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MP News: भोपाल नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप में लोकायुक्त की कार्रवाई, फर्जी बिलिंग मामले में जांच तेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 15 Mar 2026 05:06 PM IST
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सार
भोपाल नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप में कथित फर्जी बिलिंग और वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में लोकायुक्त ने छापेमारी कर जांच शुरू की है। रविवार को फिर लोकायुक्त ने निगम के कार्यकाल पर जांच शुरू की। इस मामले में दो दिन पहले अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है।
लोकायुक्त की टीम रविवार को भी निगम कार्यालय पहुंची
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल नगर निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने रविवार सुबह सेंट्रल वर्कशॉप पर छापेमारी की। माता मंदिर क्षेत्र के पास स्थित इस कार्यालय में सुबह करीब 9 बजे टीम पहुंची और दस्तावेजों की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है। नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान किए जाने की शिकायत सामने आई थी। इसी मामले में दो दिन पहले लोकायुक्त ने अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और जालसाजी से जुड़े प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की थी। प्रारंभिक जांच में सेंट्रल वर्कशॉप से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन संदिग्ध पाए जाने के बाद यहां छापा डाला गया।
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लोकायुक्त टीम इससे पहले शुक्रवार को फतेहगढ़ स्थित निगम के डेटा सेंटर में भी कार्रवाई कर चुकी है, जहां से लगभग दस वर्षों से संबंधित दस्तावेज और सर्वर का डिजिटल डेटा जब्त किया गया था। अब इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर सेंट्रल वर्कशॉप के कामकाज और भुगतान प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है।
शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य कार्यों के नाम पर ई-बिल तैयार कराए गए और कई मामलों में वास्तविक काम हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ बिल ऐसे विभागों के नाम से बनाए गए, जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।लोकायुक्त के अनुसार जब्त डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच जारी है। इसके आधार पर आगे अन्य कर्मचारियों और संबंधित फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
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लोकायुक्त टीम इससे पहले शुक्रवार को फतेहगढ़ स्थित निगम के डेटा सेंटर में भी कार्रवाई कर चुकी है, जहां से लगभग दस वर्षों से संबंधित दस्तावेज और सर्वर का डिजिटल डेटा जब्त किया गया था। अब इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर सेंट्रल वर्कशॉप के कामकाज और भुगतान प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है।
शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य कार्यों के नाम पर ई-बिल तैयार कराए गए और कई मामलों में वास्तविक काम हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ बिल ऐसे विभागों के नाम से बनाए गए, जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी।लोकायुक्त के अनुसार जब्त डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच जारी है। इसके आधार पर आगे अन्य कर्मचारियों और संबंधित फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
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