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भोपाल में सरकारी मकानों पर अवैध कब्जा: मकान खाली होते ही डाल देते हैं डेरा, कई मकानों में व्यवसायिक गतिविधि
Sat, 18 Jul 2026 06:52 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 18 Jul 2026 06:52 PM IST
सार
भोपाल के नार्थ टीटी नगर क्षेत्र में संपदा विभाग के शासकीय आवासों पर वर्षों से अवैध कब्जे का खेल चल रहा है। खाली होते ही मकानों पर कब्जा कर उन्हें किराए पर तक दिया जा रहा है, जबकि कुछ आवास शराबियों के अड्डे बन गए हैं। कई सरकारी मकानों में दुकानें, कोचिंग और सिलाई सेंटर तक संचालित हो रहे हैं।
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शासकीय आवास
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल के नार्थ टीटी नगर क्षेत्र में शासकीय आवासों पर अवैध कब्जे का संगठित खेल सामने आया है। दशहरा मैदान और बाणगंगा के पास स्थित संपदा विभाग के आई टाइप सरकारी क्वार्टरों में कई परिवार वर्षों से बिना वैध आवंटन के रह रहे हैं। आरोप है कि जैसे ही कोई सरकारी कर्मचारी मकान खाली करता है, पहले से सक्रिय लोग उस पर कब्जा कर लेते हैं। कहीं आवंटी से सांठगांठ कर चाबी ले ली जाती है तो कहीं ताला तोड़कर मकान पर कब्जा कर लिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई परिवार छह से दस साल से अधिक समय से सरकारी आवासों में अवैध रूप से रह रहे हैं। कुछ लोगों ने पहले आवंटी के नाम पर प्रवेश किया और बाद में स्थायी कब्जा जमा लिया। कस्तूरबा विद्यालय से पलाश होटल तक कई सरकारी क्वार्टरों में ऐसे कब्जे बताए जा रहे हैं।
कलेक्टर के आदेश, फिर भी कार्रवाई नहीं
हाल ही में भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन नार्थ टीटी नगर क्षेत्र में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने वालों को संरक्षण कौन दे रहा है और जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं। यह भी सवाल है कि राजधानी के बीचों-बीच सरकारी संपत्ति पर वर्षों से कब्जा, किराएदारी और व्यावसायिक गतिविधियां चलने के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां अब तक मूकदर्शक क्यों बनी हुई हैं।
सरकारी मकानों से चल रहा किराए का कारोबार
जानकारी के अनुसार कुछ दबंगों ने सरकारी मकानों पर कब्जा कर उन्हें किराए पर दे रखा है। एक क्वार्टर में टेंट हाउस संचालक से हर महीने किराया वसूले जाने की बात सामने आई है। यानी सरकारी संपत्ति को निजी कमाई का जरिया बनाया जा रहा है।
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दुकान, कोचिंग और सिलाई सेंटर भी चल रहे
कुछ मकानों में दुकानें खोल दी गई हैं, जबकि कई क्वार्टरों में कोचिंग सेंटर और सिलाई सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। पूरे इलाके में मुश्किल से 10 प्रतिशत सरकारी मकानों में ही वास्तविक पात्र कर्मचारी रह रहे हैं, जबकि बाकी अधिकांश आवासों पर अवैध कब्जा है।
यह भी पढें-भोपाल में बारिश के लिए अनोखा टोटका: गधों को पहनाई माला, खिलाए गुलाब जामुन, इंद्र देव को मनाने की प्रार्थना
कुछ क्वार्टर बने शराबियों का अड्डा
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ शासकीय आवासों में शाम से देर रात तक शराबखोरी होती है। मूल आवंटी के मकान छोड़ने के बाद उन पर कब्जा कर असामाजिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे आसपास के रहवासी परेशान हैं।
नगर निगम को लाखों का नुकसान
अवैध कब्जाधारी सरकारी जल कनेक्शन का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन जलकर जमा नहीं हो रहा। कई मकानों के मूल आवंटी वर्षों पहले जा चुके हैं, जबकि मौजूदा कब्जाधारी बिना किसी भुगतान के पानी का उपयोग कर रहे हैं। इससे नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
यह भी पढें-सोशल साइट एक्स और फोन से दूरी: अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह का फैसला, धर्म यात्रा पर करेंगे फोकस
स्मार्ट सिटी परियोजना पर भी असर
नार्थ टीटी नगर का यह इलाका स्मार्ट सिटी परियोजना के दायरे में आता है। यहां कई शासकीय आवास जर्जर हो चुके हैं और पुनर्विकास के लिए इन्हें खाली कराने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कब्जाधारी मकान छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
क्या बोलीं संपदा तहसीलदार
संपदा तहसीलदार प्रीति श्रीवास्तव ने बताया कि भोपाल कलेक्टर के निर्देश पर शासकीय आवासों पर अवैध कब्जों की पहचान के लिए सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। जिन मकानों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। सर्वे पूरा होते ही ऐसे सभी आवासों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोमवार से अभियान चलाकर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी और सरकारी संपत्तियों को कब्जामुक्त कराया जाएगा।
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कलेक्टर के आदेश, फिर भी कार्रवाई नहीं
हाल ही में भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन नार्थ टीटी नगर क्षेत्र में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने वालों को संरक्षण कौन दे रहा है और जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं। यह भी सवाल है कि राजधानी के बीचों-बीच सरकारी संपत्ति पर वर्षों से कब्जा, किराएदारी और व्यावसायिक गतिविधियां चलने के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां अब तक मूकदर्शक क्यों बनी हुई हैं।
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सरकारी मकानों से चल रहा किराए का कारोबार
जानकारी के अनुसार कुछ दबंगों ने सरकारी मकानों पर कब्जा कर उन्हें किराए पर दे रखा है। एक क्वार्टर में टेंट हाउस संचालक से हर महीने किराया वसूले जाने की बात सामने आई है। यानी सरकारी संपत्ति को निजी कमाई का जरिया बनाया जा रहा है।
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दुकान, कोचिंग और सिलाई सेंटर भी चल रहे
कुछ मकानों में दुकानें खोल दी गई हैं, जबकि कई क्वार्टरों में कोचिंग सेंटर और सिलाई सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। पूरे इलाके में मुश्किल से 10 प्रतिशत सरकारी मकानों में ही वास्तविक पात्र कर्मचारी रह रहे हैं, जबकि बाकी अधिकांश आवासों पर अवैध कब्जा है।
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कुछ क्वार्टर बने शराबियों का अड्डा
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ शासकीय आवासों में शाम से देर रात तक शराबखोरी होती है। मूल आवंटी के मकान छोड़ने के बाद उन पर कब्जा कर असामाजिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे आसपास के रहवासी परेशान हैं।
नगर निगम को लाखों का नुकसान
अवैध कब्जाधारी सरकारी जल कनेक्शन का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन जलकर जमा नहीं हो रहा। कई मकानों के मूल आवंटी वर्षों पहले जा चुके हैं, जबकि मौजूदा कब्जाधारी बिना किसी भुगतान के पानी का उपयोग कर रहे हैं। इससे नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
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स्मार्ट सिटी परियोजना पर भी असर
नार्थ टीटी नगर का यह इलाका स्मार्ट सिटी परियोजना के दायरे में आता है। यहां कई शासकीय आवास जर्जर हो चुके हैं और पुनर्विकास के लिए इन्हें खाली कराने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कब्जाधारी मकान छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
क्या बोलीं संपदा तहसीलदार
संपदा तहसीलदार प्रीति श्रीवास्तव ने बताया कि भोपाल कलेक्टर के निर्देश पर शासकीय आवासों पर अवैध कब्जों की पहचान के लिए सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। जिन मकानों पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। सर्वे पूरा होते ही ऐसे सभी आवासों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोमवार से अभियान चलाकर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी और सरकारी संपत्तियों को कब्जामुक्त कराया जाएगा।
