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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Society cuts off relations after marrying a widow; now the couple is at the collector's doorstep

MP: विधवा से शादी और अनाथ बच्ची को अपनाने पर दी तालिबानी सजा, किया बहिष्कार, न्याय के लिए भटकते दंपत्ति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Wed, 29 Apr 2026 10:19 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश के सागर जिले के चितौरा गांव में एक युवक द्वारा विधवा महिला से शादी करने और उसकी बच्ची को अपनाने पर पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। आरोप है कि गांव के दबंगों ने ‘कच्चा-पक्का भोजन’ कराने की कुप्रथा न मानने पर यह कदम उठाया।

Society cuts off relations after marrying a widow; now the couple is at the collector's doorstep
विधवा से शादी करने पर परिवार का बहिष्कार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के सागर जिले से सामाजिक रूढ़िवादिता और दबंगई का एक हृदय विदारक मामला सामने आया है। यहां एक युवक को विधवा महिला से विवाह करना और उसकी अनाथ बच्ची को अपनाना इतना भारी पड़ गया कि समाज के ठेकेदारों ने पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। हद तो तब हो गई जब मासूम बच्ची को भी अन्य बच्चों के साथ खेलने से रोक दिया गया। अब यह दंपत्ति न्याय की उम्मीद में कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहा है।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला सागर जिले के ग्राम चितौरा का है। यहां के निवासी राजेंद्र पटेल ने करीब 8 महीने पहले समाज में एक मिसाल पेश करते हुए एक विधवा महिला से विवाह किया था। यह विवाह मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत विधिवत हुआ था। महिला के पहले पति की मृत्यु हो चुकी थी और उसकी एक छोटी बेटी भी थी, जिसे राजेंद्र ने अपनाया।

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भोज नहीं दिया तो कर दिया बहिष्कार

राजेंद्र का आरोप है कि उनकी इस पहल से गांव के दबंग और समाज के कथित मुखिया नाराज हो गए। विवाह के बाद उन पर दबाव बनाया गया कि समाज में रहने के लिए उन्हें पूरे गांव को ‘कच्चा भोजन’ और ‘पक्का भोजन’ कराना होगा। जब उन्होंने इस कुप्रथा और फिजूलखर्ची को मानने से इनकार किया, तो उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया गया।

आसपास के गांवों तक फैला बहिष्कार

पीड़ित परिवार के अनुसार, यह बहिष्कार सिर्फ उनके गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के सीमावर्ती गांवों में भी उनके परिवार को अलग-थलग कर दिया गया है। परिवार का कहना है कि उनकी छोटी बच्ची को गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलने नहीं दिया जाता। इतना ही नहीं, परिवार को किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम में बुलाना भी बंद कर दिया गया है। पिछले 8 महीनों से यह परिवार मानसिक तनाव में जीवन बिताने को मजबूर है।

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कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

मंगलवार को पीड़ित परिवार सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और अपनी पूरी आपबीती सुनाई। राजेंद्र पटेल ने लिखित शिकायत देकर मांग की है कि सामाजिक बहिष्कार करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, परिवार को सुरक्षा और सामाजिक सम्मान दिलाया जाए और मासूम बच्ची के साथ हो रहे भेदभाव को रोका जाए।

 

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