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भोपाल में लेंसकार्ट के खिलाफ विरोध: तिलक-कलावा पर बवाल, सड़कों पर उतरा हिंदू संगठन, बहिष्कार की चेतावनी

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 21 Apr 2026 03:17 PM IST
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सार

भोपाल में लेंसकार्ट के कथित ड्रेस कोड को लेकर विवाद बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल डॉक्यूमेंट के बाद हिंदू संगठनों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन किया और बहिष्कार की चेतावनी दी। वहीं कंपनी ने सभी धर्मों के सम्मान की बात कहते हुए किसी भी तरह की रोक से इनकार किया, लेकिन विरोध अभी भी जारी है।

Protest Against Lenskart in Bhopal: Uproar Over Tilak and Kalava; Hindu Organization Takes to the Streets, War
हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लेंसकार्ट के कथित ड्रेस कोड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़कों पर उतर आया है। भोपाल के न्यू मार्केट रोशनपुरा इलाके में हिंदू संगठनों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित पॉलिसी दस्तावेज के बाद यह मामला तेजी से तूल पकड़ता गया। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने शोरूम के बाहर जुटकर नारेबाजी की। इस दौरान कर्मचारियों को तिलक लगाया गया और मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों का सम्मान हर हाल में होना चाहिए।
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बहिष्कार की चेतावनी, सख्त रुख
समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कंपनी के खिलाफ बहिष्कार का आह्वान किया। उनका कहना है कि अगर तिलक, बिंदी और कलावा जैसे प्रतीकों पर रोक लगाने की कोशिश की गई, तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कॉरपोरेट कंपनियों को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की चेतावनी दी।
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संत समाज भी विरोध में उतरा
मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिल आनंद ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि महिलाओं के सिंदूर और कलावा पर रोक की बात सामने आना परंपराओं के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


वायरल डॉक्यूमेंट से बढ़ा विवाद
पूरा विवाद एक कथित ग्रूमिंग गाइड के वायरल होने से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि बिंदी, तिलक और कलावा पर रोक है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी कथित भेदभाव को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। इस मुद्दे को तब और हवा मिली जब शेफाली वैद्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्क्रीनशॉट साझा कर सवाल उठाए। इसके बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया।

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कंपनी की सफाई, लेकिन विवाद बरकरार
विवाद बढ़ने पर कंपनी के CEO पीयूष बंसल ने कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है और कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी आजादी है। हालांकि, विरोध कर रहे संगठन इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

 
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