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MP: देशभर के रक्तवीरों ने बचाई छतरपुर की प्रसूता की जान, गलत ब्लड चढ़ाने से बिगड़ी थी हालत; ऐसे पहुंचा अस्पताल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: छतरपुर ब्यूरो Updated Sat, 07 Mar 2026 11:23 AM IST
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सार

जिला अस्पताल में गलत रक्त चढ़ाने से छतरपुर की प्रसूता मालती पाल की हालत गंभीर हो गई। जांच में उसका दुर्लभ बॉम्बे पॉजिटिव ब्लड ग्रुप सामने आया। विशाखापट्टनम से कार्गो विमान से रक्त मंगाकर देशभर के रक्तदाताओं की मदद से उसकी जान बचाई गई।

Nationwide Blood Donors Help Save Chhatarpur Pregnant Woman after wrong blood transfusion MP News in Hindi
प्रसूता की बची जान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छतरपुर जिले के दौरिया गांव की 26 वर्षीय मालती पाल के लिए दुर्लभ ‘बॉम्बे पॉजिटिव’ (Oh) ब्लड का विशाखापट्टनम से ग्वालियर तक पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। जिला अस्पताल की लापरवाही से गलत ब्लड चढ़ाने के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई थी, लेकिन देशभर के रक्तदाताओं के प्रयास से आखिरकार सही ब्लड की व्यवस्था हो सकी।

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मालती ने जिला अस्पताल में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के बाद उसकी ब्लीडिंग बंद नहीं हो रही थी। 1 मार्च को उसके पति दीपक पाल ने रक्तदान किया। जांच में मालती का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव बताकर उसे रक्त चढ़ा दिया गया, जिसके बाद उसकी हालत और बिगड़ गई।

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गंभीर स्थिति में उसे ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां जांच में पता चला कि मालती का ब्लड ग्रुप सामान्य ओ पॉजिटिव नहीं बल्कि दुनिया का बेहद दुर्लभ बॉम्बे पॉजिटिव (Oh) है। गलत रक्त चढ़ने से उसका खून संक्रमित हो गया और उसकी किडनी पर असर पड़ने से डायलिसिस की जरूरत पड़ गई।

इसके बाद रक्तवीर सेवादल के अमित जैन ने देशभर में संपर्क किया। आखिरकार विशाखापट्टनम में यह दुर्लभ ब्लड उपलब्ध हुआ, जिसे कार्गो विमान के जरिए ग्वालियर भेजा गया और समय रहते मालती को चढ़ाया गया। डॉक्टरों की निगरानी में अब मालती की हालत में धीरे-धीरे सुधार बताया जा रहा है।


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● 10 लाख में केवल 4 लोगों में मिलता है बॉम्बे ब्लड ग्रुप
इस ब्लड ग्रुप की खोज 1952 में मुंबई में हुई थी। इसमें H एंटीजन नहीं होता, इसलिए सामान्य जांच में यह ओ ग्रुप जैसा दिखाई देता है।

● जिला अस्पताल में पहचान की सुविधा नहीं
बॉम्बे ब्लड ग्रुप की सही पहचान के लिए एंटी-एच लेक्टिन और एडवांस मशीनों की जरूरत होती है, जो जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं।

● विशाखापट्टनम से कार्गो विमान से पहुंचा रक्त
रक्तवीर सेवादल के अमित जैन के प्रयास से विशाखापट्टनम से दुर्लभ रक्त ग्वालियर भेजा गया।

● देशभर के रक्तदाताओं ने निभाई अहम भूमिका
मुंबई के विनय शेट्टी, सांगली के विक्रम यादव, सेंधवा के अशोक राठौड़, ब्यावरा के आशीष सिंह, सुल्तानपुर के अनुज श्रीवास्तव और कांगड़ा के हरीश कुमार सहित कई लोगों ने नेटवर्क बनाकर ब्लड उपलब्ध कराया।

● अस्पताल में नई मशीन की मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि जिला अस्पतालों में एंटी-एच लेक्टिन और जेल कार्ड क्रॉस-मैचिंग मशीन उपलब्ध होने से ऐसे मामलों में समय रहते सही ब्लड ग्रुप की पहचान हो सकती है।

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