न महंगे कपड़े, न बड़ा स्टूडियो…घर की गली से शुरू हुआ सफर, अब मॉडलिंग की दुनिया में पहचान बना रहीं प्रीति
35 से अधिक मामलों में अभियोजन की मंजूरी
खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अनुसार, प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। 35 से अधिक मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी की गई है। पूर्व से अपर कलेक्टर न्यायालय में लंबित मामलों में सुनवाई के बाद पिछले तीन महीनों में 6.50 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। अन्य लंबित मामलों में भी सुनवाई और वैधानिक कार्रवाई जारी है। विभाग का कहना है कि खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, नमूने लेने और उनकी प्रयोगशाला जांच के आधार पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, जारी सूची में प्रत्येक मामले के अंतिम न्यायिक निर्णय या जुर्माने का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए अभियोजन स्वीकृति को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
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पनीर के नमूनों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
खाद्य सुरक्षा प्रशासन की जारी सूची में पनीर के नमूनों की संख्या सबसे अधिक है। श्री कृष्णा डेयरी, नेशनल डेयरी, जीत ढाबा एंड फैमिली रेस्टोरेंट, होटल श्री रेजिडेंसी, शिव शंभू रेस्टोरेंट, होटल प्लाजा इन, होटल आमेर ग्रीन और होटल पुष्पांजलि सहित कई प्रतिष्ठानों के पनीर के नमूने अमानक पाए गए हैं। सूची में कृष्णा दूध डेयरी, नीलबड़ से पनीर और गाय के दूध, जबकि न्यू इंडियन डेयरी, अशोका गार्डन से भैंस के दूध का नमूना भी अमानक दर्ज किया गया है। नेशनल डेयरी एंड स्वीट्स, कोहेफिजा और राजा दूध डेयरी, बैरसिया के भैंस के दूध के नमूनों पर भी कार्रवाई की गई है।
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मिठाई और नमकीन भी जांच में आए सवालों के घेरे में
मिठाइयों और नमकीन के नमूनों में भी गड़बड़ी मिली है। रानी स्वीट के मावा कतली, राजोरिया होटल और अजय बेकरी एंड स्वीट्स के मावा बर्फी के नमूने मिथ्या छाप पाए गए। तन्वी एंटरप्राइजेज के नमकीन खुरमा, कनक फैंसी जनरल एंड किराना स्टोर के लॉन्ग सेव और एमआईएमएस कैंटीन की पेटिस भी इसी श्रेणी में दर्ज हैं। मनभावन किराना एंड जनरल स्टोर्स से लिए गए को-प्योर घी, भूमि ब्रांड के नमूने को भी अमानक बताया गया है। वहीं, गुप्ता पान मसाला स्टोर, जहांगीराबाद से लिए गए मूंगफली दाने का नमूना भी जांच में अमानक निकला।
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दो दुकानों के सोयाबीन तेल पर प्रतिबंध संबंधी मामला
विभाग की सूची में गोस्वामी किराना स्टोर, न्यू बाग मुगलिया से लिए गए खुले रिफाइंड सोयाबीन तेल और श्री अरिहंत किराना स्टोर, भानपुर के सोयाबीन तेल को प्रतिबंधित श्रेणी में दर्ज किया गया है। इसके अलावा न्यू मेवाड़ा कृषि सेवा केंद्र, बरखेड़ा नाथू के भैंस के दूध का नमूना अमानक पाया गया। इस मामले में बिना पंजीयन का तथ्य भी सामने आया है।
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35 से अधिक मामलों में अभियोजन की मंजूरी
खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अनुसार, प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। 35 से अधिक मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी की गई है। पूर्व से अपर कलेक्टर न्यायालय में लंबित मामलों में सुनवाई के बाद पिछले तीन महीनों में 6.50 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। अन्य लंबित मामलों में भी सुनवाई और वैधानिक कार्रवाई जारी है। विभाग का कहना है कि खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, नमूने लेने और उनकी प्रयोगशाला जांच के आधार पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, जारी सूची में प्रत्येक मामले के अंतिम न्यायिक निर्णय या जुर्माने का अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए अभियोजन स्वीकृति को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
