दतिया विधानसभा का फैसला कल: गांवों की बढ़त, शहर की चुप्पी और भाजपा-कांग्रेस के भीतरघात पर टिकी सबकी नजर
Datia Bye Election: दतिया उपचुनाव का फैसला सोमवार को आएगा, लेकिन मतदान के आंकड़े मुकाबले को बेहद रोचक बना रहे हैं। कम वोटिंग, महिलाओं की घटती भागीदारी, ग्रामीण-शहरी अंतर और त्रिकोणीय मुकाबले ने भाजपा-कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
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विस्तार
दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सोमवार को सामने आएगा। मतगणना सुबह 8 बजे से 20 टेबलों पर 15 राउंड में होगी। यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है। कम मतदान, शहर में वोटिंग की सुस्ती, महिलाओं की घटती भागीदारी, भाजपा में भीतरघात की चर्चा और कांग्रेस की गुटबाजी ने मुकाबले को पूरी तरह खुला बना दिया है। 30 जुलाई को हुए मतदान में 71.42 प्रतिशत वोट पड़े, जो 2023 विधानसभा चुनाव के मुकाबले 8.86 प्रतिशत अंक कम है। कुल 19,528 वोट कम पड़े। इनमें सबसे ज्यादा कमी महिला मतदान में रही। महिला मतदाताओं के 9,495 और पुरुषों के 7,754 वोट कम पड़े। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कम मतदान का फायदा किसे मिलेगा, इसका जवाब अब ईवीएम से ही मिलेगा।
गांवों ने बढ़ाई वोटिंग, शहर में दिखी उदासीनता
बूथवार आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में कई मतदान केंद्रों पर 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान हुआ। बूथ 62 पर सबसे अधिक 92.19 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। इसके विपरीत दतिया शहर के कई बूथों पर मतदान 55 प्रतिशत से भी नीचे रहा। बूथ 110 पर केवल 43.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम है। यानी ग्रामीण मतदाता मतदान के लिए बड़ी संख्या में निकले, जबकि शहरी मतदाताओं ने अपेक्षाकृत कम रुचि दिखाई।
महिलाओं की चुप्पी भी बनी बड़ा फैक्टर
पूरे विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 68.49 रहा, जबकि पुरुषों का 74.05 प्रतिशत रहा। हालांकि 59 बूथ ऐसे रहे जहां महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया, लेकिन कई शहरी बूथों पर महिला मतदान काफी कमजोर रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2023 में भाजपा को महिलाओं का बड़ा समर्थन मिला था। इस बार महिला मतदान में आई कमी से हार जीत का अंतर बहुत कम रह सकता है।
मुकाबला त्रिकोणीय, लेकिन चर्चा दो नेताओं की
चुनाव मैदान में भाजपा के आशुतोष तिवारी, कांग्रेस के घनश्याम सिंह और आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव हैं। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान मुकाबला उम्मीदवारों से ज्यादा पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के इर्द-गिर्द घूमता रहा। भाजपा में टिकट बदलने के बाद कार्यकर्ताओं की नाराजगी और भीतरघात की चर्चा लगातार बनी रही। दूसरी ओर कांग्रेस भी स्थानीय स्तर पर गुटबाजी के आरोपों से पूरी तरह बाहर नहीं निकल सकी।
किसके पक्ष में क्या माहौल
भाजपा के पक्ष में
- - सरकार और पूरे संगठन ने पूरी ताकत झोंकी।
- - एक दर्जन से अधिक मंत्री, सांसद और विधायकों ने क्षेत्र में प्रचार किया।
- - जातीय समीकरणों के हिसाब से अलग-अलग नेताओं की ड्यूटी लगाई गई।
- - सत्ता में होने का लाभ मिलने की उम्मीद।
- - कांग्रेस की स्थानीय गुटबाजी का फायदा मिल सकता है।
भाजपा की चिंता
- - आशुतोष तिवारी नया चेहरा हैं।
- - नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से कार्यकर्ताओं की नाराजगी की चर्चा।
- - शहर में कम मतदान भाजपा के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
कांग्रेस के पक्ष में
- - घनश्याम सिंह क्षेत्र में पहले विधायक रह चुके हैं।
- - ग्रामीण इलाकों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
- - प्रदेश स्तर पर पार्टी ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा।
- - भाजपा में भीतरघात की चर्चा का लाभ मिलने की उम्मीद।
कांग्रेस की चिंता
- - स्थानीय स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आई।
- - पार्टी के अंदर ही आरोप-प्रत्यारोप।
- - आजाद समाज पार्टी के मैदान में होने से दलित वोटों में सेंध की आशंका।
आजाद समाज पार्टी क्या बिगाड़ सकती है?
दामोदर यादव लंबे समय से क्षेत्र में किसान, सड़क, बिजली और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें दलित, ओबीसी और कुछ ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन मिल सकता है। हालांकि पार्टी का मजबूत संगठन नहीं होने से उनके लिए जीत की राह आसान नहीं मानी जा रही। लेकिन वे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
पढ़ें: दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य के लिए क्यों अहम? जीत और हार के अलग-अलग मायने
नरोत्तम मिश्रा की साख पर भी नजर
दतिया लंबे समय तक पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है। टिकट बदलने के बाद भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पूरी सक्रियता दिखाई। ऐसे में परिणाम को उनके प्रभाव और संगठन पर पकड़ के नजरिये से भी देखा जाएगा। इस चुनाव के परिणाम नरोत्तम मिश्रा की आगे की राजनीतिक भविष्य तय करने वाला माना जा रहा हैं।
सबसे कम मतदान वाले 10 बूथ
दतिया शहर के कई मतदान केंद्रों पर मतदान सबसे कम दर्ज हुआ। इनमें अधिकांश मतदान केंद्र दतिया शहर क्षेत्र के हैं। यानी की शहरी क्षेत्र के मतदाताओं ने चुनाव में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसमें बूथ 110-43.20%, बूथ 100- 53.04%, बूथ 102-53.56%, बूथ 92-53.97%, बूथ 122-54.98%,
बूथ 136-54.86%, बूथ 106-55.49%, बूथ 105-56.18%, बूथ 104-57.90% और बूथ 124-58.41% बूथ शामिल है।
सबसे ज्यादा मतदान वाले 10 बूथ
शहर में ग्रामीण क्षेत्रों के कई मतदान केंद्रों ने रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया। इनमें बूथ 62-92.19%, बूथ 84-89.04%, बूथ 275- 88.94%, बूथ 67-88.34%, बूथ 251-87.50%, बूथ 18- 87.82%, बूथ 290-86.46%, बूथ 235-86.26%, बूथ 236 – 85.86%, बूथ 231 – 85.47% बूथ शामिल हैं।
जहां महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ा
पूरे विधानसभा में भले ही महिलाओं का मतदान प्रतिशत कम रहा है, लेकिन 59 बूथों पर महिलाओं ने पुरुषों को मतदान करने में पीछे छोड़ दिया। इनमें
बूथ 18 – पुरुष 86.81%, महिला 88.98%, बूथ 24 – पुरुष 79.74%, महिला 85.51%, बूथ 35 – पुरुष 80.95%, महिला 85.58%, बूथ 37 – पुरुष 67.11%, महिला 83.39%, बूथ 74 – पुरुष 76.91%, महिला 78.71%, बूथ 84 – पुरुष 86.76%, महिला 91.76%, बूथ 190 – पुरुष 81.00%, महिला 87.87%, बूथ 231 – पुरुष 81.45%, महिला 89.80% और बूथ 234 – पुरुष 72.90%, महिला 90.27% शामिल हैं।
जहां महिलाओं की भागीदारी सबसे कमजोर रही
कई बूथों पर महिला मतदान पुरुषों की तुलना में काफी कम रहा। इनमें बूथ 135 – पुरुष 72.02%, महिला 48.31%, बूथ 146 – पुरुष 55.51%, महिला 48.62%, बूथ 92 – पुरुष 58.26%, महिला 49.38%, बूथ 136 – पुरुष 60.36%, महिला 49.45%, बूथ 130 – पुरुष 74.07%, महिला 51.60%,
बूथ 138 – पुरुष 66.74%, महिला 51.60%, बूथ 110 – पुरुष 48.28%, महिला 36.97% यह बूथ शामिल हैं।
पुरुष और महिला मतदान में सबसे बड़ा अंतर
वहीं, कुछ बूथों पर पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच 15 से 20 प्रतिशत तक का अंतर दर्ज हुआ।
बूथ पुरुष महिला अंतर
- 135 72.02% 48.31% 23.71%
- 10 78.67% 58.47% 20.20%
- 27 72.41% 54.70% 17.71%
- 5 67.37% 54.94% 12.43%
- 42 77.17% 60.08% 17.09%
55 प्रतिशत से कम मतदान वाले प्रमुख बूथ
- बूथ 110 – 43.20%
- बूथ 100 – 53.04%
- बूथ 92 – 53.97%
- बूथ 102 – 53.56%
- बूथ 122 – 54.98%
- बूथ 136 – 54.86%
38 बूथों पर 80 प्रतिशत से अधिक मतदान
पूरे विधानसभा क्षेत्र में दर्जनों मतदान केंद्र ऐसे रहे जहां मतदान 80 प्रतिशत से ऊपर पहुंचा। इनमें बूथ 12, 18, 23,24,35,45, 62, 63, 67,76, 77,81, 84, 87, 88, 89,153, 190, 210, 228, 231,232, 234, 235, 236,237, 245, 246, 251,254,261, 263,264,271,275, 284, 289 और 290 प्रमुख रहे। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को लेकर उत्साह शहरी इलाकों की तुलना में कहीं अधिक रहा।
आंकड़ों में उपचुनाव
- कुल मतदान केंद्र : 291
- कुल मतदाता : 2,20,410
- कुल मतदान : 1,57,414
- कुल मतदान प्रतिशत : 71.42%
- पुरुष मतदान : 74.05%
- महिला मतदान : 68.49%
