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बरगी में नियमों का 'क्रूज' भी डूबा: एनजीटी के आदेश का उल्लंघन कर बांध में कराया जा रहा था जानलेवा जलविहार

Anand Pawar Anand Pawar
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:07 PM IST
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सार

बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के बाद अब पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है।आरोप है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट (एससी) के आदेश के बावजूद डीजल से चलने वाले क्रूज का संचालन किया जा रहा था। यहीं नहीं यह वॉटर (Prevention and Control of Pollution) एक्ट, 1974 के प्रावधनों का खुला उल्लंघन हैं।

The 'cruise' of the rules also sank in Bargi: Deadly water sports were being organised in the dam in violatio
पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे की याचिका पर एनजीटी ने वॉटर बॉडी में क्रूज संचालन पर रोक लगाई है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम हुए क्रूज हादसे ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि पर्यावरणीय नियमों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में 6 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। अब सामने आ रहा है कि बरगी डेम में एनजीटी के आदेश और पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन कर यांत्रिक नौका का संचालन किया जा रहा था। दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे की याचिका पर वर्ष 2023 में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पेयजल स्रोतों जैसे भोपाल के बड़े तालाब और नर्मदा नदी से जुड़े बांधों में डीजल से संचालित मोटर चलित नाव और क्रूजों का संचालन नहीं किया जा सकता। इस आदेश को चुनौती देने मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को सही ठहराया था और इसे पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से उपयुक्त करार दिया था। इसके बावजूद बरगी डैम में मोटराइज्ड क्रूज का संचालन किया जा रहा था। इससे पर्यटन विकास निगम के साथ ही जिला प्रशासन के अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहें है। क्रूज संचालन सीधे एनजीटी के अंतिम आदेश का उल्लंघन है। 
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पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे ने बताया कि उन्होंने उनकी याचिका में जल (प्रदूषण की रोकथाम व नियंत्रण) कानून, 1974 के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। इसके अनुसार किसी भी पीने के उपयोग में लेने वाली जल संरचना में उसकी गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली गतिविधि नहीं हो सकती। इसके बावजूद भोपाल के बड़े तालाब में डीजल से चलने वाली मोटराइज्ड क्रूज का इस्तेमाल किया जा रहा था। डीजल से चलने वाले क्रूज को जल गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा मानते हुए एनजीटी ने प्रदेश की वॉटर बॉडी में क्रूज के संचालन पर रोक लगाई थी। इसके बाद से ही भोपाल की बड़ी झील में क्रूज का संचालन बंद हैं। 
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यांत्रिक क्रूज बांधों के लिए इसलिए खतरा 
डीजल चलित यांत्रिक नौकाओं के संचालन से उनके धुएं में मौजूद सल्फर और अन्य रसायन पानी में मिलकर जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे जैव विविधता प्रभावित होती है और पानी की प्राकृतिक शुद्धिकरण क्षमता भी घटती है। दरअसल पानी की गुणवत्ता को जलीय जीव ही बेहतर करते है, उनकी कमी से शुद्धता कम होती जाती है। सल्फर युक्त पानी जलीय जीव के लिए जहर का काम करता है और वह मर जाते हैं। जलीय जीव की कमी से पानी की गुणवत्ता भी लगातार कम होती है।  

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बरगी बांध का पानी बी श्रेणी का 
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी का पानी की गुणवत्ता प्रदूषण के कारण लगातार प्रभावित होती जा रही है। नर्मदा नदी में अब बहुत कम हिस्सों में ही बी श्रेणी का पानी बचा है, जो अपेक्षाकृत साफ माना जाता है। वहीं, ज्यादातर जगहों पर पानी की गुणवत्ता गिरकर सी श्रेणी में पहुंच गई है, यानी पानी ज्यादा प्रदूषित हो चुका है। सी श्रेणी का पानी सीधे पीने लायक नहीं होता, इसे साफ (ट्रीटमेंट) करने के बाद ही उपयोग किया जा सकता है। बरगी बांध का पानी बी श्रेणी का है। इस पानी का उपयोग पीने के लिए होता है। यानि यहां पर डीजल मोटर बोट या क्रूज का संचालन नहीं किया जा सकता। 

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मौसम विभाग ने जारी किया था अलर्ट फिर क्यों किया क्रूज संचालन
जबलपुर के क्रूज हादसे को लेकर मौसम विभाग के अलर्ट के बाद क्रूज संचालन की बड़ी चूक सामने आई है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी जारी की। ऐसे में बांध या नदी में नावों व क्रूज का संचालन नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद बरगी में क्रूज चलाई गई और उसका अंजाम बड़े हादसे के रूप में सामने आया।
 
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एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना- पांडे 
पर्यावरणविद सुभाष सी. पांडे ने कहा कि पीने के पानी में मोटराज्ड बोट का संचालन किया ही नहीं जा सकता। बरगी डैम का पानी बी श्रेणी का है। वहां तो यह हो ही नहीं सकता। फिर एनजीटी का अंतिम आदेश है कि पीने के पानी की जल संरचना में इस प्रकार की गतिविधि नहीं हो सकती। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उस आदेश पर अपनी मुहर लगाई है। उसके बाद भी बरगी डैम में डीजल चलित यांत्रिक बोट और क्रूज का संचालन सीधे सीधे एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है। यह वाटर एक्ट 1974 का भी उल्लंघन हैं। 

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सिर्फ रामसर साइट पर ही प्रतिबंध : इलैयाराजा  
वहीं, पर्यटन विभाग के सचिव इलैयाराजा टी. का कहना है कि एनजीटी के आदेश के अनुसार क्रूज और मोटरराज्ड बोट पर प्रतिबंध सिर्फ रामसर साइट पर ही है।
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