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MP: एसपी ऑफिस पहुंचकर पिता ने बेटे के साथ खुद पर डाला पेट्रोल, आत्मदाह की कोशिश; दो साल में 56 आवेदन दे चुका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: छतरपुर ब्यूरो Updated Wed, 17 Jun 2026 08:57 AM IST
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सार

जब सुशासन के दौर में पीड़ित दो वर्ष पूर्व हुई चोरी के मामले में 56 आवेदन देकर थक चुका, तो वह छतरपुर एसपी कार्यालय पहुंचा और अपने बेटे के साथ खुद पर पेट्रोल उड़ेलकर आत्मदाह का प्रयास किया। इतना ही नहीं, न्याय की उम्मीद में पीड़ित ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की भी शरण ली, लेकिन उसे वहां से भी न्याय नहीं मिला। पढ़ें सिस्टम पर सवाल खड़े करने वाली ये पूरी खबर

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एसपी कार्यालय में आत्मदाह का प्रयास। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छतरपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक ने अपने बेटे के साथ खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को समझाया और बड़ा हादसा टाल दिया। लेकिन सुशान और सिस्टम पर यह घटनाक्रम गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


आत्मदाह का प्रयास करने वाले प्रमोद तिवारी का आरोप है कि दो वर्ष पहले उनके घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए थे, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला। उन्होंने तत्कालीन नौगांव थाना प्रभारी सतीश सिंह और पुलिस विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस की मिलीभगत के कारण चोरी गया माल बरामद होने के बावजूद उन्हें वापस नहीं सौंपा गया।

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प्रमोद तिवारी का कहना है कि न्याय की उम्मीद में वे लगातार अधिकारियों और विभिन्न विभागों के चक्कर काटते रहे। उनके अनुसार, अब तक वे 55 से अधिक आवेदन दे चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। मामले को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण भी ली, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने न्यायालय में गलत और भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, जिससे उन्हें राहत नहीं मिल सकी।

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पीड़ित का परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा था
पीड़ित ने कहा कि लगातार प्रयासों के बावजूद न्याय नहीं मिलने से वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। उनका आरोप है कि पुलिस अधिकारियों की उदासीनता के कारण उनका परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। इसी वजह से उन्होंने एसपी कार्यालय के बाहर आत्मदाह जैसा कदम उठाने का प्रयास किया।


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मुख्यमंत्री से मिलने की पीड़ित ने कही बात
प्रमोद तिवारी ने मांग की कि उन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने का अवसर दिया जाए, ताकि वे अपनी पूरी पीड़ा और मामले की वास्तविकता उनके सामने रख सकें। उनका कहना है कि जब तक उन्हें इस संबंध में ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

समझाइश देकर शांत कराया मामला
घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित को समझाइश देकर शांत कराया और मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। हालांकि, इस मामले पर जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस का बयान सामने आने के बाद अपडेट किया जाएगा। 

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