Damoh News: दमोह में 423 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज, वन विभाग की गणना पूरी; दमोह-हटा रेंज में सबसे अधिक संख्या
दमोह जिले में वन विभाग की गिद्ध गणना में कुल 423 गिद्ध दर्ज किए गए हैं, जिनमें 45 अवयस्क और 378 वयस्क शामिल हैं। हटा और दमोह रेंज में सर्वाधिक गिद्ध पाए गए। सफेद, काला, राज और इंडियन लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध समेत कई प्रजातियां मिलीं। विशेषज्ञों ने इसे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत बताया है।
दमोह जिले में वन विभाग की गिद्ध गणना में कुल 423 गिद्ध दर्ज किए गए हैं, जिनमें 45 अवयस्क और 378 वयस्क शामिल हैं। हटा और दमोह रेंज में सर्वाधिक गिद्ध पाए गए। सफेद, काला, राज और इंडियन लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध समेत कई प्रजातियां मिलीं। विशेषज्ञों ने इसे स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत बताया है।
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वन एवं वन्यजीव संपदा से समृद्ध दमोह जिले में इस वर्ष की गिद्ध गणना पूरी कर ली गई है। वन मंडल दमोह द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 423 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें स्थानीय (देशी) और प्रवासी दोनों प्रकार की प्रजातियां शामिल हैं।
वन मंडलाधिकारी ईश्वर जरांडे ने बताया कि यह गणना 22 मई से 24 मई 2026 के बीच विभिन्न वन परिक्षेत्रों में की गई थी। गणना के दौरान गिद्धों की अलग-अलग प्रजातियों और उनकी उम्र (अवयस्क एवं वयस्क) का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया। दमोह जिले के सिंग्रामपुर से सटे वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और हटा मडियादो बफर जॉन पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण यहां वन्यजीवों की विविधता अधिक पाई जाती है, जिसका असर गिद्धों की आबादी पर भी देखने को मिला है।
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वन विभाग के आंकड़े: किस रेंज में कितने गिद्ध
दमोह रेंज में 0 अवयस्क और 143 वयस्क सहित कुल 143 गिद्ध, हटा रेंज में 29 अवयस्क और 112 वयस्क सहित 141 गिद्ध, सगौनी रेंज में 0, सिंग्रामपुर रेंज में 0 अवयस्क और 4 वयस्क सहित 4 गिद्ध, तेजगढ़ रेंज में 16 अवयस्क और 76 वयस्क सहित 92 गिद्ध, तेंदूखेड़ा रेंज में 0 अवयस्क और 35 वयस्क सहित 35 गिद्ध, तारादेही रेंज में 0 तथा झलोन रेंज में 0 अवयस्क और 8 वयस्क सहित 8 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की, जिससे जिले का कुल योग 45 अवयस्क और 378 वयस्क सहित 423 गिद्ध रहा।
प्रजातियों की विविधता भी दर्ज
गणना में सफेद गिद्ध, काला गिद्ध, यूरेशियन गिद्ध, देसी गिद्ध, इंडियन लॉन्ग बिल्ड गिद्ध और राज गिद्ध जैसी विभिन्न प्रजातियां शामिल पाई गईं। वन विभाग के अनुसार यह विविधता क्षेत्र में स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है।
गिद्धों की पर्यावरण में भूमिका अहम
गिद्ध प्राकृतिक सफाईकर्मी माने जाते हैं, जो मृत पशुओं के अवशेषों को समाप्त कर पर्यावरण को संक्रमण और बीमारियों से बचाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गिद्धों की मौजूदगी से रेबीज और अन्य संक्रामक रोगों के फैलाव पर नियंत्रण रहता है।
मानसून से पहले गणना का महत्व
वन विभाग के मुताबिक मानसून से पहले की गई यह गणना गिद्धों की प्रजनन स्थिति और उनकी गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। मौसम परिवर्तन और मानव गतिविधियों का इनके आवास पर सीधा प्रभाव पड़ता है। वन मंडलाधिकारी ईश्वर जरांडे ने बताया कि जिले में गिद्धों की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन संरक्षण के लिए निरंतर निगरानी और जागरूकता जरूरी है।

दमोह में गिद्ध

दमोह में गिद्ध

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