सीहोर जिले के बुधनी में आयोजित किसान सत्याग्रह ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई गर्मी भर दी है। कांग्रेस ने इसे किसानों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बताते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंच से सीधे सरकार को चेतावनी देते हुए 7 मई को प्रदेशव्यापी चक्का जाम का ऐलान कर दिया, जिससे सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है।
पटवारी का तीखा हमला, आय नहीं बढ़ी परेशानियां बढ़ीं
रैली को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने सरकार के ‘किसान हितैषी’ दावों को पूरी तरह खोखला बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अब मजाक बन चुका है। हकीकत यह है कि किसान की आमदनी बढ़ने के बजाय घट गई है और खर्च कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में भाषणों में आय आठ गुना बढ़ जाती है, लेकिन खेत में किसान की हालत आधी रह जाती है।
‘मोदी गारंटी’ पर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस ने चुनावी वादों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि ‘मोदी गारंटी’ केवल कागजों तक सीमित रह गई है। पटवारी ने सवाल उठाया कि किसानों को ₹2700 प्रति क्विंटल गेहूं और ₹3100 प्रति क्विंटल धान का भाव कब मिलेगा। इसके साथ ही लाड़ली बहनों को ₹3000, ₹450 में गैस सिलेंडर और युवाओं को रोजगार देने के वादों को भी अधूरा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार वादों से बच रही है और जनता जवाब मांग रही है।
खाद-बीज की किल्लत, किसान परेशान
सत्याग्रह के दौरान खाद और बीज की कमी सबसे बड़ा मुद्दा रही। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बुवाई के समय किसान खाद के लिए भटकते रहे, लंबी कतारों में खड़े रहे और कई जगह पुलिस की सख्ती भी झेलनी पड़ी। पटवारी ने कहा कि “यूरिया के लिए किसान को अपमान झेलना पड़ रहा है, लेकिन सरकार के पास सिर्फ आंकड़े हैं, समाधान नहीं।” यह मुद्दा किसानों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़ा होने के कारण आंदोलन का केंद्र बन गया।
खरीदी में देरी और पोर्टल गड़बड़ी
कांग्रेस ने सरकारी खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह फेल बताया। आरोप है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी समय पर नहीं हो रही, पोर्टल बार-बार बंद हो रहा है और वेयरहाउस भरे पड़े हैं। इस अव्यवस्था के चलते किसान अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हैं और कई बार उन्हें कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। पटवारी ने कहा कि “सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, लेकिन किसान का पोर्टल ही नहीं चल रहा।”
बिजली संकट और प्रशासनिक दबाव
रैली में किसानों ने बिजली की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बताया। आरोप लगाया गया कि खेती के समय पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही, जिससे फसल प्रभावित हो रही है। साथ ही विभागीय अधिकारियों पर किसानों को परेशान करने के आरोप भी लगे। कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक अत्याचार बताया और कहा कि किसान दोहरी मार झेल रहा है—एक प्राकृतिक और दूसरी सरकारी।
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भूमि अधिग्रहण पर घमासान
पटवारी ने भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि 2013 के कानून के तहत किसानों को चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन सरकार पुराने नियमों के जरिए किसानों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से साफ कहा कि यदि किसानों के हक में फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा।
7 मई को चक्का जाम, सरकार को चेतावनी
सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब आया जब पटवारी ने 7 मई को प्रदेशव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र बॉर्डर से लेकर राजस्थान बॉर्डर तक नेशनल हाईवे जाम किए जाएंगे। इसे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है। पटवारी ने स्पष्ट कहा कि किसान अब चुप नहीं बैठेगा और अपने हक के लिए सड़कों पर उतरेगा।
स्थानीय नेताओं का हमला
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने भी सरकार और स्थानीय नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और प्रशासन जनप्रतिनिधियों की भी नहीं सुन रहा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनौती दी कि यदि उनके पास भ्रष्टाचार के सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक करें।
बड़ी भीड़, शांतिपूर्ण प्रदर्शन
रैली में बड़ी संख्या में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। महाराणा प्रताप चौराहे पर नारेबाजी और ज्ञापन सौंपने के साथ कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसका राजनीतिक असर बड़ा माना जा रहा है। पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, सचिन यादव, शैलेन्द्र पटेल और प्रदेश किसान अध्यक्ष धर्मेंद्र चौहान सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और प्रभावी बना दिया।