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दतिया का दंश: टिकट बदला, रणनीति बदली पर दतिया नहीं बचा सकी भाजपा, नरोत्तम के आंसुओं में बह गए आशुतोष के अरमान
Mon, 03 Aug 2026 04:47 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 03 Aug 2026 04:47 PM IST
सार
दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव 2026 में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में भाजपा ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट परिवर्तन के बाद स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की नाराजगी खुलकर सामने आई। वहीं, चुनाव प्रचार के दौरान डॉ. नरोत्तम मिश्रा एक सभा में भावुक भी हो गए थे। कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बाद भीतरघात को भाजपा की हार का कारण माना जा रहा है।
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दतिया में मंच पर भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6 हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम भाजपा के लिए उसके सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ में लगा बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके साथ ही भाजपा की चुनावी रणनीति, स्थानीय संगठन और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस उपचुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक फैसला भाजपा का प्रत्याशी बदलना माना जा रहा है। पार्टी ने कई बार दतिया से जीत दर्ज करने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। टिकट बदलने के फैसले को स्थानीय स्तर पर लेकर कई तरह की चर्चाएं रहीं। चुनाव प्रचार के दौरान भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और भीतरघात की अटकलें लगातार राजनीतिक गलियारों में सुनाई देती रहीं। अब भाजपा के दतिया के कार्यकर्ताओं की नाराजगी को हार की बड़ी वजह माना जा रहा हैं।
ये भी पढ़ें- Datia Bye Election Result: मतगणना के बीच PCC कार्यालय में बंटने लगी मिठाई, कांग्रेस प्रत्याशी आगे; जश्न शुरू
शहरों में वोट प्रतिशत कम रहा
भाजपा का वोटर शहरों में ज्यादा होता है। दतिया चुनाव में ग्रामीण इलाको से कम वोटिंग शहरों में हुई। ग्रामीण इलाकों के कई मतदान केंद्रों पर 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान दर्ज हुआ। सबसे अधिक बूथ क्रमांक 62 पर 92.19 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके उलट दतिया शहर के कई केंद्रों पर मतदान 55 प्रतिशत से भी कम रहा। बूथ क्रमांक 110 पर केवल 43.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र का सबसे कम मतदान प्रतिशत रहा। हालांकि, तीसरे राउंड से ही कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बढ़त बनाना शुरू कर दी थी।
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ये भी पढ़ें- दतिया उपचुनाव परिणाम: 15 राउंड की गिनती में नौ राउंड की मतगणना पूरी, कब आगे पीछे हुई भाजपा-कांग्रेस; देखें
टिकट घोषित होने से पहले ही शुरू कर दी थी तैयारी
2023 विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी थी। टिकट घोषित होने से पहले ही उन्होंने गांव-गांव और वार्ड-वार्ड संपर्क अभियान शुरू कर दिया था। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने स्वीकार किया कि पिछली बार उनसे कुछ कमियां रह गई थीं और जनता से एक और अवसर देने की अपील की थी। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। नरोत्तम दतिया में 2008 से 2018 तक लगातार चुनाव जीतते आए। वह शिवराज सरकार में नंबर दो कहलाते थे। उनका टिकट कटने के बावजूद वह चुनाव में प्रचार करने उतरे और लगातार संभाएं कीें।
ये भी पढ़ें- Datia Bye Election Result Live: जीत की ओर कांग्रेस, 12वें राउंड में 12607 वोटों की बढ़त; भाजपा फिर पिछड़ी
मंच से भावुक वीडियो से बना भावनात्मक माहौल
टिकट कटने के बाद दतिया में भाजपा की पहली बड़ी संभा में नरोत्तम मिल ने आशुतोष तिवारी को जिताने घर-घर जाने का ऐलान किया। साथ ही अंत में वह भावुक हो गए। जानकारों का कहना है कि मंच पर उनके आसूंओं ने उनके समर्थकों के बीच भावनात्मक माहौल बना दिया। इससे पहले भाजपा में पहली बार टिकट कटने पर इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और जिला अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए। जानकारों का कहना है कि इस असंतोष के कारण कार्यकर्ताओं ने प्रचार में रूचि नहीं दिखाई । इसके अलावा यह भी चर्चा है कि कई जगह पार्टी के खिलाफ काम किया।
ये भी पढ़ें- दतिया का फैसला आज: गांवों का जोश जीतेगा या शहर की खामोशी पलटेगी पूरा खेल? हेमंत-जीतू की प्रतिष्ठा भी दांव पर
राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए अलार्म: प्रभु पटैरिया
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया ने कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक अलार्म है। उनके अनुसार, दतिया जैसे क्षेत्र में जनाधार वाले नेता की उपेक्षा कर सर्वे के आधार पर टिकट बदलने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी केवल सर्वे के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया गया, तो ऐसे परिणाम दोहराए जा सकते हैं।
ये भी पढ़ें- दतिया का जनादेश आज: नरोत्तम की साख, भाजपा की रणनीति या कांग्रेस की वापसी...किसके पक्ष में जाएगा फैसला?
कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली जीत
दतिया की जीत कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली इस जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। वहीं, भाजपा के लिए यह परिणाम आगामी चुनावों से पहले संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का संकेत माना जा रहा है।
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शहरों में वोट प्रतिशत कम रहा
भाजपा का वोटर शहरों में ज्यादा होता है। दतिया चुनाव में ग्रामीण इलाको से कम वोटिंग शहरों में हुई। ग्रामीण इलाकों के कई मतदान केंद्रों पर 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान दर्ज हुआ। सबसे अधिक बूथ क्रमांक 62 पर 92.19 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके उलट दतिया शहर के कई केंद्रों पर मतदान 55 प्रतिशत से भी कम रहा। बूथ क्रमांक 110 पर केवल 43.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र का सबसे कम मतदान प्रतिशत रहा। हालांकि, तीसरे राउंड से ही कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बढ़त बनाना शुरू कर दी थी।
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टिकट घोषित होने से पहले ही शुरू कर दी थी तैयारी
2023 विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में अपनी सक्रियता काफी बढ़ा दी थी। टिकट घोषित होने से पहले ही उन्होंने गांव-गांव और वार्ड-वार्ड संपर्क अभियान शुरू कर दिया था। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने स्वीकार किया कि पिछली बार उनसे कुछ कमियां रह गई थीं और जनता से एक और अवसर देने की अपील की थी। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। नरोत्तम दतिया में 2008 से 2018 तक लगातार चुनाव जीतते आए। वह शिवराज सरकार में नंबर दो कहलाते थे। उनका टिकट कटने के बावजूद वह चुनाव में प्रचार करने उतरे और लगातार संभाएं कीें।
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मंच से भावुक वीडियो से बना भावनात्मक माहौल
टिकट कटने के बाद दतिया में भाजपा की पहली बड़ी संभा में नरोत्तम मिल ने आशुतोष तिवारी को जिताने घर-घर जाने का ऐलान किया। साथ ही अंत में वह भावुक हो गए। जानकारों का कहना है कि मंच पर उनके आसूंओं ने उनके समर्थकों के बीच भावनात्मक माहौल बना दिया। इससे पहले भाजपा में पहली बार टिकट कटने पर इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और जिला अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए। जानकारों का कहना है कि इस असंतोष के कारण कार्यकर्ताओं ने प्रचार में रूचि नहीं दिखाई । इसके अलावा यह भी चर्चा है कि कई जगह पार्टी के खिलाफ काम किया।
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राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए अलार्म: प्रभु पटैरिया
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया ने कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक अलार्म है। उनके अनुसार, दतिया जैसे क्षेत्र में जनाधार वाले नेता की उपेक्षा कर सर्वे के आधार पर टिकट बदलने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी केवल सर्वे के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया गया, तो ऐसे परिणाम दोहराए जा सकते हैं।
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कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली जीत
दतिया की जीत कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली इस जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। वहीं, भाजपा के लिए यह परिणाम आगामी चुनावों से पहले संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा का संकेत माना जा रहा है।
