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सत्ता और सियासत: आखिर तक चली राजौरा की ताजपोशी की तैयारी, दिल्ली की पहली पसंद अनुराग जैन ने मारी बाजी

Arvind Tiwari अरविंद तिवारी
Updated Mon, 07 Oct 2024 09:41 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश में लंबे समय से मुख्य सचिव के चेहरे पर जो कयास चल रहे थे, उनका पटाक्षेप भी हो गया। 1989 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन को मुख्य सचिव बना दिया गया। चर्चा में डॉ. राजेश राजौरा को इस पद का दावेदार माना जा रहा था।

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सियासत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की चलती तो मध्यप्रदेश के नए मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा होते, पर ऐसा हो नहीं पाया। प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक पद पर मुख्यमंत्री की पहली पसंद डॉ. राजौरा ही थे। दोनों के बीच बहुत फाइन ट्यूनिंग है और जिस तरह के संकेत मिल रहे थे, उससे प्रशासनिक हल्कों में यह मान लिया गया था कि डॉ. राजौरा ही नए प्रशासनिक सदर होंगे।

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30 सितंबर यानि वीरा राणा के विस्तारित कार्यकाल के अंतिम दिन भी सुबह से ही डॉ. राजौरा की ताजपोशी के संकेत मिलने लगे थे, लेकिन दोपहर में सारे पूर्वानुमान ध्वस्त हो गए और ऐनवक्त पर हुए वीटो के कारण दिल्ली की पहली पसंद माने जा रहे अनुराग जैन आखिरकार मुख्य सचिव बन ही गए। चौंकाने वाला तो यह है कि उलटफेर होते ही सबसे पहले यह खबर सामने आई कि मुख्य सचिव पद के लिए डॉ. यादव की पहली पसंद अनुराग जैन ही थे। 
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दिन ब दिन मजबूत होता जा रहा है उज्जैन कनेक्शन
प्रदेश में इन दिनों 'उज्जैन कनेक्शन' की बड़ी चर्चा है, खासकर पुलिस महकमें में। कहा यह जा रहा है कि जिसका उज्जैन कनेक्शन मजबूत है, वही मलाईदार पद पा सकता है। हाल ही में हुए पुलिस महकमें के कुछ बड़े बदलाव में इसकी झलक भी देखने को मिली है। प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर के सबसे मलाईदार माने जाने वाले कुछ थानों पर पदस्थापना में भी उज्जैन कनेक्शन सब पर भारी पड़ा। उज्जैन की इसी ताकत से वाकिफ होने के बाद प्रदेश के कई शीर्ष नौकरशाहों ने भी अब अपना रुख उज्जैन की ओर कर लिया है। बस, उन्हें भी तलाश है ऐसे ही किसी मजबूत कनेक्शन की। वैसे प्रदेश के कई कारोबारी भी अपनी किस्मत चमकाने के लिए इन दिनों उज्जैन कनेक्शन के भरोसे ही हैं। 

बनते-बनते बिगड़ने लगे हैं समीकरण
डॉ. मोहन यादव जब मध्यप्रदेश के मख्यमंत्री बने थे, तब यह दावा किया गया था कि इंदौर में तो तूती कैलाश विजयवर्गीय की ही बोलेगी। शुरू-शुरू में ऐसा लगा भी, लेकिन अब ऐसा दिख नहीं रहा है। इंदौर का प्रभारी बनने के बाद मुख्यमंत्री जिस अंदाज में हैं, वह सबके लिए चौकाने वाला है। उनके इसी अंदाज से वाकिफ होने के बाद विजयवर्गीय अब इंदौर के मामले में सोच-समझकर ही कोई कदम उठाते हैं। इंदौर के मुद्दों पर अब उनकी वह सक्रियता नजर नहीं आती, जो सरकार बनने के पहले तीन-चार महीनों में थी। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में मंच पर भी उनका अंदाज बदला-बदला-सा रहता है। राजनीतिक पंडित कहने लगे हैं कि आगे-आगे देखिए होता है क्या।

कमलनाथ के यहां बढ़ता मजमा और परेशान जीतू
कमलनाथ भले ही भोपाल कम आ रहे हों, लेकिन जब भी आते हैं मजमा जम ही जाता है। प्रदेश के कोने-कोने से उनके समर्थक जिनमें कांग्रेस के बड़े नेता से लेकर छोटे कार्यकर्ता तक शामिल रहते हैं, उनके आने की सूचना पर भोपाल पहुंच जाते हैं। कमलनाथ भी अब बदले-बदले से हैं। अपने को लेकर बनी सभी धारणाओं को तोड़ते हुए वे कांग्रेसियों को पूरा समय देने लगे हैं और उनको यह अहसास कराने में भी पीछे नहीं रहते हैं कि मुझे आपकी पूरी चिंता है। कमलनाथ की इस सक्रियता ने जीतू पटवारी की परेशानी को जरूर बढ़ा दिया है। पांव जमने से पहले ही उखड़ने जैसी स्थिति है इन दिनों उनकी। 

मजबूत सीएमओ के सहारे सख्त मॉनिटरिंग
मध्यप्रदेश में इन दिनों मुख्यमंत्री सचिवालय जितना मजबूत है, उतना पहले कभी नहीं रहा। डॉ. राजेश राजौरा जैसे अनुभवी अफसर वहां अपर मुख्य सचिव की भूमिका में हैं। वहीं, कामकाज की अच्छी समझ रखने वाले संजय शुक्ला प्रमुख सचिव की भूमिका में हैं। नौकरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच अच्छे तालमेल के लिए ख्यात राघवेंद्र सिंह भी यहां अहम भूमिका में हैं। संघ के तीन दिग्गज लोकेश शर्मा, मनीष पांडे और लक्ष्मणसिंह मरकाम का रोल जनता से जुड़े सरकार के कामकाज में अहम है। इसी मजबूत सीएमओ के सहारे मंत्रियों के साथ ही आला नौकरशाहों के काम की भी सख्त मॉनिटरिंग हो रही है। अच्छी बात यह है कि परफार्मेंस ओरिएंटेड वर्किंग में भरोसा रखने वाले अनुराग जैन अब प्रदेश के मुख्य सचिव की भूमिका में हैं। मैदान में असर जल्दी ही देखने को मिलेगा। 

चलते-चलते
सौम्य और शालीन पर अपने मातहतों के कामकाज पर पैनी नजर रखने वाले अनुराग जैन के मध्यप्रदेश का मुख्य सचिव बनने के बाद सबसे ज्यादा परेशान वे नौकरशाह हैं, जो खुद को एक्सपर्ट मानते हुए कागजों पर अच्छी प्लानिंग बनाने और आई-केचिंग प्रजेंटेशन के माध्यम से वाहवाही लूटने के लिए कुख्यात हैं। 

पुछल्ला
कमलनाथ के साथ साये की तरह रहने वाले मुकेश जाट की रवानगी के बाद जिस तरह की कहानियां 9, श्यामला हिल्स से बाहर आ रही है, उसने सबसे ज्यादा परेशान कमलनाथ को ही कर रखा है। कहा तो यह जा रहा है कि यह तो एक ट्रेलर भर है। पूरी पिक्चर अभी आना बाकी है। 

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