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बाघों की बढ़ती संख्या के साथ बढ़ रहा संघर्ष? MP में 6 माह में वन्यजीव ने ली 43 जान, टाइगर सबसे बड़ा 'किलर'

Sun, 02 Aug 2026 08:47 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 02 Aug 2026 08:47 AM IST
सार

मध्य प्रदेश में बाघों और अन्य वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा है। इस साल 14 जून तक वन्यजीवों के हमलों में 43 लोगों की मौत हुई, जिनमें सबसे ज्यादा 22 मौतें बाघ के हमलों में दर्ज की गईं।
 

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Is conflict rising alongside the growing tiger population? Wildlife claimed 43 lives in MP in six months; tige
बांधवगढ़ में बाघ के हमले में बच्चे की जान गई (फाइल फोटो )

विस्तार

मध्यप्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण की सफलता मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2026 में 14 जून तक वन विभाग के रिकॉर्ड में वन्यजीवों के हमलों में 43 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इनमें 22 मौतें केवल बाघ के हमलों में हुई हैं। सबसे ज्यादा घटनाएं सिवनी और शहडोल संभाग में सामने आई हैं, जहां बाघ, हाथी और भालू का मानव बस्तियों से लगातार संपर्क बढ़ रहा है। वन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि अधिकांश घटनाएं जंगल के भीतर नहीं, बल्कि जंगल से लगे गांवों, खेतों, महुआ और तेंदूपत्ता संग्रह वाले इलाकों में हुई हैं। वन्यजीवों के प्राकृतिक क्षेत्र सिमटने और आबादी बढ़ने से संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष पहली बार महुआ और तेंदूपत्ता बीनने वालों की बाघ ने जान ली है। 
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वन विभाग के आकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 13 मौतें शहडोल संभाग (बांधवगढ़, अनूपपुर और दक्षिण शहडोल) में हुईं, जबकि 10 मौतें सिवनी क्षेत्र (पेंच टाइगर रिजर्व, दक्षिण सिवनी और बरघाट) में दर्ज की गईं। इसके बाद बालाघाट में चार, सीधी में तीन और पन्ना व छिंदवाड़ा में दो-दो लोगों की जान गई।
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वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून के बीच सबसे अधिक घटनाएं मार्च, अप्रैल और मई में हुईं। इसी दौरान ग्रामीण और आदिवासी महुआ, तेंदूपत्ता, लकड़ी और चारा लेने बड़ी संख्या में जंगलों में जाते हैं, जिससे वन्यजीवों से आमना-सामना बढ़ जाता है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ, तेंदुआ, भालू और हाथियों की संख्या बढ़ने के साथ उनके विचरण क्षेत्र भी बढ़े हैं। वहीं जंगलों के आसपास खेती, सड़क, रेलवे लाइन और बस्तियों का विस्तार होने से संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वन्यजीव गलियारों (कॉरिडोर) की सुरक्षा और जंगल से लगे गांवों में विशेष सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं। 

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क्यों बढ़ रहा है मानव-वन्यजीव संघर्ष
 वन विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं। प्रदेश में बाघ, हाथी और भालू जैसे वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर जंगलों के आसपास गांवों का विस्तार, खेती बढ़ने और वन्यजीव कॉरिडोर के सिकुड़ने से इंसानों और वन्यजीवों का आमना-सामना पहले की तुलना में अधिक हो रहा है।
गर्मी के मौसम में पानी और भोजन की तलाश में वन्यजीव जंगलों से बाहर निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर महुआ, तेंदूपत्ता, जलाऊ लकड़ी संग्रह और मवेशी चराने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजाना जंगलों में जाते हैं। अधिकांश घटनाएं इन्हीं परिस्थितियों में सामने आ रही हैं।  

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किस वन्यजीव ने कितनी जान ली
बाघ/बाघिन – 22
हाथी – 8
जंगली सुअर – 7
भालू – 4
सियार – 3
तेंदुआ – 1
अन्य वन्यजीव – 1

 सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र
क्षेत्र    मौतें
शहडोल संभाग
(बांधवगढ़, अनूपपुर, दक्षिण शहडोल)    13
सिवनी क्षेत्र (पेंच, दक्षिण/उत्तर सिवनी, बरघाट)    10
बालाघाट    4
सीधी    3
पन्ना    2
छिंदवाड़ा    2
अन्य जिले    9

माह अनुसार मौत की संख्या 
जनवरी : 8 मौत
फरवरी : 4 मौत
मार्च : 7 मौत
अप्रैल : 10 मौत
मई : 8 मौत
जून (14 जून तक) : 6 मौत

पांच साल के आकड़े- 
2020-21 से 2024-25 तक मानव मौतें : 406
घायल लोग : 5,804
मवेशियों की मौत : 72,627
मुआवजा : 88.38 करोड़ रुपये
 
वन बल प्रमुख बोले- लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियान
राज्य वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने बताया कि वन्यजीवों से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। जंगल से लगे गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जाता है। हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में 'गज मित्र दल' गांव-गांव जाकर लोगों को सचेत करता है। वन विभाग का स्टाफ भी नियमित रूप से ग्रामीणों को जंगल में सावधानी बरतने की सलाह देता है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में चेतावनी और समझाइश के बावजूद लोग तेंदूपत्ता, महुआ संग्रह या अन्य कार्यों के लिए जंगल के संवेदनशील हिस्सों में चले जाते हैं, जिससे हादसे हो जाते हैं। इस वर्ष बाघ से होने वाली मौतों में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके कारणों की पहचान के लिए विभाग हर घटना का विस्तृत ऑडिट और जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जा सके।
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