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Padma Shri Award 2026: MP की तीन विभूतियों को पद्मश्री, नागर, रैकवार और पंत होंगे राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 25 Jan 2026 05:32 PM IST
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सार

गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों में मध्य प्रदेश के तीन व्यक्तित्वों को पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। पर्यावरण, कला और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मोहन नागर, भगवानदास रैकवार और कैलाश चंद्र पंत का चयन किया गया है।

Republic Day: Three dignitaries from MP to be honoured with Padma Shri, Nagar, Raikwar and Pant to be conferre
बैतूल के मोहन नागर को मिलेगा पद्यश्री सम्मान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गणतंत्र दिवस-2026 की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की सूची घोषित की है, जिसमें 45 नामों का चयन 'गुमनाम हीरोज’ (Unsung Heroes) के रूप में किया गया है। इस वर्ष मध्य प्रदेश की तीन प्रतिष्ठित विभूतियों मोहन नागर, भगवानदास रैकवार और कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। ये पर्यावरण,  कला और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए चुने गए हैं।
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बैतूल के नागर पर्यावरण आंदोलन की सशक्त आवाज
प्रदेश के सक्रिय और जमीनी स्तर पर कार्यरत पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को वर्ष 2026 के पद्मश्री सम्मान से नवाज़े जाने की घोषणा ने प्रदेश को गौरवान्वित किया है। जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और समग्र पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान ने न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मजबूती दी है, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। 23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर, स्व.  भवरलाल नागर और स्व. गुलाबदेवी नागर के सुपुत्र हैं। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे बैतूल स्थित भारत भारती आवासीय विद्यालय परिसर में निवासरत हैं।  

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सोना घाटी में वर्षा जल संचयन किया
मोहन नागर ने विशेष रूप से बैतूल जिले की सोना घाटी में वर्षाजल संचयन और जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से प्राकृतिक जल चक्र को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। सूखते जल स्रोतों, गिरते भू-जल स्तर और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में उनके प्रयासों ने जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ खेती और आजीविका को भी संबल दिया है। उनके कार्यों का प्रभाव यह रहा कि स्थानीय स्तर पर लोग स्वयं जल संरक्षण की पहल से जुड़ने लगे। नागर द्वारा प्रारंभ किया गया ‘गंगा अवतरण अभियान’ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक जनआंदोलन के रूप में उभरा है। इस अभियान के माध्यम से उन्होंने स्थानीय समुदायों को जोड़ते हुए वैज्ञानिक और पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को साझा किया। जल संरचनाओं का निर्माण, तालाबों और नालों का पुनर्जीवन, वर्षाजल संग्रहण और जनजागरूकता इस अभियान के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। जल संरक्षण के साथ-साथ मोहन नागर ने जैविक कृषि, गो-संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति तक सीमित नहीं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुधन संरक्षण और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। इसी सोच के तहत उन्होंने किसानों, युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा।

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कई बार सम्मानित किया गया
नागर के कार्यों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2019 में राष्ट्रीय ‘जल प्रहरी’ सम्मान, 2020 में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ‘वाटर हीरो’ सम्मान, मध्य प्रदेश सरकार का ‘गोपाल पुरस्कार’, भाऊराव देवरस राष्ट्रीय पुरस्कार तथा उनकी काव्य कृति ‘चातुर्मास’ के लिए दुष्यंत कुमार साहित्य अकादमी पुरस्कार उन्हें मिल चुका है। यह उनकी बहुआयामी सोच और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

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जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं नागर
प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर भी मोहन नागर की सक्रिय भूमिका रही है। वर्तमान में वे मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं तथा नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रबंधन मंडल और मध्यप्रदेश शासन वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य भी हैं। इन दायित्वों के माध्यम से वे नीति निर्माण और जनभागीदारी के बीच सेतु का कार्य कर रहे हैं।
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