{"_id":"693e95c0d4818036fa08d689","slug":"justice-agarwal-s-mantra-of-equality-children-of-politicians-and-officers-should-study-in-government-schools-2025-12-14","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"जस्टिस अग्रवाल का समानता मंत्र-नेता,अफसर के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें, सरकारी में अस्पताल में कराएं इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जस्टिस अग्रवाल का समानता मंत्र-नेता,अफसर के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें, सरकारी में अस्पताल में कराएं इलाज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 14 Dec 2025 05:03 PM IST
सार
सेवानिवृत्त जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने भोपाल में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की असमानताओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब तक नेताओं, जजों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, अधिकारी सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं कराएंगे, तब तक न तो व्यवस्था सुधरेगी और न ही देश में समान और सच्चा विकास संभव होगा।
विज्ञापन
सेवानिवृत्त जस्टिस सुधीर अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
राम मंदिर मामले का फैसला सुनाने वाले इलाहबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं, कानून और न्यायिक व्यवस्था में असमानता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रविवार को भोपाल में प्रेस क्लब के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और सबका साथ-सबका विकास' जैसे नारे तब तक सफल नहीं हो सकते, जब तक देश के हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिले। उन्होंने कहा कि जब तक बहुसंख्यक जनता के बच्चों को वही शिक्षा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, जैसी हम अपने बच्चों को देते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों का स्तर ऐसा होना चाहिए कि कलेक्टर और चपरासी का बच्चा एक ही स्कूल में, एक जैसी इज्जत और समान अवसर के साथ पढ़ सके। सरकारी स्कूल में पढ़ना गर्व की बात होनी चाहिए। लेकिन सचाई यह है कि शिक्षक ही अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाना चाहते।
Trending Videos
रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबंधित करते जस्टिस सुधीर अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
गरीबों के मुकदमे तय करने के लिए समय नहीं
जस्टिस अग्रवाल ने कानून व्यवस्था और न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अग्रवाल ने कहा था कि गरीबों के लिए न्याय आज भी मृगतृष्णा बना हुआ है। यहां अदालतें रात में भी खुलती हैं, लेकिन गरीबों के लिए नहीं। अग्रवाल ने कहा कि हाउस अरेस्ट की सुविधा उन्हीं लोगों को मिलती है, जिनके पास संसाधन हैं। गरीबों के मामले में ऐसा नहीं किया जाता कि उनकी झोपड़ी ही हाउस अरेस्ट मान ली जाए, बल्कि उन्हें तो जेल में डाल दिया जाता है। हमारे पास इतनी फुरसत नहीं है कि हम गरीबों के मुकदमों का समय पर निपटारा कर सकें।
ये भी पढ़ें- मोहन सरकार के दो साल: रीवा-सीधी-सिंगरौली-सतना बेल्ट में ऊर्जा, निवेश और सड़कों पर सरकार का फोकस
साढ़े पांच करोड़ मुकदमे लंबित
देश में आज करीब साढ़े पांच करोड़ मुकदमे लंबित हैं। यह सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर ये मुकदमे इतने अधिक क्यों लंबित हैं और इसका समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है? देश में साढ़े पांच करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं, जिनमें करीब 10 से 12 करोड़ परिवार उलझे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में थे, तो उन्होंने 14 साल में 1.40 लाख से अधिक मुकदमे निपटाए। उन्होंने बताया कि उनका मानना था कि भाषण नहीं काम करने से काम जल्दी होगा। उन्होंने कहा कि मुकदमे खत्म होंगे तो गरीबों को न्याय मिलेगा, समाज में शांति आएगी और विकास संभव होगा। इसी तरह कानून व्यवस्था में भी समानता जरूरी है।
ये भी पढ़ें- MP News: भोपाल-इंदौर हाईवे पर बनेगा भव्य विक्रमादित्य द्वार, सीएम ने फंदा का नाम हरिहर नगर करने की घोषणा
ऐसी व्यवस्था बने कि एफआईआर करने में भेदभाव ना हो
उन्होंने कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि कई बार संपन्न लोगों के मामलों में पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि आपने सुना होगा कि कभी-कभी किसी की भैंस गुम हो जाए तो पूरी पुलिस उसे ढूंढने में लग जाती है, लेकिन जब किसी गरीब का बच्चा, बेटी या बहू लापता हो जाती है या उसका अपहरण हो जाता है, तब पुलिस के पास एफआईआर तक लिखने की फुर्सत नहीं होती। कम से कम ऐसी व्यवस्था तो होनी चाहिए कि एफआईआर दर्ज करने में किसी भी तरह का भेदभाव न हो और सबके साथ समान व्यवहार किया जाए। विकास का रथ तभी आगे बढ़ सकता है, जब उसके दोनों पहिए बराबरी से चलें। विकास के सभी पहलुओं में एक साथ तरक्की होनी चाहिए। यदि हम किसी एक वर्ग या क्षेत्र को आगे बढ़ाकर यह मान लें कि विकास हो गया है, तो यह सोच गलत है। समानता के बिना विकास संभव नहीं है।
जस्टिस अग्रवाल ने कानून व्यवस्था और न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अग्रवाल ने कहा था कि गरीबों के लिए न्याय आज भी मृगतृष्णा बना हुआ है। यहां अदालतें रात में भी खुलती हैं, लेकिन गरीबों के लिए नहीं। अग्रवाल ने कहा कि हाउस अरेस्ट की सुविधा उन्हीं लोगों को मिलती है, जिनके पास संसाधन हैं। गरीबों के मामले में ऐसा नहीं किया जाता कि उनकी झोपड़ी ही हाउस अरेस्ट मान ली जाए, बल्कि उन्हें तो जेल में डाल दिया जाता है। हमारे पास इतनी फुरसत नहीं है कि हम गरीबों के मुकदमों का समय पर निपटारा कर सकें।
ये भी पढ़ें- मोहन सरकार के दो साल: रीवा-सीधी-सिंगरौली-सतना बेल्ट में ऊर्जा, निवेश और सड़कों पर सरकार का फोकस
साढ़े पांच करोड़ मुकदमे लंबित
देश में आज करीब साढ़े पांच करोड़ मुकदमे लंबित हैं। यह सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर ये मुकदमे इतने अधिक क्यों लंबित हैं और इसका समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है? देश में साढ़े पांच करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं, जिनमें करीब 10 से 12 करोड़ परिवार उलझे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में थे, तो उन्होंने 14 साल में 1.40 लाख से अधिक मुकदमे निपटाए। उन्होंने बताया कि उनका मानना था कि भाषण नहीं काम करने से काम जल्दी होगा। उन्होंने कहा कि मुकदमे खत्म होंगे तो गरीबों को न्याय मिलेगा, समाज में शांति आएगी और विकास संभव होगा। इसी तरह कानून व्यवस्था में भी समानता जरूरी है।
ये भी पढ़ें- MP News: भोपाल-इंदौर हाईवे पर बनेगा भव्य विक्रमादित्य द्वार, सीएम ने फंदा का नाम हरिहर नगर करने की घोषणा
ऐसी व्यवस्था बने कि एफआईआर करने में भेदभाव ना हो
उन्होंने कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि कई बार संपन्न लोगों के मामलों में पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि आपने सुना होगा कि कभी-कभी किसी की भैंस गुम हो जाए तो पूरी पुलिस उसे ढूंढने में लग जाती है, लेकिन जब किसी गरीब का बच्चा, बेटी या बहू लापता हो जाती है या उसका अपहरण हो जाता है, तब पुलिस के पास एफआईआर तक लिखने की फुर्सत नहीं होती। कम से कम ऐसी व्यवस्था तो होनी चाहिए कि एफआईआर दर्ज करने में किसी भी तरह का भेदभाव न हो और सबके साथ समान व्यवहार किया जाए। विकास का रथ तभी आगे बढ़ सकता है, जब उसके दोनों पहिए बराबरी से चलें। विकास के सभी पहलुओं में एक साथ तरक्की होनी चाहिए। यदि हम किसी एक वर्ग या क्षेत्र को आगे बढ़ाकर यह मान लें कि विकास हो गया है, तो यह सोच गलत है। समानता के बिना विकास संभव नहीं है।

कमेंट
कमेंट X