दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य के लिए क्यों अहम? जीत और हार के अलग-अलग मायने
दतिया उपचुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पकड़ और भाजपा में उनकी भूमिका पर भी असर डाल सकता है। टिकट कटने के बाद उन्होंने पूरे चुनाव में भाजपा के लिए सक्रिय प्रचार किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सिर्फ भाजपा और कांग्रेस की जीत-हार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके बाद सबसे ज्यादा नजर पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका पर रहेगी। टिकट कटने के बावजूद उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरी ताकत झोंकी। ऐसे में चुनाव परिणाम को उनकी राजनीतिक पकड़ और संगठन में प्रभाव के नजरिये से भी देखा जाएगा।
यदि भाजपा यह सीट कांग्रेस से जीतती है, तो इसे नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव के रूप में भी देखा जाएगा। टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनाव लड़ाया। टिकट कटने के बाद दतिया में कई कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई थी और विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। ऐसे में जीत का संदेश यह होगा कि वे कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में सफल रहे। भाजपा की जीत से पार्टी में उनकी स्वीकार्यता और मजबूत हो सकती है। वहीं, यह चर्चा भी तेज हो सकती है कि भविष्य में उन्हें संगठन में कोई नई जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही यह भी माना जाएगा कि दतिया में उनका जनाधार अब भी कायम है।
ये भी पढ़ें- बाघों की बढ़ती संख्या के साथ बढ़ रहा संघर्ष? MP में 6 माह में वन्यजीव ने ली 43 जान, टाइगर सबसे बड़ा 'किलर'
वहीं, यदि भाजपा चुनाव हार जाती है, तो टिकट बदलने के फैसले और स्थानीय चुनावी रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं। पार्टी के भीतरघात की चर्चाओं को भी बल मिलेगा। विरोधी गुट यह तर्क दे सकते हैं कि दतिया में नरोत्तम मिश्रा का पहले जैसा प्रभाव नहीं रहा या फिर उन्हें अपेक्षित संगठनात्मक सहयोग नहीं मिला।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि किसी एक उपचुनाव के आधार पर नरोत्तम मिश्रा की पूरी राजनीतिक भूमिका का आकलन पार्टी नहीं करेगी। प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा में उनका अनुभव और संगठनात्मक महत्व बना रहेगा। ऐसे में परिणाम चाहे जो भी हो, भविष्य में उन्हें संगठन या पार्टी में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।
ये भी पढ़ें- MP News: 'मैं संकल्प लेता हूं कि नशा नहीं करूंगा...' सीएम मोहन यादव ने युवाओं को दिलाई नशामुक्ति की शपथ
दतिया उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह शिवराज सरकार में नंबर दो रहे नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। वे छह बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। इनमें लगातार तीन बार दतिया से विधायक रहे और लंबे समय तक क्षेत्र की राजनीति का प्रमुख चेहरा बने रहे। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से करीब साढ़े सात हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए इस उपचुनाव के नतीजे को उनकी राजनीतिक पकड़ की एक महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
