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संडे वाली दीदी: रेलवे की नौकरी के साथ झुग्गी बस्तियों के बच्चों में बांट रहीं शिक्षा और मुस्कान,26 साल से सेवा

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 08 Mar 2026 07:38 AM IST
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सार

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में कार्यालय अधीक्षक डॉ. मधु शर्मा पिछले 26 वर्षों से गरीब और वंचित बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए काम कर रही हैं। सप्ताहांत में झुग्गी-बस्तियों और स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाने और प्रेरित करने के कारण बच्चे उन्हें प्यार से ‘संडे वाली दीदी’ कहते हैं।

Sunday Wali Didi: Along with her job in the Railways, she is spreading education and smiles among the children
मधु शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल रेल मंडल में कार्यरत कार्यालय अधीक्षक मधु शर्मा अपने काम के साथ समाज सेवा का ऐसा उदाहरण पेश कर रही हैं, जिसने उन्हें शहर में एक अलग पहचान दिलाई है। बीते 26 वर्षों से वे गरीब और वंचित बच्चों की शिक्षा तथा उनके समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही हैं। झुग्गी-बस्तियों के बच्चे उन्हें प्यार से ‘संडे वाली दीदी’ कहकर पुकारते हैं। रेलवे की जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज सेवा में उनके योगदान को देखते हुए इटली की कोनियो यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है।
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सप्ताहांत बच्चों के नाम
डॉ. मधु शर्मा सप्ताह के सोमवार से शुक्रवार तक रेलवे की ड्यूटी निभाती हैं, जबकि शनिवार को वे सरकारी स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को प्रेरक भाषण और जीवन कौशल की शिक्षा देती हैं। वहीं हर रविवार को वे झुग्गी-बस्तियों में जाकर बच्चों को स्वच्छता, योग, भारतीय संस्कृति, सामान्य ज्ञान और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी बातें सिखाती हैं। वे बच्चों को प्रेरणादायक कहानियां सुनाकर उन्हें पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करती हैं। यही वजह है कि बस्तियों के बच्चे उन्हें स्नेहपूर्वक ‘संडे वाली दीदी’ के नाम से जानते हैं।

महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी काम
डॉ. शर्मा केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं हैं। वे महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूकता अभियान चला रही हैं। इसके तहत वे समय-समय पर ऑनलाइन और ऑफलाइन निशुल्क सत्र आयोजित कर महिलाओं को तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती हैं।

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दृष्टिबाधित बच्चों के लिए रिकॉर्ड करती हैं पाठ्य सामग्री
दृष्टिबाधित बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के लिए वे स्वयं पाठ्य-सामग्री रिकॉर्ड कर उपलब्ध कराती हैं, ताकि वे आसानी से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके अलावा बच्चों को मोबाइल और नशे की लत से दूर रखने के लिए उन्हें खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास भी करती हैं।

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26 साल से सेवा का सिलसिला
डॉ. मधु शर्मा पिछले 13 वर्षों से भोपाल में और उससे पहले 14 वर्षों तक शाजापुर में रहकर सैकड़ों गरीब और वंचित बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला चुकी हैं। उनके इस समर्पित प्रयास से न केवल कई बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में मदद मिली है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी जगी है। उनकी इस सेवा भावना पर भोपाल रेल मंडल भी गर्व महसूस करता है।


 
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