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भोपाल में ट्रैफिक स्पीकरों पर NGT सख्त: तेज आवाज वाले पीए सिस्टम हटाने के आदेश, पुलिस-प्रशासन से मांगा जवाब

Fri, 22 May 2026 05:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 22 May 2026 05:19 PM IST
सार

भोपाल में ट्रैफिक चौराहों पर लगे हाई-वॉल्यूम पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से बढ़ते ध्वनि प्रदूषण पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। अधिकरण ने प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तेज आवाज वाले सिस्टम बंद करने, नॉइज सर्वे कराने और साइलेंस जोन में विशेष कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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NGT Cracks Down on Traffic Loudspeakers in Bhopal: Orders Removal of High-Volume PA Systems; Seeks Response fr
एनजीटी भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल शहर के ट्रैफिक चौराहों पर लगे हाई-वॉल्यूम पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम अब कानूनी घेरे में आ गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को गंभीर मानते हुए प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह मामला पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ट्रैफिक पुलिस और अन्य विभागों द्वारा शहर के कई चौराहों पर लगाए गए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम अत्यधिक तेज आवाज में लगातार ट्रैफिक संदेश और चेतावनियां प्रसारित कर रहे हैं, जिससे नागरिकों की मानसिक शांति और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
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ट्रैफिक मैनेजमेंट के नाम पर बढ़ रहा शोर
याचिका में कहा गया कि ट्रैफिक प्रबंधन के लिए लगाए गए ये सिस्टम अब ध्वनि प्रदूषण का बड़ा कारण बन चुके हैं। दिनभर चलने वाले रिकॉर्डेड संदेशों और लगातार बजती चेतावनियों से लोगों को चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद में बाधा और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा असर अस्पतालों के मरीजों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, न्यायालय परिसरों में काम करने वाले लोगों और रिहायशी इलाकों में रहने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है। याचिका में यह भी कहा गया कि कई सिस्टम साइलेंस ज़ोन और आवासीय क्षेत्रों के पास संचालित किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन है।
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एनजीटी ने माना- ध्वनि प्रदूषण गंभीर खतरा
न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण केवल असुविधा का विषय नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। अधिकरण ने माना कि लगातार तेज ध्वनि वाले सिस्टम मानसिक तनाव, एकाग्रता में कमी, नींद में व्यवधान और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का कारण बन रहे हैं। आदेश में कहा गया कि अत्यधिक शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित होना, रक्तचाप बढ़ना, हृदय रोग, मानसिक तनाव और बच्चों की सीखने की क्षमता पर असर जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को ध्वनि प्रदूषण फैलाने का मौलिक अधिकार नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीवन जीने का अधिकार देता है।

बिना अनुमति वाले सिस्टम बंद करने के निर्देश
अधिकरण ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति चल रहे या तय डेसिबल सीमा से ज्यादा आवाज पैदा करने वाले सभी ट्रैफिक पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम तत्काल बंद, डिस्कनेक्ट या नियंत्रित किए जाएं। खास तौर पर अस्पताल, स्कूल, कोर्ट और साइलेंस ज़ोन के 100 मीटर दायरे में लगे सिस्टमों पर कार्रवाई करने को कहा गया है।

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भोपाल में होगी नॉइज मैपिंग
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भोपाल के ट्रैफिक चौराहों और प्रभावित क्षेत्रों में डेसिबल जांच, एम्बियंट नॉइज मॉनिटरिंग और ध्वनिक सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करनी होगी कि किन इलाकों में ध्वनि प्रदूषण तय सीमा से ज्यादा है। इसके साथ ही एनजीटी ने ट्रैफिक पीए सिस्टम के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने को भी कहा है। इसमें ध्वनि सीमा, संचालन समय, रियल टाइम मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल होगी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ट्रैफिक चौराहों पर लगातार लाउडस्पीकर चलाना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि किसी संस्था को अपनी आवाज कृत्रिम रूप से बढ़ाकर आम नागरिकों पर थोपने का अधिकार नहीं है।

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प्रशासन और पुलिस को नोटिस
एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सेंट्रल ज़ोन बेंच में होगी। इस आदेश को भोपाल में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ बड़ा पर्यावरणीय हस्तक्षेप माना जा रहा है।

 
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