जंगल में छिपा अतीत का रहस्य: मड़ियादो बफर जोन में मिले प्राचीन शैलचित्र, वैज्ञानिक अध्ययन से खुलेंगे कई राज
दमोह के मड़ियादो बफर जोन के तिंदनी और पाली बीट के जंगलों में प्राचीन शैलचित्र मिले हैं। इनमें मानव, वन्यजीव और शिकार के दृश्य उकेरे गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण से क्षेत्र के प्राचीन इतिहास के कई महत्वपूर्ण रहस्य सामने आ सकते हैं।
दमोह के मड़ियादो बफर जोन के तिंदनी और पाली बीट के जंगलों में प्राचीन शैलचित्र मिले हैं। इनमें मानव, वन्यजीव और शिकार के दृश्य उकेरे गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण से क्षेत्र के प्राचीन इतिहास के कई महत्वपूर्ण रहस्य सामने आ सकते हैं।
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दमोह जिले के मड़ियादो बफर जोन के घने जंगल केवल जैव विविधता और वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि प्राचीन मानव सभ्यता के साक्ष्य भी अपने भीतर समेटे हुए हैं। बफर जोन की तिंदनी और पाली बीट के जंगलों में चट्टानों पर बने प्राचीन शैलचित्र मिले हैं। इनमें मानव आकृतियों के साथ वन्यजीव, शिकार, भाला और अन्य हथियारों जैसी आकृतियां उकेरी गई हैं। वन विभाग के अनुसार मड़ियादो बफर जोन के भरका चौकी क्षेत्र समेत करीब आधा दर्जन स्थानों पर ऐसे शैलचित्र मौजूद हैं। घने जंगलों के बीच चट्टानों पर बने ये चित्र संकेत देते हैं कि कभी यहां रहने वाले या जंगल पर निर्भर समुदायों ने अपने जीवन, गतिविधियों और प्राकृतिक परिवेश को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया होगा।
पत्थरों पर झलकती है जंगल पर निर्भर जीवनशैली
शैलचित्रों में मानव और पशुओं की आकृतियों के साथ आखेट (शिकार) से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिलते हैं। कुछ चित्रों में भाले और अन्य अस्त्र भी दिखाई देते हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उस समय जंगलों पर निर्भर समुदायों के जीवन में शिकार, वन संसाधन और संभवतः पशुपालन का महत्वपूर्ण स्थान रहा होगा। हालांकि इन चित्रों की वास्तविक आयु और इन्हें बनाने वाले समुदाय के बारे में अभी कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इनके काल निर्धारण और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि के लिए पुरातत्व विशेषज्ञों और इतिहासकारों द्वारा विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होगा।
लिखित भाषा से पहले चित्रों में दर्ज होती थी कहानी
प्राचीन शैलचित्र उस दौर के मानव जीवन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम माने जाते हैं, जब लिखित अभिलेख उपलब्ध नहीं थे। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मिले प्रागैतिहासिक शैलचित्रों ने शोधकर्ताओं को तत्कालीन मानव की जीवनशैली, पर्यावरण, वन्यजीवों, शिकार और सामाजिक गतिविधियों को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। मड़ियादो के जंगलों में मिले शैलचित्र भी इसी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। संभव है कि इनमें तत्कालीन लोगों ने वन्यजीवों, शिकार, सामुदायिक जीवन या धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया हो। हालांकि इन संभावनाओं की पुष्टि वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही हो सकेगी।
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जंगल के साथ इतिहास की भी विरासत
आज मड़ियादो के जंगल वन्यजीवों के महत्वपूर्ण आवास हैं, लेकिन चट्टानों पर बने ये शैलचित्र इस क्षेत्र के मानव इतिहास की भी एक नई परत सामने लाते हैं। मानव और वन्यजीवों का साथ-साथ चित्रण यह समझने में मदद कर सकता है कि प्राचीन काल में मनुष्य और जंगल के बीच कैसा संबंध था। यदि इन स्थलों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाए तो चित्रों की संख्या, शैली, विषयवस्तु और संभावित कालखंड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
संरक्षण नहीं हुआ तो मिट सकती है अनमोल धरोहर
खुले वातावरण में मौजूद इन शैलचित्रों पर मौसम, बारिश, नमी, तापमान में बदलाव और प्राकृतिक क्षरण का लगातार प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा चट्टानों पर नाम लिखना या अन्य मानवीय हस्तक्षेप भी इनके लिए बड़ा खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्थलों का सर्वेक्षण, फोटोग्राफी, डिजिटल रिकॉर्ड, जीपीएस आधारित दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण जरूरी है। साथ ही इनकी जानकारी सार्वजनिक करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विरासत पर्यटन का बन सकता है नया केंद्र
मड़ियादो बफर जोन पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों के कारण पर्यटन की संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यदि शैलचित्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उनकी ऐतिहासिक महत्ता प्रमाणित होती है, तो यह क्षेत्र प्रकृति, वन्यजीव और विरासत पर्यटन का अनूठा केंद्र बन सकता है। भविष्य में विशेषज्ञों की सलाह और वन विभाग के नियमों के अनुसार चयनित स्थलों को हेरिटेज ट्रेल, व्याख्या केंद्र, सूचना पट्टिकाओं और प्रशिक्षित स्थानीय गाइडों के माध्यम से पर्यटकों से जोड़ा जा सकता है। इससे क्षेत्र को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। हालांकि पर्यटन विकास से पहले इन शैलचित्रों की सुरक्षा और वैज्ञानिक संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक होगा।
वन विभाग ने बताया संरक्षण जरूरी
मड़ियादो वन क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी जेपी मिश्रा ने बताया कि क्षेत्र के कई स्थानों पर प्राचीन शैलचित्र मौजूद हैं। इनमें मानव जीवन, वन्यजीव और आखेट से जुड़ी आकृतियां दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि इन स्थलों का संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है, ताकि यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके। मड़ियादो के जंगलों में मौजूद ये शैलचित्र केवल चट्टानों पर बनी आकृतियां नहीं, बल्कि अतीत को समझने की एक महत्वपूर्ण खिड़की हैं। यदि इनका वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण किया गया, तो यह खोज दमोह ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के इतिहास और पुरातत्व के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
