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MP में फार्मासिस्टों की कमीः सरकारी अस्पतालों में नियमों की अनदेखी, जेपी में आयुर्वेद डॉ. बांट रहे एलोपैथ दवा?
Sat, 01 Aug 2026 06:46 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 01 Aug 2026 06:46 PM IST
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जेपी अस्तपाल में दवा वितरण करते आयुर्वेद इंटर्न डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की भारी कमी अब मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक दवा वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। राजधानी भोपाल के जयप्रकाश (जेपी) जिला अस्पताल में पंजीकृत फार्मासिस्ट के बजाय आयुर्वेद इंटर्न से एलोपैथिक दवाओं का वितरण कराया जा रहा है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि फार्मेसी अधिनियम के प्रावधानों और मरीजों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब स्वास्थ्य विभाग निजी मेडिकल स्टोरों पर बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा वितरण के खिलाफ अभियान चला रहा है। सवाल यह है कि जब निजी संस्थानों पर सख्ती हो रही है, तो सरकारी अस्पतालों में नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
जेपी अस्पताल में उठे गंभीर सवाल
राजधानी के मॉडल अस्पताल माने जाने वाले जेपी अस्पताल में आयुर्वेद इंटर्न मरीजों को एलोपैथिक दवाएं वितरित कर रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह सवाल उठता है कि चिकित्सकीय पर्चे का मिलान, सही दवा का चयन, उचित मात्रा और मरीज को आवश्यक परामर्श देने जैसी जिम्मेदारी कौन निभा रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार दवा वितरण केवल दवा थमाने का काम नहीं है। इसमें पर्चे की जांच, दवा की पुष्टि, मात्रा, अवधि और संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी देना भी शामिल होता है। छोटी-सी चूक भी मरीज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
क्या कहते हैं नियम?
फार्मेसी अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सकीय पर्चे पर दवाओं का वितरण पंजीकृत फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी मानी गई है। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि नॉन-फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण नियमों के विपरीत है और ऐसी स्थिति में कार्रवाई का प्रावधान भी है।
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यह भी पढ़ें-राहुल गांधी के पुतले पर गोबर पोतकर किया दहन, संसद में राम मंदिर मुद्दे पर हुए विरोध के खिलाफ प्रदर्शन
विभाग चला रहा अभियान, अपने अस्पतालों पर सवाल
छिंदवाड़ा की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग मेडिकल स्टोरों और अस्पतालों में दवा वितरण व्यवस्था की जांच कर रहा है। बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा वितरण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में जेपी अस्पताल जैसे सरकारी संस्थान में सामने आए आरोप विभाग के अभियान की प्रभाव शीलता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
सीएमएचओ ने कही कार्रवाई की बात
भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि जिले में लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। यदि जेपी अस्पताल में भी नियमों के विपरीत दवा वितरण की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें- जुलाई की झमाझम भी बेअसर,मध्य प्रदेश में 13% बारिश अब भी कम,अगले 4 दिन तेज बरसात के आसार नहीं
प्रदेश में आधे से भी कम नियमित फार्मासिस्ट
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अंबर चौहान के अनुसार मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की आवश्यकता के अनुसार करीब 8 हजार फार्मासिस्टों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में केवल करीब साढ़े तीन हजार नियमित फार्मासिस्ट ही कार्यरत हैं। शेष स्थानों पर आउटसोर्स कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, जबकि कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण नॉन-फार्मासिस्ट से दवाओं का वितरण कराया जा रहा है।
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जेपी अस्पताल में उठे गंभीर सवाल
राजधानी के मॉडल अस्पताल माने जाने वाले जेपी अस्पताल में आयुर्वेद इंटर्न मरीजों को एलोपैथिक दवाएं वितरित कर रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह सवाल उठता है कि चिकित्सकीय पर्चे का मिलान, सही दवा का चयन, उचित मात्रा और मरीज को आवश्यक परामर्श देने जैसी जिम्मेदारी कौन निभा रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार दवा वितरण केवल दवा थमाने का काम नहीं है। इसमें पर्चे की जांच, दवा की पुष्टि, मात्रा, अवधि और संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी देना भी शामिल होता है। छोटी-सी चूक भी मरीज के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
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क्या कहते हैं नियम?
फार्मेसी अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुसार चिकित्सकीय पर्चे पर दवाओं का वितरण पंजीकृत फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी मानी गई है। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि नॉन-फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण नियमों के विपरीत है और ऐसी स्थिति में कार्रवाई का प्रावधान भी है।
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छिंदवाड़ा की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग मेडिकल स्टोरों और अस्पतालों में दवा वितरण व्यवस्था की जांच कर रहा है। बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट के दवा वितरण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में जेपी अस्पताल जैसे सरकारी संस्थान में सामने आए आरोप विभाग के अभियान की प्रभाव शीलता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
सीएमएचओ ने कही कार्रवाई की बात
भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि जिले में लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। यदि जेपी अस्पताल में भी नियमों के विपरीत दवा वितरण की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदेश में आधे से भी कम नियमित फार्मासिस्ट
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अंबर चौहान के अनुसार मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की आवश्यकता के अनुसार करीब 8 हजार फार्मासिस्टों की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में केवल करीब साढ़े तीन हजार नियमित फार्मासिस्ट ही कार्यरत हैं। शेष स्थानों पर आउटसोर्स कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, जबकि कई अस्पतालों में फार्मासिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण नॉन-फार्मासिस्ट से दवाओं का वितरण कराया जा रहा है।
