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MP: सड़कों की डिजिटल निगरानी, रोड नेटवर्क का मास्टर प्लान तैयार, मंत्री बोले- 90 डिग्री ब्रिज में ढलान की खामी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 25 Feb 2026 10:28 PM IST
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सार
विधानसभा में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगो पर चर्चा हुई। सरकार ने डिजिटल मॉनिटरिंग और मास्टर प्लान का दावा किया, तो विपक्ष ने सड़क गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठाए।
मध्य प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विधानसभा में लोक निर्माण विभाग की 13 हजार करोड़ की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपने-अपने क्षेत्रों के प्रति जवाबदेही है, इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को व्यवस्थित और वैज्ञानिक आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण को अब तकनीक, पारदर्शिता और सख्त गुणवत्ता मानकों से जोड़ा जा रहा है। सड़कों पर डिजिटल निगरानी की जा रही है और रोड नेटवर्क का मास्टरप्लान तैयार कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भोपाल का 90 डिग्री का ब्रिज 90 डिग्री का नहीं बल्कि 119 डिग्री का है। इसमें स्लोप ओर कर्व सही नहीं थे। इसलिए अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। विभाग ने कार्यप्रणाली में सुधार और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय, राज्य, जिला और ग्राम मार्गों का वर्गीकरण तो था, लेकिन उनके मापदंड स्पष्ट नहीं थे। अब ट्रैफिक घनत्व और उपयोगिता के आधार पर सड़कों का युक्तिकरण किया जाएगा। भास्कराचार्य संस्थान के सहयोग से विशेष डिजिटल सर्वे अभियान चलाया गया है। लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल एप के माध्यम से 71 हजार किमी से अधिक सड़कों में से बड़ी लंबाई का डिजिटल सर्वे, 2,975 भवनों और 1,426 पुलों का जीआईएस सर्वे पूरा किया जा चुका है। इससे विभाग के पास परिसंपत्तियों का प्रमाणिक डिजिटल डेटा उपलब्ध है।
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रोड नेटवर्क मास्टर प्लान
जीआईएस डेटा के आधार पर अब परियोजना-दर-परियोजना दृष्टिकोण की जगह समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसमें शहरों के बायपास, औद्योगिक और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी तथा जिला मुख्यालयों से बेहतर संपर्क की जरूरतें चिन्हित की गई हैं। एरियल दूरी और वास्तविक सड़क दूरी के तुलनात्मक विश्लेषण से 6 नए ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट तय किए गए हैं, जिससे यात्रा समय घटेगा और नए विकास क्षेत्र उभरेंगे।
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जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल
बजट प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया गया है। पीएम गति-शक्ति प्लेटफॉर्म पर जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल विकसित किया गया है। अब हर प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर मैप कर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि सड़क पहले से बजट में है या नहीं। इससे डुप्लीकेशन खत्म होगा और प्राथमिकताओं के आधार पर संसाधनों का उपयोग होगा।
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चार अभियंता निलंबित, 105 को नोटिस
गुणवत्ता निगरानी के लिए लोकपथ 2.0 लागू किया गया है। इसमें ब्लैक स्पॉट से 500 मीटर पहले अलर्ट, क्यूआर कोड आधारित सैंपलिंग और डिजिटल लैब ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं हैं। पिछले 13 महीनों में 875 निरीक्षण किए गए, चार अभियंता निलंबित हुए, 105 को नोटिस जारी हुए और 25 ठेकेदार ब्लैकलिस्ट किए गए। इंजीनियरों के कौशल विकास के लिए इंजीनियरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की घोषणा भी की गई है।
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बिटुमिनकी जीपीएस आधारित ई-लॉकिंग से निगरानी
सड़क निर्माण में बिटुमिन यानी डामर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सामग्री केवल सरकारी रिफाइनरियों से लेने का निर्णय हुआ है। जीपीएस आधारित ई-लॉकिंग और जीएसटी सत्यापन से निगरानी की जाएगी। सड़क रखरखाव के लिए पीबीएमसी और एसटीएमसी मॉडल लागू कर भुगतान को सड़क की स्थिति से जोड़ा गया है। पर्यावरणीय संतुलन के तहत 506 से अधिक ‘कल्याण सरोवर’ बनाए गए हैं और सड़क निर्माण के साथ ग्राउंड वाटर रिचार्ज संरचनाएं अनिवार्य की जा रही हैं।
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दो वर्षों में 11,632 किमी सड़कों का निर्माण
प्रदेश में कुल 77,268 किमी सड़क नेटवर्क है। पिछले दो वर्षों में 11,632 किमी सड़कों का निर्माण/मजबूतीकरण, 5,741 किमी नवीनीकरण और 190 पुलों का निर्माण हुआ है। 16,954 किमी सड़क और 531 पुल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। 6 एक्सप्रेसवे, प्रमुख शहरों में रिंग रोड, 8,000 करोड़ रुपये का टाइगर कॉरिडोर और सिंहस्थ कार्य भी इस नई इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का हिस्सा हैं।
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बजट की कांग्रेस के समय से तुलना करना सही नहीं
कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह ने सड़क सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर विस में गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने बजट आकार की कांग्रेस सरकार के समय 2003 से तुलना को भ्रामक बताते हुए कहा कि आर्थिक उदारीकरण, टोल रोड, पीपीपी और बाहरी सहायता के कारण बजट बढ़ा है, इसे उपलब्धि का पैमाना न माना जाए। उन्होंने भोपाल-जबलपुर फ्लाईओवर, ग्वालियर और जबलपुर की घटनाओं का जिक्र कर गुणवत्ता पर सवाल उठाए और स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट, ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग व अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
सड़क गुणवत्ता और जवाबदेही तय होना चाहिए
बिछिया से कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने कहा कि बजट में विकास के बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर सड़कों की हालत खराब है। बरसात में सड़कें गड्ढों में बदल जाती हैं। उन्होंने पूछा कि पिछली घोषणाओं और अधूरे पुलों का क्या हुआ तथा कितने ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई। जबलपुर–भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर आरओबी गिरने का जिक्र करते हुए उन्होंने गुणवत्ता और जवाबदेही तय करने की मांग की। पट्टा ने कहा, जनता को घोषणाएं नहीं, मजबूत और टिकाऊ सड़कें चाहिए।
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रोड नेटवर्क मास्टर प्लान
जीआईएस डेटा के आधार पर अब परियोजना-दर-परियोजना दृष्टिकोण की जगह समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसमें शहरों के बायपास, औद्योगिक और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी तथा जिला मुख्यालयों से बेहतर संपर्क की जरूरतें चिन्हित की गई हैं। एरियल दूरी और वास्तविक सड़क दूरी के तुलनात्मक विश्लेषण से 6 नए ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट तय किए गए हैं, जिससे यात्रा समय घटेगा और नए विकास क्षेत्र उभरेंगे।
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जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल
बजट प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया गया है। पीएम गति-शक्ति प्लेटफॉर्म पर जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल विकसित किया गया है। अब हर प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर मैप कर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि सड़क पहले से बजट में है या नहीं। इससे डुप्लीकेशन खत्म होगा और प्राथमिकताओं के आधार पर संसाधनों का उपयोग होगा।
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चार अभियंता निलंबित, 105 को नोटिस
गुणवत्ता निगरानी के लिए लोकपथ 2.0 लागू किया गया है। इसमें ब्लैक स्पॉट से 500 मीटर पहले अलर्ट, क्यूआर कोड आधारित सैंपलिंग और डिजिटल लैब ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं हैं। पिछले 13 महीनों में 875 निरीक्षण किए गए, चार अभियंता निलंबित हुए, 105 को नोटिस जारी हुए और 25 ठेकेदार ब्लैकलिस्ट किए गए। इंजीनियरों के कौशल विकास के लिए इंजीनियरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की घोषणा भी की गई है।
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बिटुमिनकी जीपीएस आधारित ई-लॉकिंग से निगरानी
सड़क निर्माण में बिटुमिन यानी डामर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सामग्री केवल सरकारी रिफाइनरियों से लेने का निर्णय हुआ है। जीपीएस आधारित ई-लॉकिंग और जीएसटी सत्यापन से निगरानी की जाएगी। सड़क रखरखाव के लिए पीबीएमसी और एसटीएमसी मॉडल लागू कर भुगतान को सड़क की स्थिति से जोड़ा गया है। पर्यावरणीय संतुलन के तहत 506 से अधिक ‘कल्याण सरोवर’ बनाए गए हैं और सड़क निर्माण के साथ ग्राउंड वाटर रिचार्ज संरचनाएं अनिवार्य की जा रही हैं।
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दो वर्षों में 11,632 किमी सड़कों का निर्माण
प्रदेश में कुल 77,268 किमी सड़क नेटवर्क है। पिछले दो वर्षों में 11,632 किमी सड़कों का निर्माण/मजबूतीकरण, 5,741 किमी नवीनीकरण और 190 पुलों का निर्माण हुआ है। 16,954 किमी सड़क और 531 पुल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। 6 एक्सप्रेसवे, प्रमुख शहरों में रिंग रोड, 8,000 करोड़ रुपये का टाइगर कॉरिडोर और सिंहस्थ कार्य भी इस नई इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति का हिस्सा हैं।
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बजट की कांग्रेस के समय से तुलना करना सही नहीं
कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह ने सड़क सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर विस में गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने बजट आकार की कांग्रेस सरकार के समय 2003 से तुलना को भ्रामक बताते हुए कहा कि आर्थिक उदारीकरण, टोल रोड, पीपीपी और बाहरी सहायता के कारण बजट बढ़ा है, इसे उपलब्धि का पैमाना न माना जाए। उन्होंने भोपाल-जबलपुर फ्लाईओवर, ग्वालियर और जबलपुर की घटनाओं का जिक्र कर गुणवत्ता पर सवाल उठाए और स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट, ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग व अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
सड़क गुणवत्ता और जवाबदेही तय होना चाहिए
बिछिया से कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने कहा कि बजट में विकास के बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर सड़कों की हालत खराब है। बरसात में सड़कें गड्ढों में बदल जाती हैं। उन्होंने पूछा कि पिछली घोषणाओं और अधूरे पुलों का क्या हुआ तथा कितने ठेकेदारों पर कार्रवाई हुई। जबलपुर–भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर आरओबी गिरने का जिक्र करते हुए उन्होंने गुणवत्ता और जवाबदेही तय करने की मांग की। पट्टा ने कहा, जनता को घोषणाएं नहीं, मजबूत और टिकाऊ सड़कें चाहिए।

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