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एमपी में भीषण गर्मी का कहर: पानी और छांव के अभाव में छिंदवाड़ा में तड़प-तड़प कर गिरे कबूतर, कई की दर्दनाक मौत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो Updated Sun, 26 Apr 2026 09:24 PM IST
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सार

परासिया में भीषण गर्मी और पानी-छांव की कमी से कई कबूतर सड़क पर तड़पकर मर गए। 40 डिग्री पार तापमान और लू ने हालात बिगाड़े। विशेषज्ञों ने लोगों से पक्षियों के लिए पानी रखने और सुरक्षित स्थानों पर दाना देने की अपील की।

Temperature rises, pigeons fall on road; many die on Bhandaria roadheat across 40 degrees in Parasia,
गर्मी से मृत कबूतर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी अब पशु-पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पेंचवेली स्कूल से भंडारिया जाने वाले मार्ग, वार्ड क्रमांक 17 में सड़क पर कई कबूतर तड़पते हुए गिरे मिले, जिनमें से कई की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से इलाके में चिंता का माहौल बन गया है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर के समय तापमान अत्यधिक था और सड़क व आसपास का खुला मैदान तपकर बेहद गर्म हो चुका था। ऐसे में उड़ान भरते या जमीन पर दाना तलाश रहे कबूतर गर्मी सहन नहीं कर पाए और अचानक गिरने लगे। भंडारिया में एक विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे विनय राजा जोशी ने बताया कि सड़क किनारे झाड़ियों के पास कई कबूतर मृत अवस्था में पड़े थे, जबकि कुछ तड़प रहे थे।

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गौरतलब है कि परासिया में इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। सुबह 6 बजे से ही तेज धूप शुरू हो जाती है और दोपहर तक हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं। घरों के भीतर का तापमान भी 36 डिग्री तक पहुंच रहा है। लू और हवा के अभाव ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है, जिससे इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी बेहाल हैं।


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पशु-पक्षियों की देखभाल से जुड़े जितेंद्र मौर्य का कहना है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे मुख्य कारण अत्यधिक तापमान, पानी की कमी और भोजन की अनुपलब्धता है। उन्होंने बताया कि कबूतर अत्यधिक गर्मी सहन करने के लिए अनुकूल नहीं होते। पानी न मिलने से वे अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रख पाते, जिससे उनकी मौत हो सकती है। इसके अलावा अधिक गर्म तासीर वाले अनाज, जैसे बाजरा, का सेवन भी समस्या को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बढ़ते कंक्रीट के कारण तापमान और अधिक बढ़ जाता है, जिससे पक्षियों के लिए ठंडक के विकल्प कम हो जाते हैं। साथ ही गंदगी और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर रहने से कबूतरों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों की छत या बालकनी में मिट्टी के बर्तनों में साफ पानी रखें, ताकि प्यासे पक्षियों को राहत मिल सके। साथ ही सड़कों के बीच दाना डालने से बचें, जिससे पक्षी दुर्घटनाओं और गर्म सतह के संपर्क से बच सकें। विशेषज्ञों ने इस तरह की घटनाओं के कारणों की गहन जांच की आवश्यकता भी जताई है, ताकि भविष्य में इन्हें रोका जा सके।

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