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MP News: एमपी लोकायुक्त को आरटीआई से छूट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 20 May 2026 10:32 AM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन को आरटीआई से दी गई छूट पर सख्त सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि लोकायुक्त को किस कानूनी आधार पर सूचना के अधिकार कानून से बाहर रखा गया।

MP News: Supreme Court strict on exemption of MP Lokayukta from RTI, seeks reply from the government
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश लोकायुक्त संगठन को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून से दी गई छूट पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर किस आधार पर लोकायुक्त संगठन को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या लोकायुक्त कोई खुफिया या सुरक्षा एजेंसी है, जिसे कानून के तहत छूट दी जा सके। मामले की सुनवाई जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ऐसा कोई ठोस रिकॉर्ड या तथ्य पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि लोकायुक्त संगठन खुफिया एजेंसी की तरह काम करता है। 
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कोर्ट ने कहा कि 2011 में जारी वह अधिसूचना, जिसके जरिए लोकायुक्त को आरटीआई से छूट दी गई थी, पहली नजर में कानून की भावना के खिलाफ दिखाई देती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि RTI कानून का उद्देश्य सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को 20 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो 2011 की अधिसूचना रद्द की जा सकती है। 
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इससे पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भी लोकायुक्त संगठन को आरटीआई के तहत जानकारी देने और पांच हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दे चुका है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार के वकीलों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि कई मामलों में सरकारी वकील अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रख पा रहे हैं। कोर्ट ने सरकारी वकीलों के पैनल की समीक्षा करने के संकेत भी दिए हैं।

 
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